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इंफाल जून 2029 तक राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेगा, पूर्वोत्तर की पाँचवीं राजधानी बनेगी

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इंफाल जून 2029 तक राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेगा, पूर्वोत्तर की पाँचवीं राजधानी बनेगी

सारांश

जून 2029 तक इंफाल पूर्वोत्तर की पाँचवीं राजधानी बनेगी जो राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेगी। ₹22,000 करोड़ की इस परियोजना में भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग (11.55 किमी) और दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पियर (141 मीटर) शामिल हैं — यह सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, इंजीनियरिंग इतिहास है।

मुख्य बातें

इंफाल जून 2029 तक राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ेगा — पूर्वोत्तर की पाँचवीं राजधानी।
जिरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन 111 किलोमीटर लंबी है और इसकी लागत ₹22,000 करोड़ है।
परियोजना में 54 सुरंगें (कुल 66.47 किमी ); टनल नंबर 12 ( 11.55 किमी ) भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग होगी।
नोनी जिले में निर्माणाधीन पुल में 141 मीटर ऊँचा रेलवे पियर — विश्व का सबसे ऊँचा ।
NFR महाप्रबंधक आशीष बंसल ने हाल ही में तीनों खंडों का निरीक्षण किया; CRS अक्टूबर 2026 में खोंगसांग-आवांगखुल खंड का निरीक्षण कर सकते हैं।
पूरी लाइन पर 11 रेलवे स्टेशन ; परियोजना 2008 में शुरू हुई और इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त है।

मणिपुर की राजधानी इंफाल जून 2029 तक भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ने वाला पूर्वोत्तर भारत का पाँचवाँ राजधानी शहर बन जाएगा। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ₹22,000 करोड़ की लागत से निर्मित 111 किलोमीटर लंबी जिरीबाम-इंफाल नई रेलवे लाइन परियोजना के इस समयसीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र की सबसे इंजीनियरिंग-गहन रेल परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

जिरीबाम-इंफाल ब्रॉडगेज रेलवे परियोजना की नींव वर्ष 2008 में रखी गई थी और इसके रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया। जिरीबाम मणिपुर में स्थित है और दक्षिणी असम के कछार जिले की सीमा से लगा है, जो इसे उत्तर-पूर्व के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाता है। यह रेलमार्ग अत्यंत पहाड़ी और दुर्गम इलाकों से गुजरता है।

इंजीनियरिंग का अद्वितीय कारनामा

इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका विशाल सुरंग नेटवर्क है — पूरी लाइन पर कुल 54 सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई लगभग 66.47 किलोमीटर होगी। इनमें टनल नंबर 12 सबसे विशेष है, जिसकी लंबाई 11.55 किलोमीटर होगी — यह जम्मू-कश्मीर की बनिहाल-काजीगुंड रेल लाइन पर स्थित पीर पंजाल सुरंग को पीछे छोड़ते हुए भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग बनेगी।

इसके अलावा, नोनी जिले में निर्माणाधीन पुल संख्या 164 में 141 मीटर ऊँचा रेलवे स्तंभ (पियर) बनाया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पियर होगा और अपने अंतिम चरण में है। परियोजना में कुल 15 बड़े और 116 छोटे पुल भी शामिल हैं।

निरीक्षण और प्रगति समीक्षा

हाल ही में NFR (निर्माण) के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने परियोजना के जिरीबाम-खोंगसांग, खोंगसांग-आवांगखुल और आवांगखुल-इंफाल तीनों खंडों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने टनल नंबर 28 और टनल नंबर 12 की प्रगति का विशेष जायजा लिया और अधिकारियों को निर्माण कार्यों की निरंतर निगरानी तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) अक्टूबर 2026 में खोंगसांग-आवांगखुल खंड का निरीक्षण कर सकते हैं।

स्टेशन और कनेक्टिविटी

जिरीबाम-इंफाल रेल लाइन पर कुल 11 रेलवे स्टेशन होंगे — जिरीबाम, वांगाइचुंगपाओ, कंबिरोन हॉल्ट, थिंगौ, खोंगसांग, आवांगखुल, नोनी, तुपुल, हाओचोंग रोड हॉल्ट और इंफाल। गौरतलब है कि वर्तमान में असम की राजधानी दिसपुर (गुवाहाटी), त्रिपुरा की राजधानी अगरतला, अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर और मिजोरम की राजधानी आइजोल पहले ही भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को आइजोल में बैराबी-सैरांग रेलखंड (51.38 किलोमीटर) का उद्घाटन किया था।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पहले कहा था कि उनकी सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर संभव सहयोग देगी। अधिकारियों के अनुसार, रेल संपर्क स्थापित होने से यात्री परिवहन सुगम होगा, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और मणिपुर के आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। यह परियोजना पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भूगर्भीय चुनौतियाँ और फंडिंग की रुकावटें बार-बार समयसीमा खिसकाती रही हैं। असली कसौटी यह है कि CRS निरीक्षण के बाद खंड-दर-खंड चालू करने की रफ्तार क्या रहती है — क्योंकि पूरी लाइन एक साथ नहीं, बल्कि चरणों में खुलेगी। मणिपुर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और भूस्खलन-प्रवण इलाके भी निर्माण की गति पर असर डाल सकते हैं, जिसका मूल्यांकन सरकारी बयानों में प्रायः नहीं होता।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंफाल को रेलवे नेटवर्क से कब तक जोड़ा जाएगा?
अधिकारियों के अनुसार जून 2029 तक जिरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन के पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद इंफाल राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा। यह पूर्वोत्तर भारत की पाँचवीं राजधानी होगी जो इस नेटवर्क का हिस्सा बनेगी।
जिरीबाम-इंफाल रेलवे परियोजना की लागत और लंबाई कितनी है?
यह परियोजना 111 किलोमीटर लंबी है और इसकी अनुमानित लागत ₹22,000 करोड़ है। इसे 2008 में शुरू किया गया था और इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त है।
इस परियोजना में भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग कौन सी है?
टनल नंबर 12 की लंबाई 11.55 किलोमीटर होगी, जो इसे भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग बनाएगी — जम्मू-कश्मीर की पीर पंजाल सुरंग से भी लंबी। पूरी परियोजना में 54 सुरंगें हैं जिनकी कुल लंबाई लगभग 66.47 किलोमीटर है।
नोनी जिले में बन रहा रेलवे पुल इतना खास क्यों है?
नोनी जिले में पुल संख्या 164 में 141 मीटर ऊँचा रेलवे स्तंभ (पियर) बनाया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पियर होगा। इसका निर्माण अंतिम चरण में है।
पूर्वोत्तर की कौन-कौन सी राजधानियाँ पहले से रेल नेटवर्क से जुड़ी हैं?
असम की राजधानी दिसपुर (गुवाहाटी), त्रिपुरा की राजधानी अगरतला, अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर और मिजोरम की राजधानी आइजोल पहले से भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ी हैं। आइजोल को 13 सितंबर 2025 को बैराबी-सैरांग रेलखंड के उद्घाटन से जोड़ा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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