31 जुलाई 2026
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उमर अब्दुल्ला और पायल का आपसी सहमति से तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को दी मंजूरी

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उमर अब्दुल्ला और पायल का आपसी सहमति से तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को दी मंजूरी

सारांश

दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत — जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का आपसी सहमति से तलाक 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर किया। 1994 में हुई शादी, 2016 से अदालती लड़ाई और 2024 में मध्यस्थता के बाद यह फैसला आया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दी।
पीठ में जस्टिस पी.एस.
नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे शामिल थे; वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उमर का पक्ष रखा।
दोनों की शादी सितंबर 1994 में हुई थी; तलाक याचिका 30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी क्रूरता के आरोप अस्पष्ट मानते हुए याचिका खारिज की थी।
अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा, जिसके बाद आपसी समझौता संभव हुआ।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच दशकों पुराना वैवाहिक विवाद अब आपसी सहमति से सुलझ गया है। 31 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी। उमर अब्दुल्ला के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को सूचित किया कि सभी विवाद आपसी रज़ामंदी से निपटा लिए गए हैं।

कोर्ट में क्या हुआ

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, 'सब कुछ तय हो चुका है और हमने कोर्ट के सामने इसके लिए अर्जी दाखिल कर दी है। कोर्ट इसको मंजूरी दे सकता है।' पीठ ने तय शर्तों के आधार पर मामले को निस्तारित करने की सहमति जताई।

याचिका में उमर अब्दुल्ला की ओर से कहा गया कि उनका विवाह 'पूरी तरह से टूट चुका है और अब उसे बचाया नहीं जा सकता।' कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए सहमति-आधारित तलाक को स्वीकृति दी।

मामले की पृष्ठभूमि

उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी सितंबर 1994 में हुई थी, लेकिन दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे। तलाक की कानूनी लड़ाई वर्षों तक चली।

30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने उमर की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि क्रूरता के आरोप अस्पष्ट हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा: 'उमर अब्दुल्ला, पायल अब्दुल्ला की ओर से क्रूरता के किसी भी कृत्य को साबित करने में विफल रहे, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक।'

सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

दोनों निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। अगस्त 2024 में शीर्ष अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा, जब दोनों पक्ष आपसी समझौते की संभावना तलाशने पर सहमत हुए। मध्यस्थ की रिपोर्ट आने के बाद अंततः 31 जुलाई 2026 को यह प्रकरण सुलझा।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के साथ यह विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। यह मामला इस बात की मिसाल है कि कैसे लंबे समय तक चले वैवाहिक विवाद मध्यस्थता के ज़रिये सुलझाए जा सकते हैं। उमर अब्दुल्ला फिलहाल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अंत में मध्यस्थता से समाधान। यह उल्लेखनीय है कि जिस 'क्रूरता के आधार' पर तलाक माँगा गया था, वह दो अदालतों में टिक नहीं सका — अंततः 'विवाह का अपूरणीय टूटना' ही कारगर आधार बना। यह प्रकरण यह भी रेखांकित करता है कि सार्वजनिक जीवन में उच्च पद पर बैठे व्यक्तियों के व्यक्तिगत मामले भी न्यायिक प्रक्रिया की उसी कठोर कसौटी पर परखे जाते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला और पायल का तलाक कब और कैसे हुआ?
31 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने तय शर्तों के आधार पर मामले का निस्तारण किया।
उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी कब हुई थी?
दोनों की शादी सितंबर 1994 में हुई थी। शादी के बाद दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे और तलाक की कानूनी प्रक्रिया 2016 से चल रही थी।
फैमिली कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक याचिका क्यों खारिज की थी?
30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि उमर अब्दुल्ला पायल की ओर से क्रूरता — शारीरिक या मानसिक — का कोई भी कृत्य साबित करने में विफल रहे।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे सुलझा?
अगस्त 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। मध्यस्थ की रिपोर्ट के बाद दोनों पक्षों ने सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिए और 31 जुलाई 2026 को कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दी।
इस मामले में कपिल सिब्बल की क्या भूमिका थी?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में उमर अब्दुल्ला का पक्ष रखा। उन्होंने ही कोर्ट को सूचित किया कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझ गए हैं और अर्जी दाखिल की।
राष्ट्र प्रेस
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