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महुआ मोइत्रा गिरफ्तारी वारंट: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 31 अगस्त तक कार्रवाई पर रोक लगाई

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महुआ मोइत्रा गिरफ्तारी वारंट: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 31 अगस्त तक कार्रवाई पर रोक लगाई

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर 31 अगस्त तक रोक लगाई। हेट स्पीच और सेना पर विवादित टिप्पणियों के इस मामले में बचाव पक्ष ने अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी है — अगली सुनवाई 27 अगस्त को।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 24 अगस्त को महुआ मोइत्रा के खिलाफ कृष्णानगर अदालत के गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाई।
31 अगस्त 2025 तक मोइत्रा के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी, जिसमें शिकायतकर्ता का पक्ष सुना जाएगा।
मोइत्रा पर भारतीय सेना , गृह मंत्री अमित शाह और धार्मिक पोशाक पर विवादित टिप्पणियों के आरोप हैं।
बचाव पक्ष का तर्क — यह मामला MP-MLA कोर्ट में चलना चाहिए, सामान्य अदालत को अधिकार क्षेत्र नहीं।
वारंट 19 अगस्त को जारी हुआ था; मोइत्रा ने कई समन के बावजूद अदालत में उपस्थिति नहीं दी थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार, 24 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ नादिया जिले की कृष्णानगर अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर तत्काल रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 31 अगस्त 2025 तक मोइत्रा के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। यह वारंट हेट स्पीच मामले में बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में अनुपस्थित रहने के कारण 19 अगस्त को जारी किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस देबांग्शु बसाक और जस्टिस आर्यक दत्त की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी, जिसमें कृष्णानगर कोर्ट में चल रहे मामले के शिकायतकर्ता का पक्ष सुना जाएगा। बेंच ने 31 अगस्त तक मोइत्रा के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक बरकरार रखी।

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता शीर्षेंदु दास ने बताया कि मोइत्रा को कृष्णानगर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कई बार समन जारी किए गए, परंतु वे एक भी बार अदालत में नहीं आईं।

आरोपों की पृष्ठभूमि

कृष्णानगर के एक निवासी ने अदालत में याचिका दायर कर मोइत्रा पर भारतीय सेना तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध विवादित और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। इसके अतिरिक्त, तुलसी माला, बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं पर की गई कथित टिप्पणियों को लेकर भी विवाद उत्पन्न हुआ था।

इन आरोपों के आधार पर मोइत्रा के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिनमें महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना, विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता भड़काना, धार्मिक भावनाएँ आहत करना, डराना-धमकाना और नफरत फैलाने वाले भाषण देना जैसी धाराएँ शामिल हैं।

बचाव पक्ष की दलीलें

मोइत्रा के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि 18 अगस्त को निचली अदालत में सुनवाई निर्धारित थी और उस दिन मोइत्रा उपस्थित भी हुई थीं, किंतु बार एसोसिएशन की हड़ताल के चलते सुनवाई संभव नहीं हो सकी। इसके बाद 19 अगस्त को मामला पुनः सूचीबद्ध किया गया और उसी दिन उनका पक्ष सुने बिना गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कृष्णानगर की सामान्य अदालत को इस मामले में सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामले विशेष रूप से गठित MP-MLA कोर्ट में चलने चाहिए।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच 27 अगस्त को शिकायतकर्ता का पक्ष सुनेगी और मामले की आगे की दिशा तय करेगी। तब तक मोइत्रा को 31 अगस्त तक अंतरिम राहत मिली हुई है। यह मामला न केवल मोइत्रा की कानूनी स्थिति, बल्कि सांसदों के मुकदमों में उचित न्यायिक मंच के प्रश्न पर भी एक महत्त्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्या एक निर्वाचित सांसद बार-बार समन के बावजूद अदालत से अनुपस्थित रह सकती हैं; और दूसरा, क्या सामान्य जिला अदालत को सांसदों के मामलों में अधिकार क्षेत्र है। MP-MLA कोर्ट का तर्क यदि हाई कोर्ट स्वीकार करता है, तो यह भविष्य के मामलों में एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर बनेगा। साथ ही, हेट स्पीच की परिभाषा और उसकी सीमाओं पर यह मुकदमा एक व्यापक बहस को भी जन्म देता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के गिरफ्तारी वारंट पर क्यों रोक लगाई?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 24 अगस्त को महुआ मोइत्रा के वकील की दलीलें सुनने के बाद गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि 18 अगस्त को बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी और 19 अगस्त को उनका पक्ष सुने बिना ही वारंट जारी कर दिया गया।
महुआ मोइत्रा पर क्या-क्या आरोप हैं?
मोइत्रा पर भारतीय सेना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध विवादित टिप्पणी करने, तथा तुलसी माला, बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान देने के आरोप हैं। इनके आधार पर BNSS और BNS की धाराओं के तहत हेट स्पीच, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने के मामले दर्ज हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित की है, जिसमें शिकायतकर्ता का पक्ष सुना जाएगा। 31 अगस्त तक मोइत्रा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती।
बचाव पक्ष ने अधिकार क्षेत्र को लेकर क्या तर्क दिया?
मोइत्रा के वकील ने तर्क दिया कि कृष्णानगर की सामान्य जिला अदालत को सांसदों से जुड़े मामलों में सुनवाई का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार यह मामला विशेष रूप से सांसदों और विधायकों के लिए गठित MP-MLA कोर्ट में चलना चाहिए।
गिरफ्तारी वारंट कब और क्यों जारी किया गया था?
कृष्णानगर अदालत ने 19 अगस्त को महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, बार-बार समन जारी होने के बावजूद मोइत्रा एक भी बार अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुईं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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