जसोला नाले में मिला 15 वर्षीय मिथुन का शव, चार दिन के तलाशी अभियान का दुखद अंत
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसोला गाँव में एक खुले नाले में गिरने के बाद चार दिनों से लापता 8वीं कक्षा के छात्र 15 वर्षीय मिथुन का शव मंगलवार, 26 अगस्त को बरामद कर लिया गया। दिल्ली फायर सर्विस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और गोताखोरों की टीमों की अथक कोशिशों के बाद शव मिला और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
कैसे हुई घटना
घटना शनिवार, 23 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे की है, जब मिथुन अपने घर के पास पतंग उठाने की कोशिश करते समय नाले में गिर गया। परिवार को तत्काल आशंका हो गई कि वह नाले के बहाव में बह गया है। मिथुन का परिवार मूलतः उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और जसोला इलाके में दिहाड़ी मज़दूरी कर गुज़र-बसर करता है।
बहु-एजेंसी तलाशी अभियान
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। गोताखोरों ने नाले और उससे जुड़े क्षेत्रों में व्यापक तलाशी ली। लगातार चार दिनों की कोशिशों के बावजूद मिथुन का पता नहीं चल सका, और अंततः मंगलवार को उसका शव बरामद हुआ।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मिथुन के पिता को हाथ में लाठी लेकर नाले के अंदर उतरकर खुद अपने बेटे को ढूंढते देखा गया। इस दृश्य ने लोगों में गहरा आक्रोश पैदा किया और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े किए।
सरकार और निगम की कार्रवाई
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर गहरा दुख और कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि एक घंटे के भीतर नाले के अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारी की जानकारी दें तथा किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करें। इसके बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने ड्यूटी में कथित लापरवाही के लिए साउथ ईस्ट (सेंट्रल) जोन के एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया। नगर निकाय ने पुष्टि की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
खुले नालों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना राजधानी में खुले और बिना सुरक्षा घेरे वाले नालों की दुर्दशा को एक बार फिर उजागर करती है। गौरतलब है कि दिल्ली में मानसून के दौरान नालों में गिरने की घटनाएँ हर साल सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब भी नदारद है। मिथुन के परिवार की त्रासदी उन हज़ारों प्रवासी परिवारों की आवाज़ है जो शहर के असुरक्षित बुनियादी ढाँचे के बीच जीवन गुज़ारते हैं। आने वाले दिनों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अनुशासनात्मक जाँच के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे।