तमिलनाडु में बढ़ती गर्मी के खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- तापमान में वृद्धि की स्थिति को लेकर सतर्क रहें।
- पर्याप्त पानी पीना न भूलें।
- गर्मी से संबंधित बीमारियों के लक्षणों पर ध्यान दें।
- कमजोर समूहों को विशेष ध्यान दें।
- अस्पतालों में प्रस्तुतता और सेवाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
चेन्नई, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे चेन्नई शहर और तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय (डीपीएच) ने निवासियों को गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि लोगों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए, दोपहर के समय में बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए और गर्मी से संबंधित समस्याओं के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
इन संकेतों में त्वचा पर चकत्ते और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे हल्के लक्षण से लेकर गंभीर स्थितियों जैसे गर्मी से थकावट और जानलेवा हीटस्ट्रोक शामिल हो सकते हैं।
इस सलाह में स्पष्ट किया गया है कि यदि तापमान सामान्य से अधिक बढ़ता है या 45 डिग्री सेल्सियस के निकट पहुँचता है, तो खतरा और अधिक बढ़ सकता है।
ऐसे समय में विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, बाहरी काम करने वालों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
मौसमी वृद्धि की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, राज्यभर के सरकारी अस्पतालों ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। अधिकारियों ने पर्याप्त बिस्तर, आवश्यक दवाएं, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस), तरल पदार्थ और शीतलन उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की है।
अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं को भी सुदृढ़ किया गया है, जबकि गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में विशेष बिस्तर आरक्षित किए गए हैं।
जन स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ए. सोमासुंदरम ने कहा कि अधिकारियों को गर्मी से निपटने के लिए व्यापक कार्य योजना लागू करने, जन जागरूकता अभियान को तेज करने और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति शीतलन प्रणालियों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, जबकि बेहतर वेंटिलेशन और कूल-रूफ जैसे दीर्घकालिक पहलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
राजीव गांधी जनरल अस्पताल के डीन डॉ. के. शांतरामन ने प्रारंभिक हस्तक्षेप के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जनता को सलाह दी कि यदि उन्हें चक्कर आना, तेज बुखार या भ्रम जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें, क्योंकि समय पर उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने जनसभाओं और बाहरी आयोजनों के आयोजकों के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें मौजूदा गर्मी के मौसम में सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पेयजल, छायादार स्थान और मौके पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
-- राष्ट्र प्रेस
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