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तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन 50% घटा, राज्य ₹16-20/यूनिट पर खरीद रहा महंगी बिजली

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तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन 50% घटा, राज्य ₹16-20/यूनिट पर खरीद रहा महंगी बिजली

सारांश

कमज़ोर मानसून और जलाशयों में गाद की समस्या ने मिलकर तमिलनाडु के जलविद्युत उत्पादन को आधा कर दिया है। राज्य अब ₹16-20/यूनिट की दर से 2,000 MU महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर है — जबकि जलविद्युत की लागत ₹1/यूनिट से भी कम है। 2010 के बाद से डी-सिल्टिंग न होने से जलाशयों की क्षमता 20% घट चुकी है।

मुख्य बातें

1 अप्रैल से 17 जुलाई 2025 के बीच तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन 751.034 MU रहा, जो पिछले वर्ष की 1,509.549 MU की तुलना में लगभग 50% कम है।
उत्पादन में कमी की भरपाई के लिए राज्य ने बिजली एक्सचेंज से ₹16 से ₹20 प्रति यूनिट की दर पर लगभग 2,000 MU बिजली खरीदी।
जलविद्युत की उत्पादन लागत ₹1 प्रति यूनिट से कम है — बाहरी खरीद की तुलना में यह अंतर राज्य के बिजली बजट पर भारी पड़ रहा है।
कर्नाटक से कावेरी नदी का पर्याप्त जल प्रवाह न मिलने से जलाशयों की स्थिति और बिगड़ी।
भवानीसागर और कुंदाह सहित कई जलाशयों में 2010 के बाद से डी-सिल्टिंग नहीं हुई; गाद से भंडारण क्षमता 20% तक घट चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार, मानसून की गतिविधियाँ तेज़ न हुईं तो अगले कुछ सप्ताह तक जलविद्युत उत्पादन दबाव में रहेगा।

कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और प्रमुख जलाशयों में गंभीर जल-संकट के कारण तमिलनाडु में इस वर्ष जलविद्युत उत्पादन लगभग आधा रह गया है, जिससे राज्य को बिजली एक्सचेंज से ₹16 से ₹20 प्रति यूनिट की महंगी दरों पर बिजली खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 1 अप्रैल से 17 जुलाई 2025 के बीच राज्य में केवल 751.034 मिलियन यूनिट (MU) जलविद्युत का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 1,509.549 MU था।

उत्पादन में गिरावट के मुख्य कारण

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा, लंबे समय तक चली भीषण हीटवेव और जलाशयों में घटते जल-स्तर ने मिलकर जलविद्युत परियोजनाओं के संचालन को बाधित किया। यह ऐसे समय हुआ जब जुलाई तक बिजली की माँग असाधारण रूप से ऊँचे स्तर पर बनी रही, जिससे राज्य की बिजली व्यवस्था पर दोहरा दबाव पड़ा।

स्थिति को और गंभीर बनाने में कर्नाटक से कावेरी नदी का पर्याप्त जल प्रवाह न मिलना भी एक अहम कारक रहा है। इससे उन जलाशयों में उपलब्ध पानी और घट गया जिन पर कई जलविद्युत परियोजनाएँ निर्भर हैं।

राज्य पर वित्तीय बोझ

जलविद्युत राज्य के लिए बिजली का सबसे सस्ता स्रोत है — इसकी उत्पादन लागत ₹1 प्रति यूनिट से भी कम रहती है। उत्पादन में आई कमी की भरपाई के लिए पिछले तीन महीनों में बिजली एक्सचेंज से ₹16 से ₹20 प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदी गई। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान राज्य ने लगभग 2,000 MU बिजली बाहर से खरीदी, जिससे बिजली खरीद पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।

गौरतलब है कि आमतौर पर तमिलनाडु गर्मियों और अधिक माँग वाले मौसम में महंगे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए जलविद्युत उत्पादन को अधिकतम रखता है। इस वर्ष वह रणनीति पूरी तरह उलट गई है।

जलाशयों की गाद और रखरखाव की चूक

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जलाशयों के रखरखाव में लंबे समय से चली आ रही लापरवाही को भी उत्पादन गिरावट का एक प्रमुख कारण बताया है। उनके अनुसार, भवानीसागर और कुंदाह सहित कई जलाशयों में आखिरी बार वर्ष 2010 में गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) का काम हुआ था, और उसके बाद कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया।

अधिकारियों का अनुमान है कि जलाशयों में गाद जमा होने से उनकी प्रभावी जल-भंडारण क्षमता लगभग 20 प्रतिशत तक घट चुकी है। इससे मानसून के दौरान पानी संग्रहित करने की क्षमता कम हुई और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर डी-सिल्टिंग होती तो जलाशयों की भंडारण क्षमता बेहतर रहती और राज्य को इतनी महंगी बिजली खरीदने की नौबत न आती।

आगे की स्थिति

अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मानसून की गतिविधियाँ तेज़ नहीं हुईं और जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो जलविद्युत उत्पादन अगले कुछ सप्ताह तक दबाव में ही रहेगा। यह संकट तमिलनाडु की ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक जलवायु-अनुकूल सुधारों की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जलविद्युत क्षमता में 20% की संरचनात्मक गिरावट को दर्शाता है जिसे मानसून की कमी ने बस उजागर किया है। ₹1/यूनिट की जलविद्युत की जगह ₹20/यूनिट की बाहरी बिजली खरीदना राज्य के बिजली उपभोक्ताओं और वितरण कंपनी दोनों के लिए दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। कावेरी जल विवाद के साथ जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर को देखते हुए, तमिलनाडु को जलविद्युत के बजाय विविधीकृत नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन कितना घटा है?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जुलाई 2025 के बीच तमिलनाडु में केवल 751.034 MU जलविद्युत का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,509.549 MU था — यानी उत्पादन लगभग 50% घट गया है।
तमिलनाडु को महंगी बिजली क्यों खरीदनी पड़ रही है?
जलविद्युत उत्पादन में भारी कमी के कारण राज्य की बढ़ती बिजली माँग पूरी नहीं हो पा रही। इस कमी की भरपाई के लिए राज्य को बिजली एक्सचेंज से ₹16 से ₹20 प्रति यूनिट की दर पर लगभग 2,000 MU बिजली खरीदनी पड़ी, जबकि जलविद्युत की लागत ₹1 प्रति यूनिट से भी कम है।
जलाशयों में गाद की समस्या का उत्पादन पर क्या असर पड़ा?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भवानीसागर और कुंदाह सहित कई जलाशयों में 2010 के बाद से डी-सिल्टिंग नहीं हुई है। इससे जलाशयों की प्रभावी भंडारण क्षमता लगभग 20% तक घट गई है, जिसने मानसून के दौरान पानी संग्रहित करने और जलविद्युत उत्पादन करने की क्षमता को कमज़ोर किया।
कावेरी नदी का इस संकट से क्या संबंध है?
कर्नाटक से कावेरी नदी का पर्याप्त जल प्रवाह न मिलने से उन जलाशयों में पानी की उपलब्धता और घट गई जिन पर तमिलनाडु की कई जलविद्युत परियोजनाएँ निर्भर हैं। इससे पहले से कमज़ोर मानसून के कारण बिगड़ी स्थिति और गंभीर हो गई।
आने वाले हफ्तों में तमिलनाडु की बिजली स्थिति कैसी रहेगी?
अधिकारियों के अनुसार, यदि मानसून की गतिविधियाँ तेज़ नहीं हुईं और जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो जलविद्युत उत्पादन अगले कुछ सप्ताह तक दबाव में बना रहेगा और राज्य को महंगी बाहरी बिजली पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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