एआईएडीएमके का ऑनलाइन सदस्यता अभियान जल्द, ईपीएस की अध्यक्षता में 8 जिलों की चुनाव समीक्षा 15 जुलाई से
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) ने 11 जुलाई 2026 को घोषणा की कि वह अपनी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विंग के माध्यम से शीघ्र ही एक ऑनलाइन सदस्यता अभियान शुरू करेगी। इसका उद्देश्य पार्टी के संगठनात्मक आधार को, विशेष रूप से युवाओं के बीच, मजबूत करना है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पार्टी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपने निराशाजनक प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा में जुटी है।
ऑनलाइन सदस्यता अभियान की रूपरेखा
पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर जारी बयान में कहा कि यह डिजिटल सदस्यता अभियान एआईएडीएमके में शामिल होने के इच्छुक युवाओं को एक व्यवस्थित और आधिकारिक मंच प्रदान करेगा। इससे वे संगठनात्मक गतिविधियों में उचित चैनलों के माध्यम से भाग ले सकेंगे।
यह कदम उन खबरों के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया कि पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना कुछ 'उत्साही युवाओं' द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए गए। एआईएडीएमके ने स्पष्ट किया कि महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी की अनुमति के बिना कोई भी पार्टी कार्यक्रम नहीं होना चाहिए।
ईपीएस की अध्यक्षता में 8 जिलों की समीक्षा बैठकें
चुनाव समीक्षा के तहत पलानीस्वामी 15, 16 और 18 जुलाई को चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में आठ जिलों — इरोड, तिरुवल्लुर, थेनी, पुदुक्कोट्टई, कुड्डालोर, करूर, नीलगिरी और विरुधुनगर — के पदाधिकारियों के साथ परामर्श बैठकें करेंगे।
इन आठ जिलों में कुल 51 विधानसभा क्षेत्र हैं, जहाँ पार्टी का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा। एआईएडीएमके इन 51 सीटों में से केवल 9 पर जीत हासिल कर सकी। विरुधुनगर, थेनी और नीलगिरी जिलों में तो पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई।
विधायकों का दलबदल और आंतरिक संकट
चुनावी हार के बाद पार्टी को और झटके लगे। करूर, पेरुंदुरई और विरालिमलाई से एआईएडीएमके के तीन विजयी विधायकों ने अपनी सीटों से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) का दामन थाम लिया, जिससे विधानसभा में पार्टी की प्रभावी उपस्थिति और कमजोर हो गई।
कुड्डालोर जिले में भी आंतरिक मतभेद उभरे हैं, जहाँ पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं। भुवनगिरी के विधायक ए. अरुमोझिथेवन उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने पलानीस्वामी द्वारा सौंपी गई नई संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ स्वीकार नहीं की हैं। गौरतलब है कि उन्हें विधानसभा में हुए ट्रस्ट वोट के दौरान उनके आचरण के कारण उनके पुराने पदों से करीब दो महीने पहले हटाया गया था।
आम जनता और संगठन पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में विपक्षी दल के रूप में एआईएडीएमके की भूमिका कमजोर पड़ रही है। दलबदल, आंतरिक अनुशासनहीनता और चुनावी पराजय — तीनों मोर्चों पर एक साथ चुनौतियाँ पार्टी की पुनर्निर्माण की राह को कठिन बना रही हैं।
आगामी समीक्षा बैठकों में पार्टी नेतृत्व हार के कारणों का विश्लेषण करेगा और भविष्य की राजनीतिक रणनीति तय करेगा। ऑनलाइन सदस्यता अभियान इस पुनर्गठन प्रक्रिया की पहली ठोस कड़ी मानी जा रही है।