मीरवाइज उमर फारूक ने जम्मू-कश्मीर पुलिस पर नजरबंद करने का लगाया आरोप, इजरायल की की आलोचना
सारांश
Key Takeaways
- मीरवाइज उमर फारूक ने नजरबंद होने का आरोप लगाया है।
- इजरायल की आलोचना अली लारिजानी की हत्या के संदर्भ में की गई।
- उन्होंने मुस्लिम नेताओं की साहस पर सवाल उठाए।
- कश्मीर में धार्मिक और राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
- रमजान के पवित्र महीने में मस्जिदों की स्थिति चिंता का विषय है।
श्रीनगर, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कश्मीर घाटी के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने जम्मू-कश्मीर पुलिस पर उन्हें 'नजरबंद' करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की हत्या के बाद इजरायल की कड़ी आलोचना की।
मीरवाइज उमर फारूक ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'हम इजराइल जैसे दुष्ट देश द्वारा सचिव अली लारिजानी की लक्षित हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान के लोगों और उनके नेतृत्व का अदम्य साहस एक सच्चे मुस्लिम राष्ट्र की भावना को दर्शाता है।'
उन्होंने आगे कहा, "यह साहस, दृढ़ता और अल्लाह में अटूट विश्वास रखने वाले लोगों का प्रमाण है। ऐसे लोग ही नेतृत्व करने के लिए योग्य हैं। जैसा कि कुरान में कहा गया है, 'और अंत में जीत नेक लोगों की ही होती है।'
मीरवाइज उमर फारूक ने दूसरे मुस्लिम देशों के नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "दूसरी तरफ, मुस्लिम जगत के अन्य नेताओं ने खुद को सिर्फ कठपुतलियों के रूप में उजागर किया है, जिनमें न साहस है और न ही कोई दृढ़ विश्वास।"
इसी बीच, उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "इस 'पुलिस राज' के डरपोक शासकों ने एक बार फिर जबरदस्ती मुझे रमजान के पवित्र महीने में अल्लाह के घर (मस्जिद) से दूर रखा है, जबकि आज मुझे करण नगर की गोल मस्जिद में एक उपदेश देना था। यह कितनी शर्म की बात है।"
इससे पहले, मीरवाइज उमर फारूक पर आरोप लगा था कि उन्हें शुक्रवार को श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद में नमाज से रोका गया। उन्होंने इस स्थिति की तुलना इजराइल द्वारा रमजान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे बंद करने जैसी कठोर कार्रवाई से की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह इजराइल ने रमजान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे जबरदस्ती बंद कर दिए, वैसे ही एक हकीकत यहाँ भी देखने को मिल रही है।