डीएमके ने तमिलनाडु CM विजय के सहयोगियों पर एफआईआर की मांग की, कैबिनेट बैठकों में अनधिकृत प्रवेश का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 1 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो कथित करीबी सहयोगियों — जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी — के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को औपचारिक शिकायत सौंपी। DMK का आरोप है कि इन दोनों निजी व्यक्तियों ने सरकार में कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद राज्य की कैबिनेट बैठकों और अन्य गोपनीय सरकारी विचार-विमर्शों में कथित तौर पर भाग लिया।
शिकायत में क्या कहा गया
DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने DGP को सौंपी शिकायत में आरोप लगाया कि अरोकियासामी और रेड्डी — जिन्हें DMK ने मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी और आंध्र प्रदेश निवासी बताया है — कथित तौर पर राज्य सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठकों, आधिकारिक समीक्षा सत्रों और अन्य उच्च स्तरीय चर्चाओं के दौरान उपस्थित रहे। भारती ने इसे संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
कानूनी आधार और मांगें
शिकायत में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023, और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और व्यापक जांच की मांग की गई है। भारती ने तर्क दिया कि उपलब्ध जानकारी से प्रथम दृष्टया अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा गोपनीय सरकारी सूचनाओं का अवैध संचार, प्राप्ति और उपयोग, सार्वजनिक पद का संभावित दुरुपयोग तथा आपराधिक षड्यंत्र के संकेत मिलते हैं।
संवैधानिक दायित्व का प्रश्न
DMK ने यह भी रेखांकित किया कि संविधान के अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची के तहत पद और गोपनीयता की शपथ के कारण मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल की कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो भारती के अनुसार यह संवैधानिक दायित्वों और वैधानिक कर्तव्यों का सीधा उल्लंघन होगा।
जांच की मांग के बिंदु
DMK ने पुलिस से आग्रह किया है कि वह तीन प्रमुख प्रश्नों की जांच करे: दोनों व्यक्तियों को अत्यंत गोपनीय बैठकों में प्रवेश कैसे मिला; क्या उनके साथ कोई संवेदनशील जानकारी साझा की गई; और क्या किसी सरकारी कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन कर उनकी उपस्थिति को सुगम बनाया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में विपक्षी दल राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या होगा
अभी तक राज्य पुलिस या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि इस प्रकार की शिकायतें DGP को सौंपे जाने के बाद पुलिस को तय समयसीमा में संज्ञान लेना होता है। मामले की आगामी कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से नज़र बनी रहेगी।