तमिलनाडु में भूजल स्तर में गहराती गिरावट ने गर्मी के आगमन से पहले बढ़ाई चिंता

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तमिलनाडु में भूजल स्तर में गहराती गिरावट ने गर्मी के आगमन से पहले बढ़ाई चिंता

सारांश

तमिलनाडु में भूजल स्तर में गंभीर गिरावट ने राज्य के कई जिलों में जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य को गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Key Takeaways

  • भूजल स्तर में गिरावट ने चिंता बढ़ाई है।
  • 29 जिलों में गिरावट दर्ज की गई है।
  • विशेषज्ञों ने सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता बताई है।

चेन्नई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में भूजल स्तर में एक गंभीर गिरावट देखी गई है। सरकारी जल संसाधन विभाग के अंतर्गत राज्य भूजल और सतही जल संसाधन डेटा सेंटर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 38 में से 29 जिलों में फरवरी में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भूजल स्तर में कमी आई है।

आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि दिंडीगुल और तिरुपुर जिलों में भूजल स्तर में सबसे अधिक गिरावट आई है, जहां यह 2.58 मीटर तक गिर गया है। इसके बाद कोयंबटूर में 2.07 मीटर की कमी आई, जबकि सलेम (1.68 मीटर), धर्मपुरी (1.62 मीटर), करूर (1.54 मीटर) और पेराम्बालुर (1.20 मीटर) में भी भूजल स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई।

इन गिरावटों के कारण राज्य के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भूजल भंडारों पर बढ़ता दबाव दिखाई दे रहा है।

कई अन्य जिलों में भी मामूली गिरावट देखी गई है। मदुरै में 1.27 मीटर की गिरावट दर्ज की गई, जबकि विरुधुनगर और पेरंबालूर में 1.20 मीटर की कमी आई। नमक्कल (1.08 मीटर) और इरोड (1.10 मीटर) में भी भूजल स्तर में कमी का संकेत मिला है। उत्तरी तमिलनाडु में, तिरुवल्लूर में 0.99 मीटर और तिरुवानमलाई में 0.85 मीटर की गिरावट देखी गई, जो विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर भूस्खलन को दर्शाती है।

इसके विपरीत, तटीय और डेल्टा जिलों में अपेक्षाकृत मामूली परिवर्तन देखे गए हैं। नागपट्टिनम में सबसे कम गिरावट मात्र 0.03 मीटर दर्ज की गई, इसके बाद नीलगिरि (0.04 मीटर) और तिरुवरूर (0.11 मीटर) का स्थान रहा, जो इन क्षेत्रों में भूजल स्थिति की स्थिरता का संकेत देता है।

जल स्तर में कमी की मात्रा विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि तमिलनाडु में 2025 में 12 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के चेन्नई केंद्र के अनुसार, राज्य में सामान्य 920.9 मिमी के मुकाबले 1,027.7 मिमी बारिश दर्ज की गई। चेंगलपट्टू एकमात्र ऐसा जिला था जहां सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि दस जिलों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत अधिक बारिश हुई और एक जिले में 60 प्रतिशत से भी अधिक बारिश दर्ज की गई।

इस अनुकूल वर्षा पैटर्न के बावजूद, भूजल स्तर में निरंतर गिरावट खराब पुनर्भरण, अत्यधिक दोहन और जल प्रबंधन प्रणालियों में संभावित अक्षमताओं की ओर इशारा करती है।

गर्मी का मौसम नजदीक आने के साथ, यह प्रवृत्ति जल स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है, खासकर राज्य के सूखाग्रस्त और उच्च मांग वाले क्षेत्रों में।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय लागू नहीं किए गए, जिनमें वर्षा जल संचयन में सुधार और भूजल का विनियमित उपयोग शामिल हैं, तो तमिलनाडु को आने वाले महीनों में तीव्र जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Point of View

भूजल स्तर में गिरावट, और दूसरी, इस गिरावट के पीछे के कारण। यह एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की मांग अधिक है। सरकार और विशेषज्ञों को इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

तमिलनाडु में भूजल स्तर में गिरावट के कारण क्या हैं?
भूजल स्तर में गिरावट के कारणों में अत्यधिक दोहन, खराब पुनर्भरण और जल प्रबंधन में अक्षमता शामिल हैं।
क्या इस गिरावट का मौसमी प्रभाव है?
हां, गर्मी के मौसम की शुरुआत से पहले जल स्तर में गिरावट एक गंभीर चिंता है, खासकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में।
भूजल स्तर में गिरावट के क्या संभावित समाधान हैं?
वर्षा जल संचयन में सुधार और भूजल के विनियमित उपयोग जैसे उपाय इस समस्या के समाधान में सहायक हो सकते हैं।
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