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उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: अनंतनाग में घर गिराना हालात नहीं सुधारेगा, लोगों को साथ लेना ज़रूरी

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उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: अनंतनाग में घर गिराना हालात नहीं सुधारेगा, लोगों को साथ लेना ज़रूरी

सारांश

अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या के बाद एलईटी आतंकियों के घर गिराए गए — लेकिन CM उमर अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बुलडोजर नहीं, जन-भागीदारी ही घाटी में शांति की असली कुंजी है।

मुख्य बातें

अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकवादियों द्वारा हत्या के बाद एलईटी आतंकियों आदिल ठोकर और हारून रशीद गनाई के घर ढहाए गए।
CM उमर अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ऐसी त्वरित कार्रवाइयों के विरुद्ध आदेश दे चुका है।
अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद भी इसी तरह घर गिराए गए थे — तब CM को केंद्र से दखल देकर इसे रुकवाना पड़ा था।
पहलगाम हमले की जाँच में पाया गया कि उसमें कोई स्थानीय व्यक्ति शामिल नहीं था — सभी हमलावर बाहरी थे।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि घर गिराने या हज़ारों गिरफ्तारियों से हालात बिगड़ेंगे, सुधरेंगे नहीं।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार, 24 जुलाई को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि अनंतनाग में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के दो सक्रिय आतंकवादियों के घर ढहाए जाने की कार्रवाई से ज़मीनी हालात नहीं सुधरेंगे। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौर को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता आम जनता को विश्वास में लेकर चलना है।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार को अनंतनाग शहर में यात्रा ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों ने हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी। इस घटना के बाद बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को एलईटी आतंकवादियों आदिल ठोकर और हारून रशीद गनाई के घरों को ढहा दिया गया। यह कार्रवाई सुरक्षा बलों द्वारा बदले की भावना से की गई बताई जा रही है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'मैं पुलिस के गुस्से को समझता हूँ, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि इस तरह की त्वरित कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि घर गिराने या हज़ारों गिरफ्तारियाँ करने से स्थिति और बिगड़ सकती है, सुधर नहीं सकती।

पहलगाम हमले से तुलना

मुख्यमंत्री ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का संदर्भ देते हुए कहा कि उस समय भी कुछ लोगों के घर बुलडोजर से गिराए गए थे और उन्हें इस चलन को रोकने के लिए केंद्र सरकार से बात करनी पड़ी थी। उन्होंने यह भी बताया कि पहलगाम हमले की जाँच में पता चला कि उसमें कोई भी स्थानीय व्यक्ति शामिल नहीं था — सभी हमलावर बाहर से आए थे।

आम जनता पर असर

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम की घटना के बाद आम जनता ने स्वतः आतंकी हमले के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। उन्होंने कहा कि आज भी लोग हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की बेरहम हत्या से आहत और क्रोधित हैं। यह जन-भावना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है जिसे संरक्षित रखना ज़रूरी है।

क्या होगा आगे

अपने पिछले कार्यकाल के अनुभव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोगों की भागीदारी के बिना घाटी में शांति स्थापित करना संभव नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अनंतनाग और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बल आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज़ कर रहे हैं। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर समन्वय की दिशा महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बुलडोजर कार्रवाई एक पैटर्न बनती दिख रही है जिसे चुनी हुई राज्य सरकार असंवैधानिक और प्रतिकूल मानती है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ स्थानीय जनता को अलग-थलग करती हैं — ठीक वही जनता जो खुफिया सूचनाएँ देकर सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी मददगार बन सकती है। सवाल यह है कि क्या केंद्र इस बार भी राज्य की आपत्ति को गंभीरता से लेगा, या बुलडोजर राजनीति का प्रतीकात्मक मूल्य व्यावहारिक नुकसान पर भारी पड़ेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंतनाग में किसके घर गिराए गए और क्यों?
एलईटी आतंकवादियों आदिल ठोकर और हारून रशीद गनाई के घर बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात ढहाए गए। यह कार्रवाई हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद की गई, जिन्हें अनंतनाग में यात्रा ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों ने मार दिया था।
CM उमर अब्दुल्ला ने घर गिराने की कार्रवाई पर क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह की बदले की भावना से की गई कार्रवाई हालात नहीं सुधारेगी, बल्कि स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें ऐसी त्वरित कार्रवाइयों पर रोक लगाई गई है।
पहलगाम हमले से इस घटना का क्या संबंध है?
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी कुछ लोगों के घर बुलडोजर से गिराए गए थे। उस समय CM उमर अब्दुल्ला को केंद्र सरकार से बात करके यह कार्रवाई रुकवानी पड़ी थी। जाँच में पाया गया था कि पहलगाम हमले में कोई स्थानीय व्यक्ति शामिल नहीं था।
सर्वोच्च न्यायालय का बुलडोजर कार्रवाई पर क्या रुख है?
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि किसी आरोपी या संदिग्ध के घर को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के त्वरित रूप से नहीं ढहाया जाना चाहिए। CM उमर अब्दुल्ला ने इसी आदेश का हवाला देते हुए अनंतनाग की कार्रवाई को अनुचित बताया।
उमर अब्दुल्ला के अनुसार कश्मीर में शांति का रास्ता क्या है?
उमर अब्दुल्ला का मानना है कि आम जनता को विश्वास में लेकर चलना ही हिंसा के दौर को समाप्त करने का एकमात्र प्रभावी तरीका है। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जन-भागीदारी के बिना घाटी में स्थायी शांति संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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