मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 74 किमी में पियर तैयार, 7 में से 3 पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा — वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के ठाणे और पालघर जिलों में जारी निर्माण कार्य की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि 74 किलोमीटर क्षेत्र में पियर (स्तंभ) निर्माण पूरा हो चुका है और वायाडक्ट गर्डर स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि मार्ग में बनाई जा रही 7 पर्वतीय सुरंगों में से 3 में ब्रेकथ्रू हासिल हो चुका है।
परियोजना का दायरा और मौजूदा स्थिति
यह एलिवेटेड कॉरिडोर ठाणे जिले के शिलफाटा से लेकर महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर स्थित जरोली गांव तक 135.45 किलोमीटर में फैला है। परियोजना के अंतर्गत कुल 124.027 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। 100 किलोमीटर से अधिक लंबाई में पियर निर्माण कार्य सक्रिय रूप से जारी है।
निर्माण को गति देने के लिए महाराष्ट्र में 9 कास्टिंग यार्ड, 7 फुल-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री और 8 स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री एक साथ काम कर रही हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग से परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुरंगों और नदी पुलों की प्रगति
बुलेट ट्रेन मार्ग की 7 पर्वतीय सुरंगों में से 3 में ब्रेकथ्रू — यानी दोनों सिरों को जोड़ने का काम — पूरा हो चुका है। इन सुरंगों में अब ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग और टनल लाइनिंग जैसे आंतरिक कार्य तेज़ी से चल रहे हैं।
हाई-स्पीड कॉरिडोर में कई प्रमुख नदी पुल भी बनाए जा रहे हैं — उल्हास नदी पर 460 मीटर, वैतरणा नदी पर 2.32 किलोमीटर और जगानी नदी पर 510 मीटर लंबा पुल। कुल 36 पुल और क्रॉसिंग बनाए जा रहे हैं, जिनमें 12 स्टील ब्रिज भी शामिल हैं, जो प्रमुख रेलवे लाइनों, मुंबई-नासिक हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों को पार करेंगे।
तीन आधुनिक स्टेशन और पर्यावरण संरक्षण
महाराष्ट्र में ठाणे, विरार और बोइसर में तीन एलिवेटेड बुलेट ट्रेन स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें ठाणे स्टेशन विशेष रूप से उल्लेखनीय है — इसका कॉनकोर्स स्तर प्राकृतिक भूमि से लगभग 12 मीटर ऊपर बनाया जा रहा है ताकि क्षेत्र के संवेदनशील मैंग्रोव वन सुरक्षित रहें और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों पर पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मैंग्रोव संरक्षण को डिज़ाइन में शामिल करना परियोजना की एक विशेष इंजीनियरिंग चुनौती रही है।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना भारतीय रेलवे इतिहास की सबसे जटिल और उन्नत इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है। गौरतलब है कि इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा जहाँ अत्याधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क उपलब्ध है।
परियोजना से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी के साथ-साथ मुंबई और अहमदाबाद के बीच आर्थिक गतिविधियों, निवेश और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर विविध भौगोलिक परिस्थितियों — पहाड़, नदियाँ और तटीय क्षेत्र — को जोड़ते हुए भारत के पहले हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की नींव रखेगा।