जयशंकर-पुतिन मुलाकात पर आनंद दुबे बोले — भारत-रूस रिश्ते मजबूत, मराठी विवाद पर भी दिया बयान
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने 25 अगस्त 2026 को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई मुलाकात का स्वागत किया और कहा कि भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंध इस कठिन वैश्विक दौर में और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने साथ ही मराठी भाषा विवाद, पंजाब चुनाव और शिक्षा नीति पर भी अपनी राय रखी।
जयशंकर-पुतिन मुलाकात पर दुबे की प्रतिक्रिया
दुबे ने कहा, 'जयशंकर रूस में पुतिन से मिले हैं। रूस के साथ हमारे बहुत पुराने संबंध हैं — सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते। हमें लगता है कि जब विदेश मंत्री किसी देश के प्रमुख से मिलते हैं तो उससे देश के लिए निश्चित रूप से कोई अच्छी खबर आनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में युद्ध का माहौल है, ऐसे में किसी बड़े देश के साथ मित्रवत संबंध भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाते हैं।
दुबे ने परमाणु समझौते, हथियार समझौते और व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सब को बल मिलता है। उनका मानना है कि सरकार की नीति देश हित में होनी चाहिए और यदि प्रधानमंत्री तथा रूसी राष्ट्रपति के बीच रिश्ते प्रगाढ़ होते हैं तो इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलता है।
सरकार की आलोचना पर संयमित रुख
दुबे ने विपक्षी नेता होते हुए भी कहा कि सरकार की आलोचना हर मुद्दे पर नहीं होनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'कहीं-कहीं देश के साथ खड़े होकर सरकार को समर्थन देना पड़ता है। मैं सबसे पहले देश के साथ हूं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष प्रायः विदेश नीति के मुद्दों पर सत्तारूढ़ दल से असहमति जताता रहा है।
पंजाब चुनाव पर भाजपा को चुनौती
पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर दुबे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा 117 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है, तो उसे पहले अपने प्रदेश-स्तरीय संगठन, कैडर और जनप्रतिनिधियों की ताकत का आकलन करना चाहिए। दुबे ने कहा, 'यह राज्यसभा का चुनाव नहीं है कि दूसरे दल के सांसद को पार्टी में मिला लें। विधानसभा चुनाव में लड़ना पड़ता है।' उनका मत था कि पंजाब में भाजपा का कैडर कमजोर है और वह चाहे 117 सीटों पर लड़े या 17 पर, परिणाम सीमित ही रहेगा।
मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर संयम
मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पाँच विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव पर रोक लगाने के मामले पर दुबे ने कहा कि न्यायपालिका के अधीन चल रहे मामलों पर राजनेताओं को अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वहाँ नई सरकार बनी है और वह अपना काम कर रही है।
मराठी भाषा विवाद और समाजवादी पार्टी पर प्रतिक्रिया
मराठी भाषा विवाद पर दुबे ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाला हर व्यक्ति मराठी है — मराठी बोलता है, समझता है और मराठी संस्कृति का पालन करता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को यह सलाह दी कि दूसरे राज्य में बैठकर महाराष्ट्र के आंतरिक मामलों पर बयानबाजी करने की जरूरत नहीं है। दुबे ने कहा कि महाराष्ट्र में 40 लाख से अधिक हिंदी भाषी निवास करते हैं और मराठी व हिंदी के बीच कोई वास्तविक विवाद नहीं है।
उन्होंने कहा, 'भाषा संवाद का विषय होती है, न कि विवाद का।' उनका सुझाव था कि समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
सीजेपी और नई शिक्षा नीति पर बयान
सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के आंदोलन को लेकर दुबे ने कहा कि यह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और इसके प्रभाव की सीमाएँ सबको पता हैं। उन्होंने कहा कि एक आंदोलन से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा और बार-बार के आंदोलनों से इस्तीफों की श्रृंखला नहीं बनेगी। दुबे का जोर इस बात पर था कि नई शिक्षा नीति में 'सबका साथ-सबका विकास' का फॉर्मूला लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्दों की लड़ाई लड़नी है, न कि संगठनों को अनावश्यक महत्व देना है।