ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो होगी 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 अगस्त 2026 को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खोला गया तो ईरान पर ऐसी सैन्य कार्रवाई होगी जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी और सबसे कड़ी होगी। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है — एक दावा जिसे तेहरान ने सिरे से नकार दिया।
ट्रंप का बयान और चेतावनी
ओवल ऑफिस से और बाद में फॉक्स न्यूज के माध्यम से ट्रंप ने कहा, 'हम ईरान से बहुत अच्छी बातचीत कर रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को 'आखिरी मौका' दिया जा रहा है और मुद्दा सीधा है — होर्मुज स्ट्रेट को खोलना। ट्रंप ने कहा, 'वे जल्दी फैसला लेंगे, चाहे जिस तरह से हो। यह कोई बहुत जटिल बात नहीं है। हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की बात कर रहे हैं।'
ईरान का खंडन और उसकी स्थिति
तेहरान में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा, 'फिलहाल हम अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं।' बकाई ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस समय इराक की यात्रा पर हैं, जबकि शेष वार्ताकार ईरान में ही हैं।
बकाई ने बताया कि ईरान, होर्मुज के सामने स्थित ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह एक अस्थायी इंतजाम है जिसका उद्देश्य इस रणनीतिक जलमार्ग में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बकाई ने यह भी जोड़ा कि मस्कट-तेहरान वार्ता में कोई तीसरा देश शामिल नहीं है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का पलटवार
ईरान के खंडन के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'ईरानी नेतृत्व बेहद दोहरा है। पहले वे बैठक के लिए गिड़गिड़ाते हैं और फिर खुलेआम कहते हैं कि कोई चर्चा नहीं हो रही।' ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान संभावित अमेरिकी हमले की खबरों से घबरा गया है।
होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव पहले से ही चरम पर है और खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। गौरतलब है कि ईरान ने अतीत में भी इस जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है, जो वैश्विक तेल कीमतों पर सीधा असर डालती है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी बयानों के बीच कूटनीतिक स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है। ओमान की मध्यस्थता भूमिका पर नज़र रहेगी, क्योंकि तेहरान ने इसे एकमात्र सक्रिय वार्ता-चैनल बताया है। विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की 'आखिरी मौके' वाली भाषा आने वाले दिनों में कूटनीतिक या सैन्य दबाव में और तेज़ी आने का संकेत देती है।