GSLV-F17 से EOS-05 सैटेलाइट सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित, इसरो वैज्ञानिकों ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। ईओएस-05 एक जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो अपनी मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताओं के कारण अपनी श्रेणी में अनूठा है। मिशन की सफलता के बाद इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशकों ने टीम को बधाई दी।
मिशन की मुख्य उपलब्धि
स्पेसक्राफ्ट डायरेक्टर इम्तियाज अहमद ने बताया कि ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी करने वाला सैटेलाइट है और यह अपनी तरह का इकलौता उपग्रह है, जिसमें मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने जीएसएलवी द्वारा अपनी श्रेणी के सबसे भारी और बड़े सैटेलाइट को पूरी सटीकता से कक्षा में स्थापित करने पर संपूर्ण इसरो टीम को बधाई दी।
लिक्विड प्रोपल्शन टीम का योगदान
एलपीएससी के निदेशक जयन एन ने कहा कि जीएसएलवी ने एक और शानदार सफलता हासिल करके अपनी काबिलियत फिर से साबित कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी छह लिक्विड स्टेज — पाँच रिस्टोरेबल स्टेज और एक क्रायोजेनिक स्टेज — ने एकदम सटीक तरीके से कार्य किया और सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में पहुँचाया। आईपीआरसी के निदेशक नारायणन अप्पू ने कहा कि इसरो की टीम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे बेहतरीन गुणवत्ता और सटीकता के साथ अंतरिक्ष मिशन पूरे करने में माहिर हैं।
ग्राउंड स्टेशन और ट्रैकिंग नेटवर्क
आईएसटीआरएसी के निदेशक राघवेंद्र एम आर ने बताया कि पूरे मिशन के दौरान उनके सात ग्राउंड स्टेशनों ने सैटेलाइट को ट्रैक किया और सभी स्टेशनों ने बेहतरीन डेटा उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट को बहुत सटीक ऑर्बिट में स्थापित किया गया है।
मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी का नियंत्रण
एमसीएफ के निदेशक पंकज दामोदर किल्लेदार ने पुष्टि की कि स्पेसक्राफ्ट अब कक्षा में है और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी के नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि यह एमसीएफ के तहत 33वाँ सैटेलाइट है।
टीमवर्क और समर्पण
वीएससी के निदेशक डॉ. राजीव ने कहा कि यह उपलब्धि इसरो की पूरी टीम के सदस्यों के टीमवर्क की वजह से संभव हो पाई। उन्होंने बताया कि इसरो के सभी केंद्रों ने एक परिवार की तरह काम किया और टीम के सदस्यों ने मिशन को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ दिन-रात ओवरटाइम काम किया। आगे के ऑपरेशन और ईओएस-05 की पूर्ण क्षमता के उपयोग की दिशा में इसरो की तैयारियाँ जारी हैं।