CM विजय की सुरक्षा पर AIADMK का सवाल: मल्टी-लेयर कवच के बीच निजी बॉडीगार्ड क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की सुरक्षा व्यवस्था पर AIADMK सांसद आईएस इनबादुरई ने 3 जून को गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री को पहले से ही कई स्तरों की आधिकारिक सुरक्षा — जिसमें एक विशेष ‘कोर सेल’ भी शामिल है — मुहैया कराई जा चुकी है, तो उनके साथ एक निजी अंगरक्षक की मौजूदगी क्यों है। यह सवाल ऐसे समय में आया है जब विजय ने हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी TVK को जीत दिलाकर मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाली है।
मुख्य आपत्ति क्या है
इनबादुरई ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट में आधिकारिक सुरक्षा टीम के साथ-साथ एक प्राइवेट सिक्योरिटी सहयोगी की आवश्यकता पर सवाल खड़ा किया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री वर्तमान में राज्य की ओर से दी गई बहु-स्तरीय आधिकारिक सुरक्षा घेरे में हैं, जिसमें एक सीमित सिक्योरिटी नेटवर्क और चिन्हित व्यक्तियों की एक टीम शामिल है, जिन्हें सार्वजनिक उपस्थितियों और आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान CM की सुरक्षा का ज़िम्मा सौंपा गया है।
‘भरोसे की कमी’ का संकेत?
AIADMK नेता ने यह भी प्रश्न किया कि क्या किसी निजी सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी, तमिलनाडु पुलिस और मुख्यमंत्री की सुरक्षा का दायित्व निभा रही अन्य आधिकारिक एजेंसियों पर भरोसे की कमी की ओर इशारा करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द बनाए गए हाई-सिक्योरिटी ज़ोन को नियंत्रित करने वाले निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल और एक्सेस रेगुलेशन को लेकर भी चिंता जाहिर की।
कानूनी और प्रक्रियागत प्रश्न
सांसद ने स्पष्टीकरण माँगा कि किस कानूनी और प्रक्रियागत आधार पर किसी ऐसे व्यक्ति को, जो सरकारी सुरक्षा तंत्र का हिस्सा नहीं है, मुख्यमंत्री के अत्यंत संवेदनशील ‘एक्सेस कंट्रोल ज़ोन’ में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकारी सिस्टम से बाहर का कोई व्यक्ति लगातार ‘सिक्योरिटी शैडो’ के रूप में मुख्यमंत्री के साथ रह सकता है — और क्या यह स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अभिनेता से नेता बने विजय की TVK ने हालिया चुनाव में सत्तारूढ़ खेमे को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा में बहुमत हासिल किया, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। AIADMK की ओर से यह पहली बड़ी सार्वजनिक आपत्तियों में से एक है, जो नई सरकार के प्रशासनिक और प्रक्रियागत निर्णयों को निशाने पर ले रही है।
क्या होगा आगे
इनबादुरई ने तमिलनाडु प्रशासन से आग्रह किया है कि वह स्पष्ट करे कि क्या मुख्यमंत्री के सुरक्षा घेरे के भीतर किसी निजी अंगरक्षक की उपस्थिति स्थापित सुरक्षा मानदंडों के अनुरूप है, और क्या आधिकारिक सुरक्षा प्रक्रियाओं से किसी भी प्रकार के समझौते को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय मौजूद हैं। राज्य सरकार की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतज़ार है।