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कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर दौरे पर मिलेगी सशस्त्र सुरक्षा, 30 दिन के लिए निर्देश

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कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर दौरे पर मिलेगी सशस्त्र सुरक्षा, 30 दिन के लिए निर्देश

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट को दखल देना पड़ा — यह संकेत है कि पश्चिम बंगाल में एक निर्वाचित सांसद अपने ही क्षेत्र में सुरक्षित नहीं है। महुआ मोइत्रा पर अंडे-पत्थर फेंकने की घटनाओं के बाद जस्टिस भट्टाचार्य का 30 दिन का सुरक्षा आदेश राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 सितंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस को TMC सांसद महुआ मोइत्रा को सशस्त्र सुरक्षा देने का आदेश दिया।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि क्षेत्र-भ्रमण के दौरान कम-से-कम दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहें।
यह सुरक्षा आदेश 30 दिनों के लिए है; अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को।
मोइत्रा पर कथित तौर पर उनके कृष्णानगर क्षेत्र में अंडे, आलू और पत्थर फेंके गए थे।
हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान ही नादिया के चपड़ा में उनकी कार के पास काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगे।
मोइत्रा ने हमलों के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया; भाजपा ने आरोप नकारे।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा को उनके लोकसभा क्षेत्र के दौरों के दौरान पर्याप्त सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई जाए। यह आदेश उस घटना के बाद आया है जिसमें मोइत्रा पर उनके क्षेत्र-भ्रमण के दौरान कथित तौर पर अंडे, आलू और पत्थर फेंके गए थे।

न्यायालय का आदेश और शर्तें

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि जब भी महुआ मोइत्रा अपने कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र का दौरा करें, उनके साथ कम-से-कम दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सांसद पुलिस को पहले से अपने दौरे की तारीखें सूचित करेंगी ताकि सुरक्षा व्यवस्था समय पर की जा सके। यह सुरक्षा आदेश 30 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा और मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित है।

जस्टिस भट्टाचार्य ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सांसद पर हमला होना ठीक नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'राज्य को इस मामले से सख्ती से निपटना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सांसदों को उनके अपने इलाकों में काम करने में कोई बाधा न आए।'

सांसद की दलीलें और आरोप

कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र-भ्रमण के दौरान निरंतर विरोध-प्रदर्शन होते हैं, जो उनके अनुसार 'राजनीति से प्रेरित' गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि इस कारण वे एक सांसद के रूप में अपने मतदाताओं की सेवा करने में असमर्थ हो रही हैं।

उनके वकील कल्याण बनर्जी ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि जो सांसद हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अन्य दलों में शामिल हुए हैं, उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जबकि जो सांसद पार्टी में बने हुए हैं, उन पर हमले हो रहे हैं। मोइत्रा ने इन हमलों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया।

हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान चपड़ा में फिर विरोध

उल्लेखनीय यह है कि जिस समय कलकत्ता हाई कोर्ट यह आदेश सुना रहा था, उसी दौरान नादिया जिले के चपड़ा में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में शामिल होने के बाद जब मोइत्रा अपनी कार से निकल रही थीं, तो उनकी गाड़ी के इर्द-गिर्द काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगाए गए। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव फैल गया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस मौके पर पहुँची।

मीडिया से बात करते हुए मोइत्रा ने कहा, 'यह अफरातफरी पार्टी छोड़कर जाने वालों और भाजपा की मदद से फैलाई जा रही है।' उन्होंने TMC छोड़ने वाले नेताओं को 'बेईमान' करार दिया और पुलिस व प्रशासनिक दबाव से पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने का कड़ा विरोध किया।

भाजपा का पक्ष

दूसरी ओर, छपरा भाजपा आईटी सेल के इंचार्ज गोपाल दास और स्थानीय निवासी अंबरजीत रॉय ने आरोप लगाया कि चपड़ा इलाके में अशांति, ड्रग्स के कारोबार और जबरन वसूली की राजनीति के पीछे महुआ मोइत्रा का हाथ है। भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि काले झंडे दिखाने वाले आम नागरिक थे जो हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे और इस घटना में भाजपा की कोई भूमिका नहीं थी।

आगे क्या

मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को कलकत्ता हाई कोर्ट में होगी, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो TMC की आंतरिक दरारों को उजागर करता है। न्यायालय का यह आदेश सिर्फ एक सांसद की व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और राज्य की जवाबदेही का प्रश्न है। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी आरोपों के बीच, सच्चाई की तह तक जाने की जिम्मेदारी अब 1 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के लिए सुरक्षा का आदेश क्यों दिया?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने न्यायालय में बताया कि उनके कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र के दौरों के दौरान उन पर कथित तौर पर अंडे, आलू और पत्थर फेंके जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी, जिससे वे सांसद के रूप में अपने कर्तव्य नहीं निभा पा रही हैं।
महुआ मोइत्रा को कितने समय के लिए और किस शर्त पर सुरक्षा मिलेगी?
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य के आदेश के अनुसार यह सुरक्षा 30 दिनों के लिए है। महुआ मोइत्रा को पहले से पुलिस को अपने दौरे की तारीखें बतानी होंगी, जिसके आधार पर दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
चपड़ा में महुआ मोइत्रा के खिलाफ क्या हुआ?
1 सितंबर को नादिया जिले के चपड़ा में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन के बाद जब महुआ मोइत्रा अपनी कार से निकल रही थीं, तो उनकी गाड़ी के पास काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगाए गए। यह घटना उसी समय हुई जब कलकत्ता हाई कोर्ट उनके सुरक्षा मामले पर सुनवाई कर रहा था।
भाजपा ने इन विरोध प्रदर्शनों पर क्या कहा?
छपरा भाजपा आईटी सेल के इंचार्ज गोपाल दास और स्थानीय निवासी अंबरजीत रॉय ने भाजपा की संलिप्तता से इनकार किया। उनका दावा है कि काले झंडे दिखाने वाले आम नागरिक थे जो हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
महुआ मोइत्रा ने इन हमलों के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
महुआ मोइत्रा ने इन हमलों के लिए BJP कार्यकर्ताओं और TMC छोड़कर जाने वाले नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे 'राजनीति से प्रेरित' गड़बड़ी बताया और कहा कि पार्टी छोड़ने वाले और भाजपा मिलकर उनके क्षेत्र में अफरातफरी फैला रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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