इंफाल जून 2029 तक राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेगा, पूर्वोत्तर की पाँचवीं राजधानी बनेगी
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर की राजधानी इंफाल जून 2029 तक भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ने वाला पूर्वोत्तर भारत का पाँचवाँ राजधानी शहर बन जाएगा। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ₹22,000 करोड़ की लागत से निर्मित 111 किलोमीटर लंबी जिरीबाम-इंफाल नई रेलवे लाइन परियोजना के इस समयसीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र की सबसे इंजीनियरिंग-गहन रेल परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
परियोजना की पृष्ठभूमि
जिरीबाम-इंफाल ब्रॉडगेज रेलवे परियोजना की नींव वर्ष 2008 में रखी गई थी और इसके रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया। जिरीबाम मणिपुर में स्थित है और दक्षिणी असम के कछार जिले की सीमा से लगा है, जो इसे उत्तर-पूर्व के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाता है। यह रेलमार्ग अत्यंत पहाड़ी और दुर्गम इलाकों से गुजरता है।
इंजीनियरिंग का अद्वितीय कारनामा
इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका विशाल सुरंग नेटवर्क है — पूरी लाइन पर कुल 54 सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई लगभग 66.47 किलोमीटर होगी। इनमें टनल नंबर 12 सबसे विशेष है, जिसकी लंबाई 11.55 किलोमीटर होगी — यह जम्मू-कश्मीर की बनिहाल-काजीगुंड रेल लाइन पर स्थित पीर पंजाल सुरंग को पीछे छोड़ते हुए भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग बनेगी।
इसके अलावा, नोनी जिले में निर्माणाधीन पुल संख्या 164 में 141 मीटर ऊँचा रेलवे स्तंभ (पियर) बनाया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पियर होगा और अपने अंतिम चरण में है। परियोजना में कुल 15 बड़े और 116 छोटे पुल भी शामिल हैं।
निरीक्षण और प्रगति समीक्षा
हाल ही में NFR (निर्माण) के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने परियोजना के जिरीबाम-खोंगसांग, खोंगसांग-आवांगखुल और आवांगखुल-इंफाल तीनों खंडों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने टनल नंबर 28 और टनल नंबर 12 की प्रगति का विशेष जायजा लिया और अधिकारियों को निर्माण कार्यों की निरंतर निगरानी तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) अक्टूबर 2026 में खोंगसांग-आवांगखुल खंड का निरीक्षण कर सकते हैं।
स्टेशन और कनेक्टिविटी
जिरीबाम-इंफाल रेल लाइन पर कुल 11 रेलवे स्टेशन होंगे — जिरीबाम, वांगाइचुंगपाओ, कंबिरोन हॉल्ट, थिंगौ, खोंगसांग, आवांगखुल, नोनी, तुपुल, हाओचोंग रोड हॉल्ट और इंफाल। गौरतलब है कि वर्तमान में असम की राजधानी दिसपुर (गुवाहाटी), त्रिपुरा की राजधानी अगरतला, अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर और मिजोरम की राजधानी आइजोल पहले ही भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को आइजोल में बैराबी-सैरांग रेलखंड (51.38 किलोमीटर) का उद्घाटन किया था।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पहले कहा था कि उनकी सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर संभव सहयोग देगी। अधिकारियों के अनुसार, रेल संपर्क स्थापित होने से यात्री परिवहन सुगम होगा, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और मणिपुर के आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। यह परियोजना पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगी।