जालोर फैमिली कोर्ट ने भाजपा पूर्व विधायक अमृता मेघवाल का एकतरफा तलाक निरस्त किया, मामला फिर से खुला
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के जालोर फैमिली कोर्ट ने भाजपा की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल के खिलाफ पारित करीब तीन साल पुरानी एकतरफा तलाक डिक्री को 25 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि अमृता मेघवाल को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नोटिस की तामील नहीं हुई थी, जिससे उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिल सका।
मुख्य घटनाक्रम
फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी (आरजेएस) अमर वर्मा ने अमृता मेघवाल की ओर से दायर आवेदन स्वीकार करते हुए 4 मई 2023 की एकतरफा कार्यवाही और 7 जून 2023 को पारित तलाक की डिक्री — दोनों को निरस्त कर दिया। अदालत ने मामले को पुनः बहाल कर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के निर्देश दिए हैं।
बाबूलाल मेघवाल — भाजपा एससी मोर्चा के जालोर जिलाध्यक्ष — ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत 22 सितंबर 2022 को विवाह विच्छेद की याचिका दायर की थी। अदालत की ओर से नोटिस जयपुर के पुराने पते पर भेजे गए, परंतु मकान लंबे समय से बंद होने के कारण ये नोटिस बार-बार वापस लौट आए। इसके बाद समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशित कर तामील की कार्रवाई की गई।
नोटिस की तामील पर अदालत का रुख
रिकॉर्ड की जांच के बाद कोर्ट ने पाया कि जिस पते पर नोटिस भेजे गए, वहाँ मकान बंद था और रजिस्टर्ड डाक भी इसी टिप्पणी के साथ लौट आई थी। ऐसी परिस्थिति में केवल समाचार पत्र में प्रकाशित नोटिस को पर्याप्त तामील नहीं माना जा सकता — यह अदालत का स्पष्ट मत था।
अमृता मेघवाल ने अदालत में बताया कि वह उस पते पर नहीं रहती थीं और उन्हें तलाक की कार्यवाही की कोई जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलने पर उन्होंने 13 जून 2023 को मामले की नकल माँगी और 5 जुलाई 2023 को एकतरफा डिक्री निरस्त करने का आवेदन दायर किया।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
अमृता मेघवाल ने कहा कि अदालत के सामने गलत तरीके से तथ्य प्रस्तुत किए गए थे, जिसके आधार पर एकतरफा फैसला हुआ। उन्होंने कहा, "अब कोर्ट ने उनकी बात सुनते हुए राहत दी है।"
वहीं बाबूलाल मेघवाल ने इसे अंतिम फैसला मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और आगे की सुनवाई में अमृता को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा, "भले ही अमृता सोने की मणि हो, लेकिन अब मुझे यह मणि नहीं चाहिए।"
विवाह और अलगाव की पृष्ठभूमि
अमृता मेघवाल और बाबूलाल मेघवाल का विवाह 21 अप्रैल 2008 को हुआ था। अमृता पाली जिले के चाणोद की रहने वाली हैं, जबकि बाबूलाल जालोर जिले के नोरवा गाँव के निवासी हैं। 21 जनवरी 2019 को दोनों के बीच विवाद के बाद वे अलग रहने लगे। इसके करीब तीन साल बाद बाबूलाल ने फैमिली कोर्ट में तलाक याचिका दायर की थी।
गौरतलब है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक सार्वजनिक जीवन से जुड़ी नेत्री के तलाक की कार्यवाही उनकी जानकारी के बिना ही पूरी कर दी गई। अमृता मेघवाल की ओर से अधिवक्ता संजय बोराणा और बाबूलाल मेघवाल की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार दवे ने पैरवी की।
आगे क्या होगा
डिक्री निरस्त होने के बाद अब तलाक का मामला नए सिरे से सुना जाएगा और दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद है, बल्कि नोटिस तामील की कानूनी प्रक्रिया और एकतरफा डिक्री की सीमाओं पर भी महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।