16 जुलाई 2026
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केरल बिजली संकट: कमजोर मानसून से जलाशय 29% पर, लोड शेडिंग शुरू; विपक्ष हमलावर

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केरल बिजली संकट: कमजोर मानसून से जलाशय 29% पर, लोड शेडिंग शुरू; विपक्ष हमलावर

सारांश

कमज़ोर मानसून ने केरल को गंभीर बिजली संकट में धकेल दिया है — KSEB जलाशय 29% पर, घरेलू उत्पादन आधे से भी कम। राज्य 68.81 MU बिजली बाहर से खरीद रहा है और लोड शेडिंग ने मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रम को भी नहीं बख्शा। राहत के संकेत अभी दूर हैं।

मुख्य बातें

KSEB के जलाशयों में जल भंडारण क्षमता घटकर केवल 29 प्रतिशत रह गई है।
घरेलू बिजली उत्पादन 44.221 मिलियन यूनिट से गिरकर 16.608 मिलियन यूनिट पर आ गया है।
राज्य की दैनिक खपत 88.64 मिलियन यूनिट ; 68.81 मिलियन यूनिट अन्य राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी जा रही है।
मट्टुपट्टी जलाशय में मात्र 10 प्रतिशत पानी शेष; कक्कड़, अलुंकल, करिक्कायम परियोजनाएँ लगभग ठप।
बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने स्थिति गंभीर मानी, बैटरी ऊर्जा भंडारण बढ़ाने की योजना की घोषणा की।
शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर व्यंग्यात्मक हमला किया।

केरल राज्य में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते हाल के वर्षों का सबसे गंभीर बिजली संकट उत्पन्न हो गया है। केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के जलाशयों में जल भंडारण क्षमता घटकर मात्र 29 प्रतिशत रह जाने के कारण राज्य में 16 जुलाई से लोड शेडिंग फिर से लागू करनी पड़ी है। स्थिति की गंभीरता को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव भी तेज हो गया है।

जलाशयों की स्थिति और उत्पादन में गिरावट

राज्य की दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं — इडुक्की और सबरिगिरी — के जलाशय पिछले वर्ष की तुलना में काफी नीचे हैं और अपनी कुल क्षमता के लगभग एक-तिहाई पर ही संचालित हो रहे हैं। शोलायर, इडामलयार और कुंडाला जैसे जलाशयों में भी जलस्तर चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है, जबकि मट्टुपट्टी जलाशय में केवल 10 प्रतिशत पानी शेष है।

जलस्तर में इस गिरावट के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप राज्य का घरेलू बिजली उत्पादन 44.221 मिलियन यूनिट से घटकर 16.608 मिलियन यूनिट रह गया है। सबरिगिरी प्रणाली पर निर्भर कक्कड़, अलुंकल और करिक्कायम जैसी परियोजनाओं में बिजली उत्पादन लगभग ठप हो गया है।

मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर

एक ओर उत्पादन में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी ओर राज्य की दैनिक बिजली खपत बढ़कर 88.64 मिलियन यूनिट तक पहुँच गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए केरल को 68.81 मिलियन यूनिट बिजली अन्य राज्यों से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बाहरी आपूर्ति में किसी कारण से व्यवधान आया तो राज्य में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने गुरुवार को स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है। उन्होंने कहा, बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है और फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि बिजली कटौती कब तक जारी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बिजली विनिमय व्यवस्था के तहत पहले ली गई बिजली लौटानी है और केंद्र से मिलने वाले आवंटन में भी कमी आई है, जिससे संकट और जटिल हो गया है। जोसेफ ने भविष्य की तैयारी के तौर पर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना की घोषणा भी की।

विपक्ष का हमला

बिजली कटौती को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पूर्व शिक्षा मंत्री और माकपा नेता वी. शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया पर व्यंग्य करते हुए लिखा कि 'दिन में सूरज लोगों को ऊर्जा देता है, लेकिन रात में 'सनी' लोगों को परेशान कर रहे हैं' — यह कटाक्ष बिजली मंत्री सनी जोसेफ और रात में हो रही कटौती पर था।

जोसेफ ने प्रशासनिक विफलता के आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के कार्यकाल में भी इसी प्रकार की बिजली पाबंदियाँ लागू की गई थीं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

लगातार हो रही लोड शेडिंग से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आम जनता में नाराज़गी बढ़ रही है। संकट की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की उपस्थिति वाले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी बिजली बाधित हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब केरल पहले से ही गर्मी की लहर और कमज़ोर मानसून की दोहरी मार झेल रहा है। गौरतलब है कि जलाशयों में जलस्तर में सुधार के निकट भविष्य में कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं, जिससे आने वाले हफ्तों में संकट और गहराने की आशंका बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल महंगा है बल्कि आपूर्ति-सुरक्षा के लिहाज़ से भी जोखिम भरा है। बैटरी भंडारण की घोषणा सही दिशा में कदम है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं — सौर और पवन ऊर्जा में त्वरित निवेश के बिना हर कमज़ोर मानसून यही दृश्य दोहराएगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे, असली सवाल यह है कि केरल ने पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार में क्यों पिछड़ा रहा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में बिजली संकट क्यों आया है?
कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण KSEB के जलाशयों में जलस्तर तेज़ी से घटा है, जिससे जलविद्युत उत्पादन 44.221 मिलियन यूनिट से गिरकर 16.608 मिलियन यूनिट रह गया है। राज्य की बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा जलविद्युत पर निर्भर होने के कारण यह गिरावट सीधे लोड शेडिंग में तब्दील हो गई।
KSEB के जलाशयों में अभी कितना पानी बचा है?
KSEB के जलाशयों में जल भंडारण क्षमता घटकर केवल 29 प्रतिशत रह गई है। मट्टुपट्टी जलाशय में तो मात्र 10 प्रतिशत पानी ही शेष है और इडुक्की व सबरिगिरी जैसी प्रमुख परियोजनाएँ अपनी क्षमता के एक-तिहाई पर चल रही हैं।
केरल लोड शेडिंग से कब राहत मिलेगी?
बिजली मंत्री सनी जोसेफ के अनुसार फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि बिजली कटौती कब तक जारी रहेगी। जलाशयों में जलस्तर सुधार के निकट भविष्य में कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में संकट और गहरा सकता है।
केरल में बिजली की मांग और आपूर्ति में कितना अंतर है?
राज्य की दैनिक बिजली खपत 88.64 मिलियन यूनिट है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 16.608 मिलियन यूनिट है। अंतर को पूरा करने के लिए 68.81 मिलियन यूनिट बिजली अन्य राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी जा रही है।
विपक्ष ने केरल बिजली संकट पर क्या कहा?
माकपा नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए बिजली मंत्री सनी जोसेफ पर निशाना साधा। विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया, हालाँकि जोसेफ ने इसे खारिज करते हुए पिछली LDF सरकार के दौरान भी ऐसी ही पाबंदियों का हवाला दिया।
राष्ट्र प्रेस
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