केरल में लोड शेडिंग वापस: 118.26 मिलियन यूनिट की रिकॉर्ड बिजली मांग, शाम 6 से रात 12 बजे तक कटौती
सारांश
Key Takeaways
- 28 अप्रैल 2026 से केरल में शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच अधिकतम 30 मिनट की लोड शेडिंग लागू।
- 27 अप्रैल को बिजली खपत 118.26 मिलियन यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँची।
- 23 अप्रैल की रात 10:30 बजे 6,195 मेगावाट की अस्थायी उच्च माँग रिकॉर्ड की गई।
- तापमान अनुमानित 38°C से बढ़कर 41°C तक पहुँचा; केरल अपनी 70%25+ बिजली बाहरी स्रोतों से लेता है।
- विपक्ष नेता वी.डी. सतीशन ने बिजली खरीद समझौतों पर सवाल उठाए; 4 मई को मतगणना।
केरल में 28 अप्रैल 2026 से लोड शेडिंग फिर शुरू हो गई है, जब राज्य में बिजली की मांग 118.26 मिलियन यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गई। राज्य सरकार ने ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच अधिकतम 30 मिनट तक बिजली कटौती की अनुमति दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब सत्तारूढ़ वाम सरकार ने हालिया विधानसभा चुनाव प्रचार में करीब एक दशक तक राज्य को लोड शेडिंग मुक्त रखने का दावा किया था।
मुख्य घटनाक्रम
ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (पावर) पुनीत कुमार ने बिगड़ती बिजली स्थिति का जायज़ा लिया। बैठक में केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मिन्हाज आलम समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में पेश आँकड़ों के अनुसार, 27 अप्रैल को बिजली खपत 118.26 मिलियन यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँची। शाम 6 बजे के बाद माँग 6,033 मेगावाट दर्ज की गई। इससे पहले 23 अप्रैल की रात 10:30 बजे 6,195 मेगावाट की अस्थायी उच्च माँग रिकॉर्ड की गई थी।
भीषण गर्मी बनी मुख्य वजह
अधिकारियों के अनुसार, तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था, लेकिन यह बढ़कर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जिससे बिजली खपत तेज़ी से बढ़ी। एयर कंडीशनर का अधिक उपयोग, शाम के समय इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और गैस संकट के कारण इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ता रुझान माँग में उछाल की प्रमुख वजहें बताई गई हैं। रात 9:30 बजे से मध्यरात्रि तक माँग सबसे अधिक दर्ज की गई।
राष्ट्रीय बाज़ार में भी उपलब्धता घटी
राज्य सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय बिजली बाज़ार में भी हीटवेव के कारण उपलब्धता घटी है, जिससे केरल की परेशानी और बढ़ी है। गौरतलब है कि केरल अपनी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली ज़रूरत बाहरी स्रोतों से पूरी करता है। हालाँकि, केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों से 200 मेगावाट की कमी जल्द दूर होने की उम्मीद जताई गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज़ हो गई है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया है कि सरकार के गलत और अपारदर्शी बिजली खरीद समझौतों ने राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को कमज़ोर किया है। यह विवाद ऐसे समय और तीखा हो गया है जब 4 मई को विधानसभा चुनावों की मतगणना होनी है।
KSEB की अपील और आगे की राह
केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने नागरिकों से अपील की है कि पीक आवर्स में ईवी चार्जिंग से बचें, एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें और अधिक बिजली खपत वाले उपकरणों का सीमित उपयोग करें। अब सरकार के सामने बिजली संकट संभालने के साथ-साथ राजनीतिक चुनौती भी है — और दोनों मोर्चों पर अगले कुछ दिन निर्णायक साबित होंगे।