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डीएमके ने तमिलनाडु CM विजय के सहयोगियों पर एफआईआर की मांग की, कैबिनेट बैठकों में अनधिकृत प्रवेश का आरोप

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डीएमके ने तमिलनाडु CM विजय के सहयोगियों पर एफआईआर की मांग की, कैबिनेट बैठकों में अनधिकृत प्रवेश का आरोप

सारांश

DMK ने तमिलनाडु CM जोसेफ विजय के दो कथित निजी सहयोगियों — जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी — के विरुद्ध FIR की मांग DGP से की है। आरोप है कि बिना किसी सरकारी पद के ये दोनों गोपनीय कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए, जो संविधान के अनुच्छेद 164(3) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन है।

मुख्य बातें

DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने 1 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के DGP को औपचारिक शिकायत सौंपी।
आरोप है कि जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी — दोनों निजी व्यक्ति — बिना किसी सरकारी पद के CM की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठकों में कथित तौर पर उपस्थित रहे।
शिकायत में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 , BNS 2023 और BNSS 2023 के तहत FIR और जांच की मांग की गई है।
DMK का तर्क है कि संविधान अनुच्छेद 164(3) के तहत CM गोपनीयता की शपथ से बाध्य हैं, जिसका कथित उल्लंघन हुआ।
अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 1 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो कथित करीबी सहयोगियों — जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी — के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को औपचारिक शिकायत सौंपी। DMK का आरोप है कि इन दोनों निजी व्यक्तियों ने सरकार में कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद राज्य की कैबिनेट बैठकों और अन्य गोपनीय सरकारी विचार-विमर्शों में कथित तौर पर भाग लिया।

शिकायत में क्या कहा गया

DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने DGP को सौंपी शिकायत में आरोप लगाया कि अरोकियासामी और रेड्डी — जिन्हें DMK ने मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी और आंध्र प्रदेश निवासी बताया है — कथित तौर पर राज्य सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठकों, आधिकारिक समीक्षा सत्रों और अन्य उच्च स्तरीय चर्चाओं के दौरान उपस्थित रहे। भारती ने इसे संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

कानूनी आधार और मांगें

शिकायत में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023, और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और व्यापक जांच की मांग की गई है। भारती ने तर्क दिया कि उपलब्ध जानकारी से प्रथम दृष्टया अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा गोपनीय सरकारी सूचनाओं का अवैध संचार, प्राप्ति और उपयोग, सार्वजनिक पद का संभावित दुरुपयोग तथा आपराधिक षड्यंत्र के संकेत मिलते हैं।

संवैधानिक दायित्व का प्रश्न

DMK ने यह भी रेखांकित किया कि संविधान के अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची के तहत पद और गोपनीयता की शपथ के कारण मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल की कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो भारती के अनुसार यह संवैधानिक दायित्वों और वैधानिक कर्तव्यों का सीधा उल्लंघन होगा।

जांच की मांग के बिंदु

DMK ने पुलिस से आग्रह किया है कि वह तीन प्रमुख प्रश्नों की जांच करे: दोनों व्यक्तियों को अत्यंत गोपनीय बैठकों में प्रवेश कैसे मिला; क्या उनके साथ कोई संवेदनशील जानकारी साझा की गई; और क्या किसी सरकारी कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन कर उनकी उपस्थिति को सुगम बनाया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में विपक्षी दल राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

आगे क्या होगा

अभी तक राज्य पुलिस या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि इस प्रकार की शिकायतें DGP को सौंपे जाने के बाद पुलिस को तय समयसीमा में संज्ञान लेना होता है। मामले की आगामी कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह शासन की पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा पर गहरा सवाल खड़ा करता है। गौरतलब है कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत FIR एक गंभीर कानूनी कदम है, जिसका इस्तेमाल अब तक बड़े जासूसी या सूचना-लीक मामलों में होता रहा है। असली परीक्षा यह है कि DGP राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर पाते हैं या नहीं — क्योंकि शिकायत जिस सरकार के विरुद्ध है, उसी के अधीन पुलिस कार्य करती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK ने तमिलनाडु में FIR की मांग क्यों की है?
DMK का आरोप है कि CM जोसेफ विजय के दो निजी सहयोगी — जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी — बिना किसी सरकारी पद के कैबिनेट बैठकों और गोपनीय सरकारी विचार-विमर्शों में कथित तौर पर शामिल हुए। DMK ने इसे आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 164(3) का उल्लंघन बताते हुए FIR और जांच की मांग की है।
जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी कौन हैं?
DMK की शिकायत के अनुसार ये दोनों तमिलनाडु CM जोसेफ विजय के कथित करीबी सहयोगी हैं और आंध्र प्रदेश के निवासी बताए गए हैं। सरकार में उनका कोई आधिकारिक पद नहीं है, फिर भी उन पर गोपनीय सरकारी बैठकों में उपस्थित रहने का आरोप है।
इस मामले में कौन से कानून लागू होते हैं?
DMK ने आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में गोपनीय सूचनाओं के अवैध संचार, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे संभावित अपराधों का उल्लेख किया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 164(3) का इस मामले से क्या संबंध है?
संविधान का अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची मुख्यमंत्री को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाती है, जिसके तहत वे मंत्रिमंडल की कार्यवाही को गोपनीय रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। DMK का तर्क है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह उस संवैधानिक दायित्व का सीधा उल्लंघन है।
इस शिकायत पर आगे क्या होगा?
शिकायत DGP को सौंपी जा चुकी है और पुलिस को इस पर संज्ञान लेना होगा। अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि FIR दर्ज होती है, तो जांच का दायरा यह तय करेगा कि दोनों व्यक्तियों को प्रवेश कैसे मिला और क्या कोई गोपनीय जानकारी साझा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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