महिला आरक्षण बिल पर बड़ा बयान: मेघवाल बोले — विपक्ष की साजिश से अटका महिलाओं का हक

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महिला आरक्षण बिल पर बड़ा बयान: मेघवाल बोले — विपक्ष की साजिश से अटका महिलाओं का हक

सारांश

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनकी साजिश के कारण 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल लागू नहीं हो सका। 1927 से चली आ रही मांग को विपक्ष ने जानबूझकर अवरुद्ध किया — यह महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा सवाल है।

Key Takeaways

  • केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में 26 अप्रैल को विपक्ष पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाया।
  • महिला आरक्षण बिल 2023 संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन परिसीमन की शर्त के कारण अब तक लागू नहीं हो सका।
  • 1927 से भारतीय महिलाएं लोकसभा और विधानसभाओं में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करती आ रही हैं।
  • समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग रखी, जिसे मेघवाल ने संविधान विरुद्ध बताकर अस्वीकार किया।
  • वर्तमान 18वीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मात्र 74 (13.6%25) है, जो देश की आधी आबादी के अनुपात में बेहद कम है।
  • पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार इस बिल के फायदे गिनाए, लेकिन विपक्षी सांसद इस पर ध्यान नहीं दे रहे — मेघवाल।

बीकानेर, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष की सुनियोजित साजिश के कारण ही यह ऐतिहासिक विधेयक अब तक लागू नहीं हो सका। बीकानेर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि विपक्ष के इस रवैये से महिलाओं में भारी आक्रोश है, जिसका परिणाम जल्द सामने आएगा।

1927 से चली आ रही मांग, विपक्ष ने नहीं दिया ध्यान

मेघवाल ने कहा कि सन् 1927 से भारतीय महिलाएं लोकसभा और विधानसभाओं में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करती आ रही हैं। दशकों तक विपक्षी दलों ने इस मांग को अनदेखा किया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में ठोस कदम उठाया, तो वही विपक्ष अचानक इसका विरोध करने लगा — यह विरोधाभास अपने आप में सब कुछ बयां करता है।

गौरतलब है कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इसके बावजूद इसे अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया जा सका है। मेघवाल ने कहा कि विपक्ष एक के बाद एक अवरोध खड़े करके इस बिल को रोक रहा है।

विपक्ष के अलग-अलग तर्क — सरकार का जवाब

समाजवादी पार्टी ने मांग रखी कि मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण दिया जाए। मेघवाल ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसी तरह कुछ दलों ने ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग उठाई, जिस पर उन्होंने कहा कि यह 2023 के बिल का विषय नहीं था और इस पर अलग से चर्चा की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि हर विपक्षी दल अपना अलग तर्क देकर इस बिल को लटकाने की कोशिश कर रहा है। देशहित में सभी को एकजुट होकर जनता के लिए काम करना चाहिए।

मोदी-शाह ने बताए फायदे, विपक्ष फिर भी अनसुना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार इस विधेयक के महत्व और लाभों को जनता के सामने रखा है। मेघवाल ने अफसोस जताते हुए कहा कि इसके बावजूद विपक्षी सांसद इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहे, जो देश के लिए हितकर नहीं है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखना उचित नहीं है। संसद में जनप्रतिनिधियों को भेजा ही इसलिए जाता है कि वे जनता के हित में निर्णय लें।

ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक निहितार्थ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब 2024 के लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही थी। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान 18वीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मात्र 74 है, जो कुल सदस्यों का लगभग 13.6 प्रतिशत है — जबकि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं। यह असंतुलन ही इस विधेयक की जरूरत को रेखांकित करता है।

आलोचकों का कहना है कि जनगणना और परिसीमन की शर्त को बिल में जोड़ने से इसके क्रियान्वयन में और देरी हो सकती है — यह वह पहलू है जिस पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर विचार करना होगा।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिसीमन प्रक्रिया कब तक पूरी होती है और सरकार इस विधेयक को लागू करने की दिशा में कोई ठोस समयसीमा घोषित करती है या नहीं।

Point of View

लेकिन जब असली अवसर आता है तो संकीर्ण राजनीतिक हित आड़े आ जाते हैं। 2023 में सर्वसम्मति से पारित बिल का अब तक लागू न होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या परिसीमन की शर्त जानबूझकर लगाई गई? मेघवाल का विपक्ष पर हमला राजनीतिक रूप से समझ में आता है, लेकिन जवाबदेही सत्तापक्ष पर भी बनती है — आखिरकार बिल पास करना और उसे लागू करना दोनों अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण बिल 2023 क्या है और यह अब तक लागू क्यों नहीं हुआ?
महिला आरक्षण बिल 2023 लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33%25 सीटें आरक्षित करने का कानून है, जो संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई है, जो अभी तक पूरी नहीं हुई।
अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विपक्ष की सुनियोजित साजिश के कारण महिला आरक्षण बिल लागू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि हर विपक्षी दल अलग-अलग तर्क देकर इस विधेयक को अवरुद्ध कर रहा है।
समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल पर क्या मांग रखी?
समाजवादी पार्टी ने मांग की कि मुस्लिम महिलाओं को इस आरक्षण में अलग से हिस्सा दिया जाए। मेघवाल ने इसे संविधान विरुद्ध बताते हुए खारिज किया, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
1927 से महिला आरक्षण की मांग का क्या इतिहास है?
मेघवाल के अनुसार, भारतीय महिलाएं 1927 से लोकसभा और विधानसभाओं में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं। दशकों तक इस मांग को अनदेखा किया गया और पीएम मोदी के नेतृत्व में पहली बार इसे कानूनी रूप मिला।
महिला आरक्षण बिल कब से लागू होगा?
महिला आरक्षण बिल के लागू होने के लिए जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होनी जरूरी है। सरकार ने अभी तक इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की है।
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