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GSLV मार्क 2 से सबसे भारी सैटेलाइट EOS-05 लॉन्च, ISRO ने 40% क्षमता वृद्धि का रिकॉर्ड बनाया

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GSLV मार्क 2 से सबसे भारी सैटेलाइट EOS-05 लॉन्च, ISRO ने 40% क्षमता वृद्धि का रिकॉर्ड बनाया

सारांश

GSLV मार्क 2 ने पहली बार अपनी श्रेणी का सबसे भारी सैटेलाइट EOS-05 लॉन्च कर इतिहास रचा। ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने 40% क्षमता वृद्धि को मील का पत्थर बताया। साथ ही गगनयान के पहले अनक्रूड मिशन और कुलशेखरपटनम पोर्ट के मार्च तक पूरा होने की उम्मीद जताई।

मुख्य बातें

ISRO ने 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 द्वारा EOS-05 को सफलतापूर्वक सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया।
यह GSLV मार्क 2 वाहन से अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट प्रक्षेपण है; क्षमता में लगभग 40% की वृद्धि हुई — शुरुआती 1,536 किलोग्राम से अधिक।
यह GSLV-F श्रृंखला का 19वाँ मिशन है, जिसमें 4 मीटर व्यास का ओजाइव कम्पोजिट पेलोड फेयरिंग इस्तेमाल किया गया।
नारायणन ने कहा कि भारत को अभी 56 सैटेलाइट से बढ़कर सैकड़ों सैटेलाइट की ज़रूरत है, इसलिए निजी क्षेत्र की भागीदारी ज़रूरी है।
कुलशेखरपटनम लॉन्च पोर्ट का निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होने की उम्मीद; गगनयान का पहला अनक्रूड मिशन इसी वर्ष प्रस्तावित।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के ज़रिए EOS-05 (अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट-05) को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया। ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने इसे जीएसएलवी मार्क 2 श्रृंखला का अब तक का सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण बताया और कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।

मिशन की उपलब्धि

डॉ. नारायणन ने बताया कि जब जीएसएलवी मार्क 2 वाहन की शुरुआत हुई थी, तब इसकी पेलोड क्षमता मात्र 1,536 किलोग्राम थी। वर्षों के तकनीकी सुधार के बाद आज इस क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। उन्होंने कहा, 'पहली बार जीएसएलवी मार्क 2 व्हीकल से सबसे भारी सैटेलाइट को लॉन्च किया गया है।' जीएसएलवी-एफ17 इस श्रृंखला का 19वाँ मिशन है और इसमें 4 मीटर व्यास वाले ओजाइव (कम्पोजिट) पेलोड फेयरिंग का उपयोग किया गया। EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

स्पेस इकोसिस्टम के निजीकरण पर ISRO का रुख

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर डॉ. नारायणन ने स्पष्ट किया कि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और इकोसिस्टम का विस्तार अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'ISRO अकेले देश की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता। अभी हमारे पास 56 सैटेलाइट हैं, लेकिन सैकड़ों सैटेलाइट की जरूरत है।' उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने स्पेस सेक्टर में सुधारों की घोषणा की है और ISRO इन गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कुलशेखरपटनम लॉन्च पोर्ट पर प्रगति

ISRO प्रमुख ने कुलशेखरपटनम में निर्माणाधीन नए लॉन्च पोर्ट की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि काम तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ रहा है और मार्च तक यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद है।

गगनयान मिशन का अद्यतन

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के बारे में डॉ. नारायणन ने बताया कि तैयारियाँ सुचारू रूप से जारी हैं और इस वर्ष पहला बिना क्रू वाला (अनक्रूड) मिशन भेजने का लक्ष्य है। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष यात्रा कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षण होगा।

आगे की राह

गौरतलब है कि ISRO लगातार अपने प्रक्षेपण वाहनों की क्षमता बढ़ाने में जुटा है — जीएसएलवी मार्क 2 की 40% क्षमता वृद्धि इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। कुलशेखरपटनम पोर्ट के चालू होने और गगनयान के पहले अनक्रूड मिशन के साथ, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम 2025-26 में एक नए चरण में प्रवेश करने की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि भारत GSLV मार्क 3 और निजी क्षेत्र के रॉकेटों के युग में इस पुराने वाहन पर कितना निर्भर रहेगा। ISRO प्रमुख का यह स्वीकार करना कि 56 सैटेलाइट पर्याप्त नहीं हैं और सैकड़ों की ज़रूरत है, निजीकरण की आलोचनाओं का सबसे सटीक जवाब है — लेकिन नियामक ढाँचे और गुणवत्ता नियंत्रण की चुनौतियाँ अभी भी अनुत्तरित हैं। गगनयान का पहला अनक्रूड मिशन और कुलशेखरपटनम पोर्ट — दोनों की समयसीमा पर नज़र रखना ज़रूरी होगा, क्योंकि ISRO के बड़े कार्यक्रमों में देरी की एक लंबी मिसाल रही है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GSLV-F17 मिशन क्या है और EOS-05 सैटेलाइट का उद्देश्य क्या है?
GSLV-F17, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) का 19वाँ मिशन है, जिसने EOS-05 (अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट-05) को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भारत की अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमता को मज़बूत करेगा।
GSLV मार्क 2 की क्षमता में कितनी वृद्धि हुई है?
ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, GSLV मार्क 2 की शुरुआती पेलोड क्षमता 1,536 किलोग्राम थी, जिसे अब लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा चुका है। EOS-05 इस वाहन द्वारा प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है।
ISRO स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी क्यों बढ़ा रहा है?
ISRO प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारत के पास अभी केवल 56 सैटेलाइट हैं, जबकि देश की ज़रूरतों के लिए सैकड़ों की आवश्यकता है। ISRO अकेले इस माँग को पूरा नहीं कर सकता, इसलिए सरकार ने स्पेस सेक्टर में सुधारों की घोषणा की है और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गगनयान मिशन का पहला अनक्रूड मिशन कब होगा?
ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, गगनयान का पहला बिना क्रू वाला (अनक्रूड) मिशन इसी वर्ष भेजने का लक्ष्य है। यह भारत के मानव अंतरिक्ष यात्रा कार्यक्रम की दिशा में एक अहम परीक्षण होगा।
कुलशेखरपटनम लॉन्च पोर्ट कब तक तैयार होगा?
ISRO प्रमुख ने बताया कि कुलशेखरपटनम में निर्माण कार्य तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ रहा है और मार्च तक यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद है। यह नया लॉन्च पोर्ट भारत की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता को और विस्तार देगा।
राष्ट्र प्रेस
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