गुम्मीडीपुंडी स्टील प्लांट में बॉयलर विस्फोट: प्रवासी मजदूर की मौत, चार गंभीर रूप से झुलसे
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के गुम्मीडीपुंडी स्थित एसआईपीसीओटी औद्योगिक क्षेत्र की एक स्टील मेल्टिंग यूनिट में मंगलवार, 14 जुलाई को बॉयलर फटने से एक प्रवासी मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई और चार अन्य श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए। विस्फोट के तत्काल बाद फैक्ट्री परिसर में भीषण आग भड़क उठी, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, स्टील मेल्टिंग यूनिट में कर्मचारी अपनी नियमित ड्यूटी पर थे, तभी अचानक बॉयलर में जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उसकी चपेट में आने वाले मजदूरों को गंभीर चोटें आईं। मृतक की पहचान रवि के रूप में हुई है, जो उत्तर भारत का रहने वाला प्रवासी मजदूर था। विस्फोट के समय वह ड्यूटी पर मौजूद था और मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई।
विस्फोट में चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
आग और बचाव अभियान
बॉयलर विस्फोट के बाद फैक्ट्री में भड़की आग की ऊँची लपटें और धुएँ का घना गुबार पूरे औद्योगिक परिसर में फैल गया। सूचना मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव सेवा की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुँचीं। दमकल कर्मियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस भी मौके पर पहुँची और राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया।
जाँच और कार्यस्थल सुरक्षा पर सवाल
अधिकारियों ने बताया कि बॉयलर विस्फोट के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। विस्तृत जाँच शुरू कर दी गई है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि हादसा तकनीकी खराबी, उपकरणों की विफलता या औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण हुआ। जाँचकर्ता यह भी देखेंगे कि संबंधित बॉयलर का अनिवार्य रखरखाव और सुरक्षा निरीक्षण समय पर किया गया था या नहीं। विस्फोट से हुए नुकसान का पूरा आकलन भी किया जा रहा है।
इस घटना ने तिरुवल्लूर जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यस्थल सुरक्षा मानकों को लेकर चिंताएँ फिर से बढ़ा दी हैं।
पृष्ठभूमि: तमिलनाडु में औद्योगिक हादसों का सिलसिला
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में औद्योगिक सुरक्षा पहले से ही सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि पिछले दिनों पेरियापालयम के पास एक झींगा प्रसंस्करण फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव से 18 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। उस हादसे में कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए थे और प्रशासन ने चार दिनों तक व्यापक अभियान चलाने के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया था। दोनों घटनाएँ प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और औद्योगिक इकाइयों में नियामक निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
आगे क्या
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जाँच पूरी होने के बाद जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी। घायल मजदूरों की स्थिति पर अस्पताल प्रशासन की नजर बनी हुई है। यह घटना राज्य सरकार के लिए औद्योगिक सुरक्षा ढाँचे की समीक्षा का एक और अवसर है।