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गुरनूर बरार को आईसीसी आचार संहिता उल्लंघन पर 1 डिमेरिट पॉइंट, एजबेस्टन वनडे में लगाया आरोप

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गुरनूर बरार को आईसीसी आचार संहिता उल्लंघन पर 1 डिमेरिट पॉइंट, एजबेस्टन वनडे में लगाया आरोप

सारांश

भारत के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने एजबेस्टन वनडे में बल्लेबाज की दिशा में खतरनाक तरीके से गेंद फेंककर आईसीसी के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन किया। गलती स्वीकार करने पर उन्हें 1 डिमेरिट पॉइंट और आधिकारिक चेतावनी मिली — निलंबन का खतरा अभी नहीं, पर रिकॉर्ड पर दाग जरूर लगा।

मुख्य बातें

गुरनूर बरार को 14 जुलाई 2025 को एजबेस्टन वनडे में आईसीसी आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन का दोषी पाया गया।
इंग्लैंड की पारी के आठवें ओवर में बरार ने बल्लेबाज की दिशा में संभावित रूप से खतरनाक तरीके से गेंद फेंकी।
उल्लंघन आचार संहिता अनुच्छेद 2.9 के तहत दर्ज; 1 डिमेरिट पॉइंट और आधिकारिक चेतावनी दी गई।
मैच रेफरी रिची रिचर्डसन ने सजा प्रस्तावित की; बरार ने गलती स्वीकार कर ली, औपचारिक सुनवाई नहीं हुई।
24 महीनों में यह बरार का पहला अपराध; 4 डिमेरिट पॉइंट से निलंबन का खतरा — अभी सुरक्षित।

भारत के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को 14 जुलाई 2025 को एजबेस्टन में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे के दौरान आईसीसी आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन का दोषी पाया गया है। उन्हें आधिकारिक चेतावनी के साथ 1 डिमेरिट पॉइंट दिया गया है। पिछले 24 महीनों में यह उनका पहला अनुशासनात्मक मामला है।

क्या हुआ मैदान पर

यह घटना इंग्लैंड की पारी के आठवें ओवर में हुई, जब बरार ने फील्डिंग के दौरान गेंद उठाकर बल्लेबाज की दिशा में गलत और संभावित रूप से खतरनाक तरीके से फेंकी। ऑन-फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना और माइक बर्न्स, तीसरे अंपायर सैम नोगज्स्की तथा चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने मिलकर यह आरोप दर्ज किए।

आईसीसी आचार संहिता का कौन-सा नियम टूटा

आईसीसी के अनुसार, बरार ने खिलाड़ियों और खिलाड़ी सहायता कर्मियों के लिए निर्धारित आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन किया। यह नियम अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी पर या उसके पास अनुचित अथवा खतरनाक तरीके से गेंद फेंकने से संबंधित है। लेवल-1 उल्लंघन के मामलों में आधिकारिक फटकार से लेकर मैच फीस के 50 प्रतिशत तक जुर्माना और 1 या 2 डिमेरिट पॉइंट दिए जा सकते हैं।

बरार की प्रतिक्रिया और सुनवाई की स्थिति

बरार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और एमिरेट्स आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रिची रिचर्डसन द्वारा प्रस्तावित सजा को भी मान लिया। गलती स्वीकार करने के कारण मामले में औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।

डिमेरिट पॉइंट प्रणाली और आगे का जोखिम

आईसीसी की अनुशासनात्मक व्यवस्था के तहत यदि कोई खिलाड़ी 24 महीने के भीतर 4 या उससे अधिक डिमेरिट पॉइंट हासिल कर लेता है, तो उन्हें सस्पेंशन पॉइंट में बदल दिया जाता है। 2 सस्पेंशन पॉइंट मिलने पर खिलाड़ी को 1 टेस्ट या 2 वनडे अथवा 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित किया जा सकता है। डिमेरिट पॉइंट 24 महीने तक रिकॉर्ड में बने रहते हैं और उसके बाद स्वतः हटा दिए जाते हैं। फिलहाल बरार के रिकॉर्ड में केवल 1 डिमेरिट पॉइंट है, इसलिए निलंबन का तत्काल कोई खतरा नहीं है। आने वाले मैचों में उनके आचरण पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

गलती स्वीकार, कोई जुर्माना नहीं। लेकिन यह युवा तेज गेंदबाजों के लिए एक संकेत है कि मैदान पर भावनाओं पर नियंत्रण उतना ही ज़रूरी है जितनी गेंदबाज़ी की धार। आईसीसी की डिमेरिट प्रणाली संचयी है — और अगले 24 महीनों में 3 और पॉइंट मिलने पर निलंबन का रास्ता खुल जाएगा। भारतीय क्रिकेट के नज़रिए से यह समय है जब युवा खिलाड़ियों को अनुशासन की सीमाएँ स्पष्ट रूप से समझाई जाएँ, ताकि करियर के शुरुआती दौर में ही रिकॉर्ड पर बोझ न पड़े।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरनूर बरार को डिमेरिट पॉइंट क्यों मिला?
बरार ने 14 जुलाई 2025 को एजबेस्टन वनडे में इंग्लैंड की पारी के आठवें ओवर के दौरान बल्लेबाज की दिशा में संभावित रूप से खतरनाक तरीके से गेंद फेंकी, जिससे आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन हुआ। इस पर उन्हें 1 डिमेरिट पॉइंट और आधिकारिक चेतावनी दी गई।
आईसीसी का लेवल-1 उल्लंघन क्या होता है?
लेवल-1 आईसीसी आचार संहिता का सबसे हल्का उल्लंघन है, जिसमें आधिकारिक फटकार से लेकर मैच फीस के 50 प्रतिशत तक जुर्माना और 1 या 2 डिमेरिट पॉइंट दिए जा सकते हैं। अनुच्छेद 2.9 विशेष रूप से किसी खिलाड़ी पर या उसके पास अनुचित तरीके से गेंद फेंकने से संबंधित है।
क्या बरार पर निलंबन का खतरा है?
अभी नहीं। आईसीसी नियमों के अनुसार 24 महीनों में 4 या उससे अधिक डिमेरिट पॉइंट मिलने पर ही सस्पेंशन पॉइंट बनते हैं। फिलहाल बरार के रिकॉर्ड में केवल 1 डिमेरिट पॉइंट है, जो 24 महीने बाद स्वतः हटा दिया जाएगा।
इस मामले में औपचारिक सुनवाई क्यों नहीं हुई?
बरार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और मैच रेफरी रिची रिचर्डसन द्वारा प्रस्तावित सजा को मान लिया। आईसीसी नियमों के तहत गलती स्वीकार करने पर औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं होती।
आरोप किसने लगाए और मामला कैसे दर्ज हुआ?
ऑन-फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना और माइक बर्न्स, तीसरे अंपायर सैम नोगज्स्की तथा चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने मिलकर बरार के खिलाफ आरोप दर्ज किए। इसके बाद मैच रेफरी रिची रिचर्डसन ने मामले की जाँच कर सजा प्रस्तावित की।
राष्ट्र प्रेस
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