जिन्होंने मस्जिदों को ताले लगाए, वही देते हैं 'ईद मुबारक': मीरवाइज उमर फारूक

Click to start listening
जिन्होंने मस्जिदों को ताले लगाए, वही देते हैं 'ईद मुबारक': मीरवाइज उमर फारूक

सारांश

ईद के दिन जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रहने पर मीरवाइज उमर फारूक ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो लोग ताले लगाते हैं, वही सबसे पहले 'ईद मुबारक' की बधाई देते हैं। यह धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा सवाल है।

Key Takeaways

  • जामा मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर मीरवाइज का चिंता व्यक्त करना।
  • ईद का दिन मुसलमानों के लिए खुशी का अवसर होता है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियां उठाने की आवश्यकता।
  • सामाजिक एकता और भाईचारे का महत्व।
  • समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन।

श्रीनगर, २१ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कश्मीर घाटी के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शनिवार को ईद के अवसर पर श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रहने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने यह आरोप लगाया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताला लगाते हैं, वही सबसे पहले 'ईद मुबारक' की बधाई देते हैं।

मीरवाइज उमर फारूक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि लगातार सातवें वर्ष जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक लगाई गई है। इसके कारण मुसलमानों के लिए जश्न का दिन इस बार भी खुशी के बजाय निराशा और दुख में बदल गया है।

उनका कहना है कि इस प्रकार की पाबंदियां और नजरबंदियां न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं और विश्वास को भी ठेस पहुंचाती हैं। जामा मस्जिद श्रीनगर का एक ऐसा स्थल है जो लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। यहां आने वाले लोग न केवल नमाज अदा करते हैं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का अनुभव भी करते हैं। लेकिन इन पाबंदियों के कारण इस महत्वपूर्ण अवसर पर हजारों मुसलमानों का अधिकार सीमित किया जा रहा है।

उनका कहना है कि ईद का दिन केवल इबादत का अवसर नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशी, मिलन और भाईचारे का प्रतीक भी है। जब ऐसी पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो लोगों का यह पारिवारिक और धार्मिक जश्न अधूरा रह जाता है।

मीरवाइज उमर फारूक ने इसे समय की एक बड़ी विडंबना बताया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताले लगाते हैं, वही सबसे पहले मुसलमानों को 'ईद मुबारक' की बधाई देते हैं।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इससे पहले पिछले शुक्रवार को भी श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर चिंता व्यक्त की थी। उनका कहना है कि रमजान के पावन महीने और ईद के दिन जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रखने का निर्णय मुस्लिम समुदाय की खुशी और जश्न को गम में बदल देता है।

Point of View

क्योंकि यह धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक एकता को प्रभावित करता है। ऐसे समय में, जब समुदाय को जश्न मनाने का अवसर नहीं मिलता, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या मीरवाइज उमर फारूक ने ईद के दिन विशेष बयान दिया?
जी हां, उन्होंने जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रहने पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि जो लोग ताले लगाते हैं, वही सबसे पहले 'ईद मुबारक' की बधाई देते हैं।
जामा मस्जिद का धार्मिक महत्व क्या है?
जामा मस्जिद श्रीनगर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहाँ लोग नमाज अदा करने के साथ-साथ सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का अनुभव करते हैं।
ईद का दिन क्यों महत्वपूर्ण है?
ईद का दिन केवल इबादत का अवसर नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज के लिए खुशी, मिलन और भाईचारे का प्रतीक है।
क्या यह पहला मौका है जब जामा मस्जिद के दरवाजे बंद हैं?
नहीं, यह लगातार सातवां वर्ष है जब जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक लगाई गई है।
मीरवाइज उमर फारूक का यह बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
उनका बयान धार्मिक स्वतंत्रता और समाज की भावनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समुदाय की पहचान और अधिकारों को संबोधित करता है।
Nation Press