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श्रीनगर: जामा मस्जिद के दरवाजे बंद, मीरवाइज उमर फारूक ने इजराइल से की तुलना

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श्रीनगर: जामा मस्जिद के दरवाजे बंद, मीरवाइज उमर फारूक ने इजराइल से की तुलना

सारांश

जम्मू-कश्मीर के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने जामा मस्जिद के दरवाजों के बंद होने पर गहरी चिंता जताई है। रमजान के अंतिम शुक्रवार पर हजारों लोग नमाज के लिए आते हैं, लेकिन प्रशासन ने दरवाजे बंद कर दिए हैं।

मुख्य बातें

जामा मस्जिद के दरवाजे बंद होने से धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
मीरवाइज उमर फारूक ने इसे इजराइल की कार्रवाई से जोड़ा।
यह स्थिति मुसलमानों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक रूप से दुखद है।
जामा मस्जिद भारतीय वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है।
इस मस्जिद में 33,000 लोगों की नमाज़ पढ़ने की क्षमता है।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को श्रीनगर में स्थित जामा मस्जिद के दरवाजों के बंद होने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आज रमजान के अंतिम शुक्रवार पर हजारों लोग यहाँ नमाज और दुआ के लिए आते हैं, लेकिन इससे पहले ही मस्जिद के सभी दरवाजे लोगों के लिए बंद कर दिए गए हैं, जो कि अत्यंत दुखद है।

मीरवाइज उमर फारूक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि रमजान के इस महत्वपूर्ण दिन पर जब समुदाय के लोग नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा होते हैं, तो इस बार भी मस्जिद के दरवाजे पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। यह लगातार सातवां वर्ष है जब स्थानीय प्रशासन ने जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी।

उन्होंने इस गंभीर स्थिति की तुलना इजराइल द्वारा रमजान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे बंद करने के कृत्य से की। उन्होंने लिखा कि जिस प्रकार इज़राइल ने रमज़ान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे जोर-जबरदस्ती बंद कर दिए हैं, वैसा ही कुछ यहाँ भी देखने को मिल रहा है।

उनका कहना है कि यह सब देखकर हमारा दिल खून के आंसू रोता है। यह शर्मनाक है कि कोई अल्लाह के घर के दरवाजे बंद कर देता है और लोगों को उनके धार्मिक कर्तव्यों और इबादत से वंचित करता है। उन्होंने कहा कि जब किसी धर्मस्थल के दरवाजे बंद होते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत आस्था पर हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की धार्मिक स्वतंत्रता और विश्वास पर भी चोट पहुंचाता है। यह स्थिति मुसलमानों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत दुखद है।

जामा मस्जिद भारतीय और मुग़ल वास्तुकला का एक विशाल उदाहरण है। इसकी डिज़ाइन को ब्रिटिश वास्तुकारों ने तैयार किया था, जिसे “इंडो-सारासेनिक वास्तुकला” कहा जाता है। इस डिज़ाइन में एक भी गुम्बद नहीं है, जो कि अधिकांश मस्जिदों में होता है। यह वास्तुकला बौद्ध धार्मिक स्थलों से भी मिलती-जुलती है। मस्जिद की लम्बाई 384 फ़ीट और चौड़ाई 38 फ़ीट है। इसमें एक साथ 33,000 लोगों के नमाज़ पढ़ने की जगह है। इसका मुख्य आकर्षण प्रार्थना हॉल है, जो 370 खंभों पर खड़ा है, और ये सभी खंभे देवदार के मोटे तनों से बने हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामा मस्जिद क्यों बंद की गई?
जामा मस्जिद के दरवाजे बंद करने का निर्णय स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों से लिया गया है।
मीरवाइज उमर फारूक कौन हैं?
मीरवाइज उमर फारूक जम्मू-कश्मीर के एक प्रमुख अलगाववादी नेता हैं।
क्या यह पहली बार हुआ है कि जामा मस्जिद के दरवाजे बंद किए गए?
नहीं, यह लगातार सातवां वर्ष है जब प्रशासन ने जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी।
जामा मस्जिद की वास्तुकला कैसी है?
जामा मस्जिद की वास्तुकला इंडो-सारासेनिक शैली में है, जिसमें कोई गुम्बद नहीं है।
इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
मीरवाइज उमर फारूक ने इस स्थिति को इजराइल द्वारा मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे बंद करने के कृत्य से जोड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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