भारत-स्पेन औद्योगिक साझेदारी: पीयूष गोयल ने मैड्रिड में सप्लाई चेन मजबूती और FTA पर की चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 14 जुलाई को मैड्रिड में स्पेन के उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जॉर्डी हेरेउ से द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और पर्यटन सहित भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारत-स्पेन सहयोग को नई ऊँचाई देने के अवसरों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की रूपरेखा अंतिम चरण में है और दोनों देश आर्थिक संबंधों को व्यापक आधार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बैठक के मुख्य बिंदु
गोयल ने बैठक के बाद कहा, "हमने भारत-ईयू एफटीए पर भी चर्चा की और दोनों देशों के आपसी फायदे के लिए औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने, मजबूत सप्लाई चेन बनाने और आर्थिक सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।" उन्होंने एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी, रेलवे, सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन, कला, विज्ञान और संस्कृति को उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया जहाँ दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं।
इंडिया-स्पेन बिजनेस फोरम में संबोधन
इंडिया-स्पेन बिजनेस फोरम में मुख्य भाषण देते हुए गोयल ने कहा, "मैंने हमारे व्यापार और निवेश संबंधों में जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल करने के लिए भारत और स्पेन के बीच सामान और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।" उन्होंने इस लक्ष्य को साकार करने के लिए चार सूत्री रणनीति प्रस्तुत की — एक-दूसरे में व्यापक निवेश, भारत-ईयू एफटीए के अवसरों का पूरा उपयोग, पर्यटन एवं प्रतिभा को जोड़ना, और सरकार-से-सरकार संबंधों को और सुदृढ़ करना।
द्विपक्षीय व्यापार को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य
गोयल ने इससे पहले भी स्पष्ट किया था कि भारत और स्पेन को अगले 10 वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को 10 गुना बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ और भारत मिलकर वैश्विक व्यापार एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो इस साझेदारी की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है।
भारत-ईयू एफटीए की खासियत
मैड्रिड में कारोबारियों और नेताओं को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, "शायद यह एकमात्र ऐसा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है जिसे यूरोप ने किसी भी सदस्य देश की आलोचना के बिना अंतिम रूप दिया है। भारत के साथ इस साझेदारी में सभी 27 सदस्य देश पूरी तरह सहमत हैं, और भारत में भी कारोबारियों की यही राय है — देश में कहीं से भी कोई विरोध या असंतोष की बात नहीं सुनी गई।" यह सर्वसम्मति भारत-ईयू संबंधों के इतिहास में एक उल्लेखनीय मोड़ मानी जा रही है।
आगे की राह
व्यापार, कारोबार, निवेश, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और ऊँचे स्तर पर ले जाने की दिशा में दोनों पक्षों ने ठोस कदम उठाने पर सहमति जताई। भारत-ईयू एफटीए के लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में नए अवसरों का द्वार खुलने की उम्मीद है।