केरल में मानसून की दस्तक करीब, IMD का रविवार तक भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 मई 2025 को जानकारी दी कि केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले कुछ दिनों में दस्तक दे सकता है, और रविवार तक राज्यभर में बारिश की गतिविधियाँ काफी तेज होने की संभावना है। विभाग ने गरज-चमक, बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
मानसून के आगमन के संकेत
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों में अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाएँ मज़बूत होती दिख रही हैं, जिसे मानसून के निकट आने का प्रमुख संकेत माना जाता है। केरल में मानसून को स्थानीय मलयालम भाषा में 'एडवप्पाथी' कहा जाता है। अगले कुछ दिनों तक आसमान में घने बादल छाए रहने और राज्य के सभी ज़िलों में रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है।
चेतावनी और सावधानियाँ
मौसम विभाग के अधिकारियों ने आगाह किया है कि अचानक बादल बनने और तेज बारिश के कारण संवेदनशील इलाकों में नुकसान हो सकता है। हालाँकि IMD के आधिकारिक पाँच दिवसीय पूर्वानुमान में किसी ज़िले के लिए अलग से अलर्ट जारी नहीं किया गया है, फिर भी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
प्रशासन ने कहा है कि बिजली चमकने के शुरुआती संकेत मिलते ही लोग सुरक्षित इमारतों में चले जाएँ और तेज हवा व तूफान के दौरान पेड़ों या खुले स्थानों के नीचे न खड़े हों। बिजली कड़कने के दौरान घरों में बिजली के उपकरण बंद रखने और दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद रखने की भी सलाह दी गई है।
पहाड़ी, तटीय और मछुआरा समुदाय पर असर
ज़िला प्रशासन ने पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि मानसून के औपचारिक आगमन के बाद बारिश और तेज हो सकती है। भूस्खलन और कटाव-प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को रात में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
मछुआरों को केरल तट पर खराब मौसम और ऊँची लहरों की आशंका के मद्देनज़र समुद्र में जाने से पहले सरकारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
सरकार की तैयारियाँ
केरल सरकार ने मानसून-पूर्व तैयारियाँ तेज कर दी हैं। इसके तहत राज्यभर में नालों की सफाई का काम पूरा किया जा रहा है और सभी ज़िलों में 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में केरल में मानसून के दौरान भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिससे आपदा प्रबंधन की तैयारी और भी अहम हो गई है।