टास्मैक भ्रष्टाचार: तमिलनाडु में 41 ठिकानों पर DVAC की एक साथ छापेमारी, ₹3,600 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने 29 जुलाई 2026 को राज्यभर के 41 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जो तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टास्मैक) में कथित वित्तीय अनियमितताओं की चल रही जांच का हिस्सा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य के शराब वितरण नेटवर्क में लंबे समय से चली आ रही कथित अवैध नकद वसूली की व्यवस्था को उजागर करने के उद्देश्य से की गई है।
छापेमारी का दायरा और स्थान
DVAC की टीमों ने इरोड, कोयंबटूर, पीलामेडु, पोलाची, नरसिम्हानायकेनपालयम और नवक्करई समेत राज्य के कई इलाकों में एक साथ तलाशी ली। छापेमारी गोदामों, शराब बनाने वाली इकाइयों और अन्य प्रतिष्ठानों पर की गई, जिन पर टास्मैक की खरीद एवं वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं से जुड़े होने का संदेह है।
अधिकारियों के अनुसार, DVAC ने मेट्टुपालयम के पास नरसिम्हानायकेनपालयम स्थित सिवास डिस्टिलरी और मन्नारगुडी की एक शराब फैक्टरी में भी तलाशी ली। बताया जा रहा है कि यह फैक्टरी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के एक वरिष्ठ नेता की है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कथित वसूली का पैमाना
सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु में इस समय टास्मैक की 4,048 पंजीकृत शराब दुकानें हैं। दावा किया जा रहा है कि 'पार्टी फंड' के नाम पर हर महीने करीब ₹102 करोड़ की अवैध वसूली की जाती थी। यदि यह सिलसिला पिछले पाँच वर्षों से चला आ रहा है, तो कथित तौर पर कुल रकम ₹3,600 करोड़ तक पहुँच सकती है। हालांकि, सरकार ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और यह मामला फिलहाल जांच के दायरे में है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकारी निर्देश
माना जा रहा है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को कथित अनियमितताओं की जानकारी दे दी है। इसके बाद सरकार ने अधिकारियों को टास्मैक की राजस्व वसूली और लेखा व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि टास्मैक की बिक्री से होने वाली प्रत्येक रुपये की आय का सही हिसाब रखा जाए और पूरी राशि राज्य के खजाने में जमा कराई जाए।
सरकार ने शराब की खाली बोतलों की वापसी और रखरखाव की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने का भी फैसला किया है, ताकि राजस्व के संभावित नुकसान को रोका जा सके।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह जांच उन आरोपों के बीच हो रही है, जिनमें कहा गया है कि तमिलनाडु का शराब बिक्री नेटवर्क लंबे समय से अवैध नकद वसूली के जरिए संचालित हो रहा था। गौरतलब है कि सरकार ने अपनी प्रमुख नीतियों के तहत चुनावी वादों को पूरा करते हुए स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के पास स्थित 717 शराब की दुकानें पहले ही बंद कर दी हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब टास्मैक राज्य सरकार के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है, और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे सार्वजनिक खजाने को प्रभावित करती है।
आगे क्या होगा
उम्मीद जताई जा रही है कि DVAC की छापेमारी से मिले साक्ष्यों के आधार पर राज्य सरकार शराब वितरण व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और आगे बढ़ा सकती है। प्रशासन ने टास्मैक के थोक और खुदरा बिक्री नेटवर्क में कथित अवैध वसूली की व्यवस्था को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं। जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि यह मामला कितनी दूर तक जाता है और किन-किन पर कार्रवाई होती है।