12 जुलाई 2026
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भीषण गर्मी-उमस और तूफान की दोहरी मार: कानपुर से भागलपुर तक हाहाकार, मानसून 48 घंटे में दस्तक देगा

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भीषण गर्मी-उमस और तूफान की दोहरी मार: कानपुर से भागलपुर तक हाहाकार, मानसून 48 घंटे में दस्तक देगा

सारांश

कानपुर में उमस भरी लू, विदर्भ में हीटवेव और भागलपुर में 140 किमी/घंटे के तूफान ने एक ही दिन में देश के तीन कोनों को हिला दिया। इस सबके बीच अगले 48 घंटों में केरल में मानसून की दस्तक संभव है — लेकिन अल नीनो के साए में यह मानसून कमज़ोर रहने की आशंका है।

मुख्य बातें

कानपुर में भीषण गर्मी-उमस से जनजीवन प्रभावित; कानपुर चिड़ियाघर ने जानवरों के लिए कूलर, शॉवर और बर्फ की व्यवस्था की।
सुनील पांडे के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना; तापमान में 1-2 डिग्री गिरावट संभव।
विदर्भ में हीटवेव जारी; 28 मई के बाद गरज-चमक के साथ बारिश से 2-3 डिग्री राहत मिलने का अनुमान।
बिहार के भागलपुर में 140 किमी/घंटे के तूफान से पेड़ गिरे, सड़कें बाधित, बिजली ठप; डीएम नवल किशोर चौधरी के अनुसार जनहानि की अभी कोई सूचना नहीं।
अगले 48 घंटों में केरल में मानसून की आधिकारिक दस्तक संभव; अल नीनो के कारण सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान।
विशेषज्ञों की सलाह: सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बाहर न निकलें; किसान मौसम ऐप और कृषि एडवाइजरी पर नज़र रखें।

देश के कई राज्यों में 26 मई 2026 को मौसम का दोहरा कहर जारी है — एक तरफ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ में भीषण गर्मी और उमस ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, तो दूसरी तरफ बिहार के भागलपुर में 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने व्यापक तबाही मचाई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 48 घंटों में केरल में मानसून की आधिकारिक दस्तक हो सकती है, हालाँकि इस बार अल नीनो के प्रभाव से सामान्य से कम वर्षा की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है।

कानपुर: जू में जानवरों के लिए विशेष इंतज़ाम

कानपुर में इन दिनों तेज गर्मी और उमस ने इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी बेहाल कर दिया है। कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन ने जानवरों को लू से बचाने के लिए कूलर, शॉवर, बर्फ और ठंडे पानी की विशेष व्यवस्था की है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर भारत में हीट स्ट्रेस का स्तर लगातार ऊँचा बना हुआ है।

मौसम विशेषज्ञ की चेतावनी

मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडे ने बताया कि इस समय उत्तर भारत और उत्तर प्रदेश में नमी का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है, जिससे कई जगहों पर बादल बनने, तेज हवाएँ चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और ओलावृष्टि की भी संभावना बनी हुई है। तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट संभव है, लेकिन उमस भरी गर्मी से राहत जल्द मिलने के आसार नहीं हैं।

डॉ. पांडे ने यूवी इंडेक्स और हीट स्ट्रेस के ऊँचे स्तर पर चिंता जताते हुए लोगों को सलाह दी कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। उन्होंने विशेष रूप से किसानों, मजदूरों, रिक्शा चालकों और धूप में काम करने वाले लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी, क्योंकि लगातार धूप में काम करने से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बना रहता है।

विदर्भ में हीटवेव, 28 के बाद राहत की उम्मीद

पुणे स्थित क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एस.डी. सनप ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से विदर्भ में गर्म हवाएँ चल रही हैं। उनके अनुसार 28 मई के बाद गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में तापमान 40 डिग्री से नीचे होने के कारण फिलहाल हीटवेव जैसी स्थिति नहीं है।

गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट की इमारतें, सीमेंटेड सड़कें और वाहनों-उद्योगों से निकलने वाली गर्मी तापमान को आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 3 डिग्री अधिक बना देती है — एक ऐसी 'अर्बन हीट आइलैंड' परिघटना जो हर साल गर्मियों में और प्रखर होती जा रही है। सनप ने किसानों को मौसम विभाग के ऐप और कृषि विभाग की एडवाइजरी पर नजर रखने की सलाह दी।

भागलपुर में 140 किमी/घंटे के तूफान की तबाही

बिहार के भागलपुर में सोमवार देर रात आए भीषण तूफान ने व्यापक नुकसान पहुँचाया। भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले इस तूफान से बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए, सड़कें बाधित हो गईं और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। कई बड़े पेड़ बिजली के तारों पर आ गिरे, जिन्हें काटकर हटाने का काम तेजी से चल रहा है।

डीएम चौधरी के अनुसार रात 12 बजे से ही नगर निगम, बिजली विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें राहत एवं पुनर्स्थापना कार्य में जुटी हुई हैं। ज्यादातर सड़कों से पेड़ हटाकर रास्ता साफ कर दिया गया है। सरकारी परिसरों और दफ्तरों में भी नुकसान हुआ है — कई जगह सोलर प्लेटें टूट गईं और इमारतों को क्षति पहुँची है। डीएम ने बताया कि फिलहाल किसी बड़े हादसे या जनहानि की सूचना नहीं है।

मानसून और आगे का मौसम

मौसम विशेषज्ञ डॉ. पांडे के अनुसार अगले 48 घंटों में केरल में मानसून पहुँचने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हालाँकि, इस बार अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्से पहले से ही जल संकट और कृषि तनाव का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि नागरिक आने वाले दिनों में मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि पूर्व-निवारक। शहरी हीट आइलैंड प्रभाव पर वैज्ञानिकों की चेतावनी वर्षों से दोहराई जा रही है, लेकिन शहरी नियोजन में हरित आवरण और ताप-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे को लेकर ठोस नीतिगत कदम अभी भी अपेक्षित हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागलपुर में आए तूफान से कितना नुकसान हुआ और क्या कोई हताहत हुआ?
भागलपुर में सोमवार देर रात 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने बड़े पैमाने पर पेड़ गिराए, सड़कें बाधित कीं और बिजली आपूर्ति ठप कर दी। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी के अनुसार फिलहाल किसी बड़े हादसे या जनहानि की सूचना नहीं है, हालाँकि सरकारी परिसरों और इमारतों को नुकसान पहुँचा है।
केरल में मानसून कब आएगा और इस बार कैसा रहेगा?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 48 घंटों में केरल में मानसून पहुँचने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हालाँकि इस बार अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के कमज़ोर रहने और सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका है।
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडे की सलाह है कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो पानी पीकर निकलें और साथ में पानी रखें; किसानों, मजदूरों और रिक्शा चालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
विदर्भ में हीटवेव से राहत कब मिलेगी?
पुणे स्थित क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एस.डी. सनप के अनुसार 28 मई के बाद विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट आ सकती है और लोगों को राहत मिल सकती है।
शहरों में गाँवों की तुलना में ज़्यादा गर्मी क्यों लगती है?
मौसम वैज्ञानिक एस.डी. सनप के अनुसार शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सीमेंटेड सड़कें और वाहनों-उद्योगों से निकलने वाली गर्मी तापमान को आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 3 डिग्री अधिक बना देती है। इसे 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव कहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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