योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर आयुष विश्वविद्यालय में बालक-बालिका छात्रावास का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 जुलाई 2026 की शाम गोरखपुर स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय में नवनिर्मित बालक और बालिका छात्रावास का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आवंटी चिकित्सक विद्यार्थियों को उनके कमरों की चाबियाँ भी सौंपीं।
छात्रावासों का नामकरण
बालक छात्रावास का नाम मुख्यमंत्री योगी के गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में रखा गया है। वहीं, बालिका छात्रावास को 'राप्ती' नाम दिया गया है। दोनों छात्रावासों में एमडी आयुर्वेद के विद्यार्थी निवास करेंगे।
मुख्यमंत्री ने दिए सुविधा सुधार के निर्देश
छात्रावास परिसर का भ्रमण करते हुए मुख्यमंत्री ने वहाँ उपलब्ध सुविधाओं का जायज़ा लिया। उन्होंने अधिकारियों को खिड़कियों पर जाली लगवाने, स्वच्छता की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने और मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने एमडी आयुर्वेद के विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ भी दीं।
ऑडिटोरियम निर्माण का निरीक्षण
छात्रावास उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने उन्हें निर्माण की अद्यतन प्रगति से अवगत कराया। योगी ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता न करते हुए कार्य को शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विश्वविद्यालय का पृष्ठभूमि और महत्व
गौरतलब है कि यह आयुष विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वाकांक्षी 'ड्रीम प्रोजेक्ट्स' में से एक है। इसका शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों हुआ था, जबकि 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका लोकार्पण किया। यह प्रदेश का पहला राज्य आयुष विश्वविद्यालय है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के. रामचंद्र रेड्डी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। आयुष विश्वविद्यालय के पूर्ण संचालन से प्रदेश में आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उच्च शिक्षा के अवसर और विस्तृत होंगे।