14 जुलाई 2026
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जयशंकर की गुटेरेस से न्यूयॉर्क में मुलाकात, यूएनएससी 2028-29 अभियान की औपचारिक शुरुआत

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जयशंकर की गुटेरेस से न्यूयॉर्क में मुलाकात, यूएनएससी 2028-29 अभियान की औपचारिक शुरुआत

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की गुटेरेस से मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी — यह यूएनएससी की नौवीं दावेदारी की औपचारिक शुरुआत थी। 'शांति' के छह-सूत्रीय विज़न के साथ भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने का दावा पेश किया है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 14 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क में यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की।
बैठक में पश्चिम एशिया , यूक्रेन और सूडान के संघर्षों पर चर्चा हुई।
भारत ने 2028-2029 कार्यकाल के लिए यूएनएससी की अस्थायी सीट हेतु औपचारिक अभियान शुरू किया।
जयशंकर ने 'शांति' नाम का छह-सूत्रीय विज़न प्रस्तुत किया — जिसमें ग्लोबल साउथ, AI, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं।
यदि निर्वाचित हुआ तो यह 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में भारत का नौवाँ कार्यकाल होगा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 14 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान में जारी संघर्षों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह मुलाकात उसी दिन हुई जब भारत ने 2028-2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अस्थायी सीट हेतु अपना औपचारिक चुनाव अभियान आरंभ किया।

मुख्य घटनाक्रम

जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। वेस्ट एशिया, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया भर की घटनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही, भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग की मजबूती को भी सराहा गया।' बातचीत का केंद्र वैश्विक संकटों पर भारत-संयुक्त राष्ट्र के निरंतर सहयोग पर रहा।

इससे पहले दिन में विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में उपस्थित राजनयिकों और प्रतिनिधियों के समक्ष भारत की यूएनएससी उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया।

भारत का 'शांति' विज़न — छह-सूत्रीय ढाँचा

जयशंकर ने यूएनएससी अभियान के लिए 'शांति' नाम का छह-सूत्रीय दृष्टिकोण पेश किया, जो नियमों, भरोसे और ईमानदारी के ज़रिए सर्वांगीण प्रगति सुनिश्चित करने पर आधारित है। इस ढाँचे की प्रमुख प्राथमिकताएँ इस प्रकार हैं:

पहली — अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को सशक्त बनाना। दूसरी — एक लोकतांत्रिक, समावेशी और प्रभावशाली बहुपक्षीय प्रणाली को आगे बढ़ाना। तीसरी — आधुनिक तकनीक से लैस भविष्य-सक्षम शांति-रक्षा ढाँचा तैयार करना। चौथी — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए मानव-केंद्रित नज़रिया अपनाना। पाँचवीं — अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करना। छठी — आतंकवाद और आतंक-वित्तपोषण के विरुद्ध वैश्विक प्रयासों को तेज़ करना।

ग्लोबल साउथ की आवाज़ और भारत की भूमिका

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में भारत 'ग्लोबल साउथ' यानी विकासशील देशों का प्रतिनिधि बनकर काम करेगा। उन्होंने विकासशील देशों के समर्थन, संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा अभियानों में भारत के योगदान और बहुपक्षीय संस्थाओं को मज़बूत करने में नई दिल्ली की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडे को आगे बढ़ाने और शांति-रक्षा मिशनों को उनके मूल उद्देश्यों पर केंद्रित रखने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

नौवें कार्यकाल की दावेदारी

भारत अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की गैर-स्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ेगा। यदि भारत निर्वाचित होता है, तो यह 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में उसका नौवाँ कार्यकाल होगा। गौरतलब है कि नई दिल्ली एक साथ दो मोर्चों पर सक्रिय है — एक ओर यूएनएससी में स्थायी सीट की अपनी दीर्घकालिक माँग को दोहराना, और दूसरी ओर गैर-स्थायी सीट के ज़रिए वैश्विक शांति-सुरक्षा चर्चाओं में अपनी उपस्थिति बनाए रखना।

आगे की राह

यह यात्रा संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की भारत की व्यापक कूटनीतिक मुहिम का हिस्सा है, जो अगले साल होने वाले चुनाव से पहले तेज़ होती जाएगी। जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत का रुख बातचीत, सहयोग और वैश्विक यथार्थ को प्रतिबिंबित करने वाले सुधारों की वकालत पर टिका रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक विरोधाभास भी उजागर करता है — नई दिल्ली स्थायी सीट की माँग करते हुए गैर-स्थायी सीट के लिए प्रचार कर रही है, जो दोनों लक्ष्यों को एक साथ साधने की कोशिश है। ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने का दावा तब और विश्वसनीय होगा जब भारत संयुक्त राष्ट्र में वास्तविक सुधारों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे, न कि केवल सदस्यता हासिल करने तक सीमित रहे। छह-सूत्रीय 'शांति' ढाँचा व्यापक और महत्वाकांक्षी है, परंतु इसकी असली परीक्षा परिषद में मतदान के समय होगी — जहाँ भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और गुटेरेस की मुलाकात में क्या हुआ?
14 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक में पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान के संघर्षों पर चर्चा हुई और भारत-संयुक्त राष्ट्र सहयोग को रेखांकित किया गया। यह मुलाकात भारत के यूएनएससी अभियान की औपचारिक शुरुआत के अवसर पर हुई।
भारत यूएनएससी की सीट के लिए कब चुनाव लड़ेगा?
भारत अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2028-2029 कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र की गैर-स्थायी सीट हेतु चुनाव लड़ेगा। निर्वाचित होने पर यह 15 सदस्यीय परिषद में भारत का नौवाँ कार्यकाल होगा।
जयशंकर का 'शांति' विज़न क्या है?
'शांति' भारत का छह-सूत्रीय यूएनएससी अभियान ढाँचा है, जिसमें ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूत करना, बहुपक्षीय सुधार, आधुनिक शांति-रक्षा, मानव-केंद्रित AI, नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और आतंकवाद-रोधी प्रयास शामिल हैं। यह ढाँचा नियमों, भरोसे और ईमानदारी पर आधारित है।
भारत यूएनएससी में स्थायी सीट और गैर-स्थायी सीट दोनों के लिए क्यों प्रयासरत है?
नई दिल्ली की दीर्घकालिक माँग यूएनएससी में स्थायी सदस्यता की है, लेकिन इस बीच गैर-स्थायी सीट के ज़रिए वैश्विक शांति-सुरक्षा चर्चाओं में अपनी सक्रिय भागीदारी बनाए रखना चाहती है। यह दोहरी रणनीति भारत को वैश्विक मंच पर प्रासंगिक बनाए रखती है।
भारत यूएनएससी में ग्लोबल साउथ की आवाज़ कैसे बनेगा?
जयशंकर के अनुसार, भारत विकासशील देशों का समर्थन करने, संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा अभियानों में योगदान देने और बहुपक्षीय संस्थाओं को मज़बूत करने के अपने ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर यह भूमिका निभाएगा। 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडे को आगे बढ़ाना भी इसका हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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