अदाणी वन ऐप के 50 लाख यूज़र्स पूरे, 10 महीनों में हासिल की यह बड़ी उपलब्धि
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) के कंज्यूमर ऐप 'अदाणी वन' ने अपने इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम 'अदाणी रिवार्ड्स' की शुरुआत के महज़ 10 महीनों के भीतर 50 लाख सदस्यों का आँकड़ा पार कर लिया है। कंपनी ने 14 जुलाई को यह जानकारी साझा की। यह उपलब्धि भारत के एयरपोर्ट डिजिटल सेवा क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ती उपभोक्ता भागीदारी को रेखांकित करती है।
लॉयल्टी प्रोग्राम की पहुँच और संरचना
अदाणी रिवार्ड्स प्रोग्राम फ़िलहाल सात राज्यों के आठ एयरपोर्ट पर उपलब्ध है, जिनका प्रबंधन AAHL करती है। इनमें मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और हाल ही में परिचालन में आया नवी मुंबई एयरपोर्ट शामिल हैं। यात्री 'अदाणी वन' ऐप के ज़रिए एयरपोर्ट पर शॉपिंग, डाइनिंग और अन्य सेवाओं पर रिवार्ड पॉइंट अर्जित और रिडीम कर सकते हैं।
गौरतलब है कि यात्री खरीदारी के समय केवल अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर तुरंत इस प्रोग्राम से जुड़ सकते हैं। अर्जित पॉइंट्स को मुफ़्त खाने-पीने से लेकर प्रीमियम एयरपोर्ट अनुभव तक विभिन्न सुविधाओं के लिए भुनाया जा सकता है।
सीज़नल कैंपेन से बढ़ी यूज़र एंगेजमेंट
कंपनी के अनुसार, दिवाली, विंटरफेस्ट और हाल ही में आयोजित समर कार्निवल जैसे सीज़नल अभियानों ने विशेष डील्स और अनुभवों के ज़रिए यूज़र भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। यह रणनीति केवल एयरपोर्ट तक सीमित न रहकर यात्रियों के रोज़मर्रा के खर्चों को भी रिवार्ड से जोड़ती है।
कंपनी का बयान
AAHL के एक प्रवक्ता ने कहा, "एक साल से भी कम समय में 50 लाख सदस्य बनना 'अदाणी रिवार्ड्स' के लिए एक अहम उपलब्धि है। जल्द ही, हम नए फीचर लाएंगे, सदस्यों के लिए फायदे बढ़ाएंगे और यात्रियों के लिए AAHL द्वारा प्रबंधित सभी एयरपोर्ट पर जुड़ने के और मौके बनाएंगे।"
आगे की योजना
AAHL ने संकेत दिया है कि इस वर्ष के अंत तक एक टियर-बेस्ड मेंबरशिप मॉडल पेश किया जाएगा, जिसमें नियमित हवाई यात्रियों को बेहतर लाभ और अधिक व्यक्तिगत सेवाएँ मिलेंगी। कंपनी का लक्ष्य तिरुवनंतपुरम से गुवाहाटी तक फैले अपने एयरपोर्ट नेटवर्क में इस प्रोग्राम की पहुँच और लोकप्रियता को और विस्तार देना है।
भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) एयरपोर्ट ऑपरेटर के रूप में AAHL का यह कदम देश में एयरपोर्ट-केंद्रित डिजिटल लॉयल्टी इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकता है।