MCX पर सोना ₹1,41,051 और चांदी ₹2,18,949 प्रति किलो पर, दोनों में 0.5% से अधिक तेजी
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को सोने और चांदी दोनों में उल्लेखनीय रिकवरी दर्ज की गई, जिससे दोनों कीमती धातुओं के दाम आधे प्रतिशत से अधिक चढ़ गए। सोना ₹1,41,051 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,18,949 प्रति किलो पर पहुँच गई, हालांकि जानकारों के अनुसार अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में दबाव बना रह सकता है।
सोने में कारोबार का ब्यौरा
5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹1,40,309 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले ₹640 की बढ़त के साथ ₹1,40,949 पर कारोबार शुरू किया। सुबह 9:47 बजे IST तक यह ₹742 यानी 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹1,41,051 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इंट्राडे कारोबार में सोने ने ₹1,40,796 का निम्नतम और ₹1,41,294 प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
चांदी में भी मजबूती
4 सितंबर 2026 के चांदी के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹2,17,718 प्रति किलो के मुकाबले ₹615 की बढ़त के साथ ₹2,18,333 प्रति किलो पर शुरुआत की। खबर लिखे जाने तक यह ₹1,231 यानी 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹2,18,949 प्रति किलो पर था।
चांदी ने इंट्राडे में ₹2,17,923 का निम्नतम और ₹2,19,289 प्रति किलो का उच्चतम स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मिलाजुला रुख
वैश्विक स्तर पर COMEX पर सोना 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ $4,023 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.12 प्रतिशत की हल्की कमज़ोरी के साथ $57.87 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह मिलाजुला रुख दर्शाता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के बीच आंशिक अंतर बना हुआ है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से दबाव की आशंका
जानकारों के मुताबिक, कीमती धातुओं पर निकट भविष्य में दबाव आ सकता है। इसका प्रमुख कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज़ बढ़ोतरी है — 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 4.62 प्रतिशत, 30 साल की यील्ड 5.104 प्रतिशत और 5 साल की यील्ड 4.378 प्रतिशत पर पहुँच गई है। गौरतलब है कि ऊँची बॉन्ड यील्ड आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों की आकर्षण क्षमता को कम करती है, जिससे निवेशक मुनाफावसूली की ओर झुक सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने ने हाल के महीनों में ऐतिहासिक ऊँचाइयाँ छुई हैं। आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।