2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर दौरे पर मिलेगी सशस्त्र सुरक्षा, 30 दिनों के लिए व्यवस्था

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर दौरे पर मिलेगी सशस्त्र सुरक्षा, 30 दिनों के लिए व्यवस्था

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में सुरक्षा देने का आदेश दिया — और ठीक उसी समय चपड़ा में उनकी कार को काले झंडों से घेर लिया गया। यह टकराव बंगाल की भीतरी राजनीति के गहरे दरारों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 सितंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस को महुआ मोइत्रा को दो सशस्त्र पुलिसकर्मियों की सुरक्षा देने का आदेश दिया।
सुरक्षा व्यवस्था 30 दिनों के लिए लागू होगी; अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा — सांसद पर हमला स्वीकार्य नहीं, राज्य को सख्ती से निपटना चाहिए।
उसी दिन नादिया के चपड़ा में मोइत्रा की कार के आसपास काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगे।
मोइत्रा ने विरोध के लिए BJP और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को जिम्मेदार ठहराया; BJP ने आरोप नकारे।
वकील कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि TMC छोड़ने वाले सांसदों को सुरक्षा मिल रही है, जबकि मोइत्रा पर हमले हो रहे हैं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 1 सितंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णानगर लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को उनके संसदीय क्षेत्र के दौरों के दौरान पर्याप्त सशस्त्र सुरक्षा प्रदान की जाए। यह आदेश उस घटना के बाद आया है जिसमें मोइत्रा पर उनके निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान कथित तौर पर अंडे, आलू और पत्थर फेंके गए थे।

न्यायालय का आदेश और शर्तें

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि जब भी महुआ मोइत्रा अपने लोकसभा क्षेत्र का दौरा करें, उनके साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं ताकि उन्हें किसी प्रकार की बाधा या परेशानी न हो। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सांसद को अपने दौरे की तारीखें पहले से पुलिस को सूचित करनी होंगी, जिससे सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। यह सुरक्षा 30 दिनों के लिए प्रभावी रहेगी और अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सांसद पर हमला होना ठीक नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'राज्य को इस मामले से सख्ती से निपटना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सांसदों को उनके अपने इलाकों में काम करने में कोई बाधा न आए।'

मोइत्रा की अदालत में दलीलें

उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब भी वह अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करती हैं, उनके आसपास विरोध प्रदर्शन होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'राजनीति से प्रेरित' गड़बड़ी है, जिसके चलते वह एक सांसद के रूप में आम जनता की सेवा करने में असमर्थ हो रही हैं।

उनके वकील कल्याण बनर्जी ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि हर दौरे पर उनकी मुवक्किल पर अंडे, आलू और पत्थर फेंके जाते हैं, जबकि एक निर्वाचित सांसद होने के बावजूद उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई। बनर्जी ने यह भी तर्क दिया कि 'जो सांसद हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हुए हैं, उन्हें सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन जो किसी दूसरी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं, उन पर हमले हो रहे हैं।'

उसी दिन चपड़ा में फिर विरोध

उल्लेखनीय है कि जिस दिन उच्च न्यायालय यह आदेश सुना रहा था, उसी दिन नादिया जिले के चपड़ा में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद जब मोइत्रा अपनी कार से निकल रही थीं, तो कथित तौर पर उनकी कार के आसपास काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगाए गए। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव फैल गया और स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा।

मोइत्रा ने इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'यह अफरातफरी पार्टी छोड़कर जाने वालों और भाजपा की मदद से फैलाई जा रही है।' उन्होंने TMC छोड़ने वाले नेताओं को 'बेईमान' करार दिया और पुलिस व प्रशासनिक दबाव के ज़रिए तृणमूल कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने का विरोध किया।

BJP का पक्ष और जवाबी आरोप

दूसरी ओर, चपड़ा BJP आईटी सेल के इंचार्ज गोपाल दास और स्थानीय निवासी अंबरजीत रॉय ने आरोप लगाया कि चपड़ा इलाके में अशांति, मादक पदार्थों के कारोबार और जबरन वसूली की राजनीति के पीछे स्वयं महुआ मोइत्रा का हाथ है। उनका यह भी दावा है कि हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान के विरोध में आम नागरिकों ने स्वतःस्फूर्त रूप से काले झंडे दिखाए और इस विरोध में BJP की कोई भूमिका नहीं थी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला केवल एक सांसद की व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है — यह पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के भीतर बढ़ते राजनीतिक विखंडन और जमीनी स्तर पर बढ़ती हिंसा का संकेत भी है। न्यायालय ने 1 अक्टूबर को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। तब तक पश्चिम बंगाल पुलिस पर यह दायित्व है कि वह उच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी वक्त चपड़ा में घटना दोहराई जा रही थी, जो राज्य पुलिस की तत्परता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। TMC के भीतर टूटन और पार्टी-विरोधी गतिविधियों की पृष्ठभूमि में यह मामला केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और सुरक्षा के व्यापक सवाल का है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के लिए क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि जब भी महुआ मोइत्रा अपने कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र का दौरा करें, उनके साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। यह व्यवस्था 30 दिनों के लिए है और अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
महुआ मोइत्रा ने अदालत का दरवाज़ा क्यों खटखटाया?
मोइत्रा ने अदालत में कहा कि उनके हर निर्वाचन क्षेत्र दौरे पर उन पर अंडे, आलू और पत्थर फेंके जाते हैं और उन्हें एक सांसद होने के बावजूद कोई सुरक्षा नहीं दी गई। उन्होंने इसे 'राजनीति से प्रेरित' गड़बड़ी बताया जो उनके संसदीय कार्य में बाधा डाल रही है।
चपड़ा में 1 सितंबर को क्या हुआ?
नादिया जिले के चपड़ा में TMC कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद जब मोइत्रा अपनी कार से निकल रही थीं, तो कथित तौर पर काले झंडे दिखाए गए और 'वापस जाओ' के नारे लगाए गए। इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ने पर पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा।
BJP और स्थानीय निवासियों ने इस विरोध पर क्या कहा?
चपड़ा BJP आईटी सेल के इंचार्ज गोपाल दास और स्थानीय निवासी अंबरजीत रॉय ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में BJP की कोई भूमिका नहीं थी और यह हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान के खिलाफ आम नागरिकों का स्वतःस्फूर्त विरोध था। उन्होंने क्षेत्र में अशांति के लिए मोइत्रा को ही जिम्मेदार ठहराया।
इस मामले में अगला कदम क्या होगा?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। तब तक पश्चिम बंगाल पुलिस को न्यायालय के आदेश के अनुसार मोइत्रा के दौरों पर दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात करने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले