4 सितंबर 2026
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GSLV-F17 से EOS-05 सैटेलाइट सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित, इसरो वैज्ञानिकों ने दी बधाई

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GSLV-F17 से EOS-05 सैटेलाइट सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित, इसरो वैज्ञानिकों ने दी बधाई

सारांश

इसरो ने 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 के ज़रिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया। मल्टीबैंड क्षमताओं वाला यह अनूठा अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह MCF के तहत 33वाँ सैटेलाइट है और इसरो की बढ़ती तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

मुख्य बातें

इसरो ने 4 सितंबर 2026 को जीएसएलवी-एफ 17 से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया।
ईओएस-05 मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताओं वाला अपनी श्रेणी का इकलौता अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
सभी छह लिक्विड स्टेज — पाँच रिस्टोरेबल और एक क्रायोजेनिक — ने पूरी सटीकता से कार्य किया।
आईएसटीआरएसी के सात ग्राउंड स्टेशनों ने पूरे मिशन के दौरान सैटेलाइट को ट्रैक किया।
यह मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (एमसीएफ) के तहत 33वाँ सैटेलाइट है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। ईओएस-05 एक जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो अपनी मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताओं के कारण अपनी श्रेणी में अनूठा है। मिशन की सफलता के बाद इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशकों ने टीम को बधाई दी।

मिशन की मुख्य उपलब्धि

स्पेसक्राफ्ट डायरेक्टर इम्तियाज अहमद ने बताया कि ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी करने वाला सैटेलाइट है और यह अपनी तरह का इकलौता उपग्रह है, जिसमें मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने जीएसएलवी द्वारा अपनी श्रेणी के सबसे भारी और बड़े सैटेलाइट को पूरी सटीकता से कक्षा में स्थापित करने पर संपूर्ण इसरो टीम को बधाई दी।

लिक्विड प्रोपल्शन टीम का योगदान

एलपीएससी के निदेशक जयन एन ने कहा कि जीएसएलवी ने एक और शानदार सफलता हासिल करके अपनी काबिलियत फिर से साबित कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी छह लिक्विड स्टेजपाँच रिस्टोरेबल स्टेज और एक क्रायोजेनिक स्टेज — ने एकदम सटीक तरीके से कार्य किया और सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में पहुँचाया। आईपीआरसी के निदेशक नारायणन अप्पू ने कहा कि इसरो की टीम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे बेहतरीन गुणवत्ता और सटीकता के साथ अंतरिक्ष मिशन पूरे करने में माहिर हैं।

ग्राउंड स्टेशन और ट्रैकिंग नेटवर्क

आईएसटीआरएसी के निदेशक राघवेंद्र एम आर ने बताया कि पूरे मिशन के दौरान उनके सात ग्राउंड स्टेशनों ने सैटेलाइट को ट्रैक किया और सभी स्टेशनों ने बेहतरीन डेटा उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट को बहुत सटीक ऑर्बिट में स्थापित किया गया है।

मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी का नियंत्रण

एमसीएफ के निदेशक पंकज दामोदर किल्लेदार ने पुष्टि की कि स्पेसक्राफ्ट अब कक्षा में है और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी के नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि यह एमसीएफ के तहत 33वाँ सैटेलाइट है।

टीमवर्क और समर्पण

वीएससी के निदेशक डॉ. राजीव ने कहा कि यह उपलब्धि इसरो की पूरी टीम के सदस्यों के टीमवर्क की वजह से संभव हो पाई। उन्होंने बताया कि इसरो के सभी केंद्रों ने एक परिवार की तरह काम किया और टीम के सदस्यों ने मिशन को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ दिन-रात ओवरटाइम काम किया। आगे के ऑपरेशन और ईओएस-05 की पूर्ण क्षमता के उपयोग की दिशा में इसरो की तैयारियाँ जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब ईओएस-05 के परिचालन प्रदर्शन की होगी। मल्टीबैंड अर्थ ऑब्जर्वेशन की क्षमता कृषि निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन तक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है, लेकिन इन संभावनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब डेटा का समय पर और व्यापक उपयोग सुनिश्चित हो। यह उपलब्धि इसरो के लिए गर्व का क्षण है, और यह दर्शाती है कि भारत वाणिज्यिक व रणनीतिक दोनों मोर्चों पर अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईओएस-05 सैटेलाइट क्या है?
ईओएस-05 इसरो का एक जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे 4 सितंबर 2026 को जीएसएलवी-एफ 17 के ज़रिए श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। यह मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताओं वाला अपनी श्रेणी का इकलौता उपग्रह है।
जीएसएलवी-एफ 17 मिशन में क्या खास रहा?
इस मिशन में जीएसएलवी ने अपनी श्रेणी के सबसे भारी और बड़े सैटेलाइट को सटीक कक्षा में स्थापित किया। सभी छह लिक्विड स्टेज — पाँच रिस्टोरेबल और एक क्रायोजेनिक — ने बिना किसी बाधा के कार्य किया।
ईओएस-05 किस कक्षा में स्थापित है और इसे कौन नियंत्रित करेगा?
ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया है और यह मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (एमसीएफ) के नियंत्रण में है। यह एमसीएफ के तहत 33वाँ सैटेलाइट है।
ईओएस-05 सैटेलाइट का उपयोग किस काम आएगा?
ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी करेगा। इसकी मल्टीबैंड क्षमताएं इसे कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम विज्ञान और भू-निगरानी जैसे क्षेत्रों में उपयोगी बनाती हैं।
इसरो के किन केंद्रों ने इस मिशन में भाग लिया?
इस मिशन में एलपीएससी, आईपीआरसी, आईएसटीआरएसी, एमसीएफ और वीएससी सहित इसरो के कई केंद्रों ने समन्वित भूमिका निभाई। आईएसटीआरएसी के सात ग्राउंड स्टेशनों ने पूरे मिशन के दौरान सैटेलाइट को ट्रैक किया।
राष्ट्र प्रेस
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