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डीएमके ने राज्यपाल से मांगी डीवीएसी जांच, विजय-वाइको पर एमडीएमके विधायकों को इस्तीफा दिलाने की साजिश का आरोप

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डीएमके ने राज्यपाल से मांगी डीवीएसी जांच, विजय-वाइको पर एमडीएमके विधायकों को इस्तीफा दिलाने की साजिश का आरोप

सारांश

DMK ने तमिलनाडु के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री विजय और वाइको पर दो MDMK विधायकों को इस्तीफा दिलाने की कथित साजिश की DVAC जांच की मांग की। पार्टी इसे 'हॉर्स ट्रेडिंग' और संवैधानिक जनादेश में हस्तक्षेप बता रही है।

मुख्य बातें

DMK ने 1 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र वी.
अर्लेकर को ज्ञापन सौंपकर DVAC जांच की मांग की।
आरोप है कि मुख्यमंत्री विजय और MDMK महासचिव वाइको ने कथित तौर पर दो विधायकों — टी.एम.
राजेंद्रन (कडायनल्लूर) और एस.
सेंथिल सेल्वन (सिर्काझी) — को इस्तीफा देने के लिए प्रेरित करने की साजिश रची।
दोनों विधायक MDMK से संबद्ध हैं लेकिन DMK के 'राइजिंग सन' चिह्न पर निर्वाचित हुए थे।
शिकायत MDMK की आम परिषद बैठक में वाइको के कथित बयान पर आधारित है, जिसमें उन्होंने पट्टिनापक्कम आवास पर मुलाकात का ज़िक्र किया।
DMK ने इसे 'हॉर्स ट्रेडिंग' और संवैधानिक जनादेश में हस्तक्षेप बताते हुए तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 1 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि मुख्यमंत्री विजय और मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) के महासचिव वाइको पर दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की कथित साजिश की निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (DVAC) से जांच कराई जाए। पार्टी का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रलोभन के ज़रिए विधानसभा की संवैधानिक संरचना को अवैध रूप से बदलने का प्रयास है।

मुख्य आरोप क्या हैं

DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने राज्यपाल और DVAC को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय और वाइको ने कथित तौर पर कडायनल्लूर से विधायक टी.एम. राजेंद्रन और सिर्काझी से विधायक एस. सेंथिल सेल्वन को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करने की साजिश रची। गौरतलब है कि दोनों विधायक MDMK से संबद्ध हैं, लेकिन वे पिछले गठबंधन के तहत DMK के चुनाव चिह्न 'राइजिंग सन' पर निर्वाचित हुए थे।

वाइको के बयान पर टिकी है शिकायत

भारती के अनुसार, यह शिकायत MDMK की आम परिषद की बैठक में वाइको द्वारा दिए गए कथित बयान पर आधारित है। कथित तौर पर वाइको ने उस बैठक में दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने पट्टिनापक्कम स्थित आवास पर हुई मुलाकात में उनसे दोनों विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने का अनुरोध किया था। भारती ने यह भी आरोप लगाया कि वाइको ने बैठक में कहा कि यदि दोनों विधायक इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ते हैं, तो मुख्यमंत्री विजय स्वयं उनके पक्ष में प्रचार करेंगे।

DMK का संवैधानिक तर्क

DMK का कहना है कि यदि वाइको के ये बयान तथ्यात्मक रूप से सही हैं, तो यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक प्रलोभन देकर प्रभावित करने और 'हॉर्स ट्रेडिंग' का स्पष्ट मामला बनता है। पार्टी का तर्क है कि इस तरह की कथित कार्रवाई जनता द्वारा चुने गए विधायकों के संवैधानिक जनादेश में हस्तक्षेप है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सीधी चुनौती देती है। भारती ने यह भी रेखांकित किया कि उच्चतम न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार संज्ञेय अपराधों में DVAC का जांच करना कानूनी दायित्व है।

राज्यपाल से क्या मांगा

DMK ने राज्यपाल अर्लेकर से अपील की कि वह इस कथित भ्रष्ट आचरण पर 'आंखें बंद' न करें। पार्टी ने राज्यपाल से DVAC को तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानून के अनुसार व्यापक जांच कराने का निर्देश देने की मांग की। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में DMK और MDMK के बीच गठबंधन की राजनीति पहले से ही तनावपूर्ण मानी जा रही है।

आगे क्या हो सकता है

राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। DVAC इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला तमिलनाडु की विधानसभा राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर दूरगामी असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वाइको के कथित बयान — यदि सत्य हैं — यह दर्शाते हैं कि दोनों दलों के बीच अविश्वास गहरा हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि DVAC, जो राज्य सरकार के अधीन है, किसी मामले में जहाँ मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी हों, वहाँ निष्पक्ष जांच की उम्मीद रखना यथार्थवादी नहीं है। असली सवाल यह है कि राज्यपाल इस शिकायत पर कोई संवैधानिक कदम उठाते हैं या यह ज्ञापन राजनीतिक दबाव की रणनीति बनकर रह जाता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK ने DVAC जांच की मांग क्यों की है?
DMK का आरोप है कि मुख्यमंत्री विजय और वाइको ने कथित तौर पर दो MDMK विधायकों को राजनीतिक प्रलोभन देकर विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की साजिश रची, जो DMK के अनुसार 'हॉर्स ट्रेडिंग' और संविधान का उल्लंघन है। इसीलिए पार्टी ने राज्यपाल से DVAC द्वारा FIR दर्ज कर जांच कराने का अनुरोध किया है।
किन दो विधायकों को इस्तीफा दिलाने का आरोप है?
आरोप कडायनल्लूर से विधायक टी.एम. राजेंद्रन और सिर्काझी से विधायक एस. सेंथिल सेल्वन को लेकर है। दोनों MDMK से संबद्ध हैं लेकिन पिछले गठबंधन के तहत DMK के 'राइजिंग सन' चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे।
वाइको के किस बयान पर यह शिकायत आधारित है?
DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती के अनुसार, वाइको ने MDMK की आम परिषद बैठक में कथित तौर पर दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय ने पट्टिनापक्कम स्थित अपने आवास पर हुई मुलाकात में उनसे दोनों विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने का अनुरोध किया था। वाइको ने यह भी कथित तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री विजय उपचुनाव में इन विधायकों के पक्ष में प्रचार करेंगे।
इस मामले में राज्यपाल की क्या भूमिका हो सकती है?
DMK ने राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर से अनुरोध किया है कि वे DVAC को तत्काल FIR दर्ज कर व्यापक जांच कराने का निर्देश दें। राज्यपाल के पास संवैधानिक प्राधिकार है कि वे ऐसे मामलों में जांच एजेंसी को निर्देशित कर सकते हैं, हालांकि राज्यपाल कार्यालय की अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या DVAC इस शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है?
DMK का तर्क है कि उच्चतम न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार संज्ञेय अपराधों में DVAC का जांच करना कानूनी दायित्व है। हालांकि, DVAC राज्य सरकार के अधीन कार्य करता है, इसलिए जांच की दिशा और गति राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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