एआईएडीएमके का टीवीके सरकार पर हमला: सीएम विजय पर तमिलनाडु को विफल करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) ने शनिवार, 11 जुलाई को तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर शासन में बुरी तरह विफल रहने और प्रशासनिक खामियों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्षी दलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। यह पलटवार चेन्नई से उस समय आया जब विजय ने एक दिन पहले करूर में एक जनसभा में एआईएडीएमके और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) पर 'मिलीभगत' का आरोप लगाया था।
विजय के आरोप और राजनीतिक संदर्भ
मुख्यमंत्री विजय ने करूर की जनसभा में डीएमके को 'बुरी ताकत' और एआईएडीएमके को 'निष्क्रिय ताकत' करार दिया था। उन्होंने दावा किया कि ये दोनों द्रविड़ पार्टियाँ राज्य में कुशासन और भ्रष्टाचार के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं और पार्टी फंड जुटाने की आड़ में कई सरकारी विभागों में मिलकर काम कर रही हैं। विजय ने कहा, 'बुरी ताकत और निष्क्रिय ताकत अलग-अलग इकाइयाँ नहीं हैं — वे मिलीभगत से काम कर रही हैं।'
एआईएडीएमके का पलटवार
एआईएडीएमके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट के ज़रिये इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसने डीएमके का राजनीतिक और चुनावी स्तर पर लगातार विरोध किया है और राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर डीएमके के विरुद्ध चुनाव लड़ा है। पार्टी ने अपनी स्वतंत्र विपक्षी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वह तमिलनाडु में एक स्वायत्त विपक्षी दल के रूप में काम करती रही है।
टीवीके सरकार पर अवसरवाद का आरोप
एआईएडीएमके ने टीवीके सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह डीएमके नेतृत्व वाले गठबंधन में पहले से शामिल दलों को अपनी ओर खींचकर राजनीतिक अवसरवाद के बल पर सत्ता में आई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री विजय की जनता से राजनीतिक भागीदारी पर भी सवाल उठाए — यह पूछते हुए कि पार्टी की स्थापना के दो वर्षों में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कितने आम नागरिकों से मुलाकात की और जनहित में कौन-सी ठोस पहल की।
आगे क्या
यह राजनीतिक तकरार ऐसे समय में उभरी है जब तमिलनाडु में तीन प्रमुख राजनीतिक शक्तियाँ — टीवीके, डीएमके और एआईएडीएमके — अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं। आलोचकों का कहना है कि यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर राज्य के शासन की वास्तविक चुनौतियों से ध्यान भटका सकता है। आने वाले हफ्तों में तीनों दलों की रणनीतिक चाल पर सबकी नजर रहेगी।