उमर अब्दुल्ला और पायल का आपसी सहमति से तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच दशकों पुराना वैवाहिक विवाद अब आपसी सहमति से सुलझ गया है। 31 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी। उमर अब्दुल्ला के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को सूचित किया कि सभी विवाद आपसी रज़ामंदी से निपटा लिए गए हैं।
कोर्ट में क्या हुआ
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, 'सब कुछ तय हो चुका है और हमने कोर्ट के सामने इसके लिए अर्जी दाखिल कर दी है। कोर्ट इसको मंजूरी दे सकता है।' पीठ ने तय शर्तों के आधार पर मामले को निस्तारित करने की सहमति जताई।
याचिका में उमर अब्दुल्ला की ओर से कहा गया कि उनका विवाह 'पूरी तरह से टूट चुका है और अब उसे बचाया नहीं जा सकता।' कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए सहमति-आधारित तलाक को स्वीकृति दी।
मामले की पृष्ठभूमि
उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी सितंबर 1994 में हुई थी, लेकिन दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे। तलाक की कानूनी लड़ाई वर्षों तक चली।
30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने उमर की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि क्रूरता के आरोप अस्पष्ट हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा: 'उमर अब्दुल्ला, पायल अब्दुल्ला की ओर से क्रूरता के किसी भी कृत्य को साबित करने में विफल रहे, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक।'
सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
दोनों निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। अगस्त 2024 में शीर्ष अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा, जब दोनों पक्ष आपसी समझौते की संभावना तलाशने पर सहमत हुए। मध्यस्थ की रिपोर्ट आने के बाद अंततः 31 जुलाई 2026 को यह प्रकरण सुलझा।
आगे क्या
सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के साथ यह विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। यह मामला इस बात की मिसाल है कि कैसे लंबे समय तक चले वैवाहिक विवाद मध्यस्थता के ज़रिये सुलझाए जा सकते हैं। उमर अब्दुल्ला फिलहाल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।