16 जुलाई 2026
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उड़ान योजना: वित्तीय सहायता 3 से बढ़ाकर 5 साल, नायडू बोले — क्षेत्रीय रूट्स होंगे मजबूत

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उड़ान योजना: वित्तीय सहायता 3 से बढ़ाकर 5 साल, नायडू बोले — क्षेत्रीय रूट्स होंगे मजबूत

सारांश

उड़ान योजना में बड़ा बदलाव — एयरलाइंस को वित्तीय सहायता अब 3 नहीं, 5 साल तक मिलेगी। वीजीएफ पात्रता सीमा 7 से 14 उड़ान प्रति सप्ताह हुई। सरकार का अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट बनाने का लक्ष्य, टियर-2 और टियर-3 शहरों पर खास फोकस।

मुख्य बातें

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने 16 जुलाई 2026 को उड़ान योजना के तहत वित्तीय सहायता अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने की घोषणा की।
उड़ान योजना को अगले 10 वर्षों के लिए विस्तारित किया गया है।
वीजीएफ पात्रता सीमा सप्ताह में 7 उड़ानों से बढ़ाकर 14 उड़ानें की गई, जिससे अधिक एयरपोर्ट लाभान्वित होंगे।
टियर-2 और टियर-3 शहरों के घाटे में चल रहे एयरपोर्ट्स को ओ एंड एम सहायता मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करना।
कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 100% भागीदारी रही।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना उड़ान के अंतर्गत एयरलाइंस को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू होगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय मार्गों को आर्थिक दृष्टि से अधिक व्यवहार्य बनाना है।

योजना में प्रमुख बदलाव

नई दिल्ली में उड़ान योजना पर आयोजित एक कार्यशाला के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने बताया कि सरकार ने इस योजना को अगले 10 वर्षों के लिए विस्तारित कर दिया है। इसके साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की पात्रता शर्तों में भी संशोधन किया गया है, ताकि अधिक हवाई अड्डों और रूट्स को इस सहायता का लाभ मिल सके।

नायडू ने स्पष्ट किया कि पहले किसी एयरपोर्ट को 'अनसर्व्ड' या 'अंडरसर्व्ड' तब माना जाता था, जब वहाँ सप्ताह में 7 से कम उड़ानें संचालित होती थीं। अब यह सीमा बढ़ाकर 14 उड़ानें प्रति सप्ताह कर दी गई है, जिससे अधिक एयरपोर्ट और क्षेत्रीय रूट्स वीजीएफ सहायता के दायरे में आ सकेंगे।

टियर-2 और टियर-3 शहरों को राहत

मंत्री ने यह भी घोषणा की कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के उन हवाई अड्डों को संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) सहायता प्रदान की जाएगी, जो कम यात्री संख्या के कारण घाटे में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एयरपोर्ट अपने परिचालन खर्च नहीं उठा पा रहे, वहाँ सरकार वित्तीय मदद देगी ताकि सेवाएँ निर्बाध रूप से जारी रहें।

100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट का लक्ष्य

नायडू ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करना है। उन्होंने बताया कि इस समय देश में हर महीने एक नया एयरपोर्ट या नया टर्मिनल तैयार हो रहा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए राज्यों के साथ घनिष्ठ समन्वय को अनिवार्य बताया गया।

उल्लेखनीय है कि उड़ान योजना पर आयोजित इस कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 100 प्रतिशत भागीदारी रही, जो केंद्र-राज्य सहयोग की सकारात्मक तस्वीर पेश करती है।

हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

हवाई किरायों में बढ़ोतरी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट माँगे जाने के प्रश्न पर नायडू ने कहा कि सरकार अदालत के समक्ष अपना नियामकीय ढाँचा स्पष्ट करेगी। उन्होंने कहा कि डायनेमिक फेयर प्राइसिंग एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत व्यवस्था है और विमानन क्षेत्र के विकास तथा बेहतर हवाई संपर्क के लिए यह आवश्यक है, इसीलिए भारत में भी एयरलाइंस को इसकी अनुमति दी गई है।

आगे की राह

उड़ान योजना में किए गए ये बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब भारत का विमानन क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि उड़ान योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी और तब से यह छोटे शहरों को हवाई मानचित्र पर लाने का प्रमुख माध्यम रही है। वित्तीय सहायता अवधि का विस्तार और वीजीएफ पात्रता में ढील इस योजना को दीर्घकालिक स्थायित्व देने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे एयरलाइंस वास्तव में घाटे वाले क्षेत्रीय रूट्स पर टिकी रहेंगी। उड़ान योजना के पिछले चरणों में कई रूट्स पर एयरलाइंस ने सब्सिडी अवधि समाप्त होते ही सेवाएँ बंद कर दीं — यह चक्र अभी भी नहीं टूटा है। 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन बुनियादी ढाँचा बनाना और उसे व्यावसायिक रूप से चलाना दो अलग चुनौतियाँ हैं। जब तक यात्री माँग और किराया संरचना का संतुलन नहीं बनता, सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता बनी रहेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उड़ान योजना के तहत वित्तीय सहायता अवधि क्यों बढ़ाई गई?
सरकार ने क्षेत्रीय रूट्स को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए वित्तीय सहायता अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की है। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू होगा ताकि एयरलाइंस को क्षेत्रीय मार्गों पर दीर्घकालिक संचालन के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
वीजीएफ पात्रता में क्या बदलाव किया गया है?
पहले किसी एयरपोर्ट को 'अनसर्व्ड' या 'अंडरसर्व्ड' तब माना जाता था जब वहाँ सप्ताह में 7 से कम उड़ानें होती थीं। अब यह सीमा बढ़ाकर 14 उड़ानें प्रति सप्ताह कर दी गई है, जिससे अधिक हवाई अड्डे और रूट्स वायबिलिटी गैप फंडिंग के दायरे में आ सकेंगे।
टियर-2 और टियर-3 शहरों के एयरपोर्ट्स को क्या सहायता मिलेगी?
कम यात्री संख्या के कारण घाटे में चल रहे टियर-2 और टियर-3 शहरों के हवाई अड्डों को संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) सहायता दी जाएगी। जहाँ एयरपोर्ट अपने परिचालन खर्च नहीं उठा पा रहे, वहाँ सरकार वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी।
सरकार का नए एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट विकास का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के साथ घनिष्ठ समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
हवाई किराए पर सर्वोच्च न्यायालय के सवाल पर सरकार का क्या रुख है?
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपना नियामकीय ढाँचा स्पष्ट करेगी। उन्होंने डायनेमिक फेयर प्राइसिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य व्यवस्था बताते हुए कहा कि विमानन क्षेत्र के विकास के लिए यह आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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