15 अगस्त 2026
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80वें स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला ने पीओजेके पर दिया बड़ा बयान, सिन्हा ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला ने पीओजेके पर दिया बड़ा बयान, सिन्हा ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने सिर्फ तिरंगा नहीं फहराया — उन्होंने पीओजेके पर सीधा बयान दिया कि 80 साल पहले भारत में विलय का फैसला सही था। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीदों को नमन करते हुए शांतिपूर्ण कश्मीर का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 अगस्त 2026 को बख्शी स्टेडियम, श्रीनगर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह की अगुवाई की।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में तिरंगा फहराया और एक्स पर वीडियो साझा कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
CM अब्दुल्ला ने पीओजेके पर कहा — ' 80 साल पहले पूर्वजों का भारत में विलय का फैसला सही था।' अब्दुल्ला ने कहा कि 'सीमा के उस पार की स्थिति चिंताजनक है' और कश्मीर का वह हिस्सा भारत का है।
सिन्हा ने सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीएपीएफ के जवानों को बधाई दी और प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वालों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रीनगर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बख्शी स्टेडियम में तिरंगा फहराकर मुख्य समारोह की अगुवाई की, जबकि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज को सैल्यूट किया। दोनों नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों और सुरक्षाबलों के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शांतिपूर्ण और समृद्ध जम्मू-कश्मीर बनाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य समारोह और उमर अब्दुल्ला का संबोधन

श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने परेड की सलामी ली। उन्होंने अपना भाषण उर्दू कवि इकबाल की प्रसिद्ध पंक्तियों 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' से शुरू किया — एक प्रतीकात्मक शुरुआत जो राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

अब्दुल्ला ने कहा, 'आज हम उन सभी को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण दिए। यह खुशी का दिन भी है और याद का भी। हमें आत्मचिंतन करना चाहिए कि क्या हमने वास्तव में उस भारत की स्थापना की है जिसके बारे में हम पढ़ते और जश्न मनाते हैं।'

पीओजेके पर उमर का बड़ा बयान

जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को याद करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हमारे लोगों ने बहादुरी से कबायली हमलावरों से लड़ाई लड़ी। हज़ारों लोगों ने अपनी जान दी। आज पीओजेके की स्थिति को देखकर मुझे लगता है कि 80 साल पहले हमारे पूर्वजों ने जो फैसला लिया था, वह सही था।'

उन्होंने आगे कहा, 'सीमा के उस पार की स्थिति चिंताजनक है और हमें तकलीफ देती है। कश्मीर का वह हिस्सा हमारा है और हमारी विधानसभा में उस क्षेत्र के लिए सीटें भी आरक्षित हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पीओजेके में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

उपराज्यपाल सिन्हा की श्रद्धांजलि और संदेश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में तिरंगा फहराया और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए वीडियो में वह राष्ट्रीय ध्वज को सैल्यूट करते दिखे। अपनी एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'हमारे 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लोक भवन में गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया। मैं देश के संस्थापकों और भारत माता के उन वीर सपूतों और बेटियों को श्रद्धांजलि देने में सभी नागरिकों के साथ शामिल होता हूँ, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।'

सिन्हा ने इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी और सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीएपीएफ तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवानों को बधाई दी।

उन्होंने कहा, 'हम उन सैनिकों और पुलिसकर्मियों के प्रति गहरी कृतज्ञता रखते हैं, जिन्होंने देश की एकता की रक्षा करते हुए और आतंकवाद से लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आइए हम एक शांतिपूर्ण, समृद्ध जम्मू-कश्मीर और एक महान राष्ट्र बनाने के उनके सपनों को साकार करने का प्रयास करें।'

ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व

यह 80वाँ स्वतंत्रता दिवस जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा पुनः प्राप्त कर चुका है और उमर अब्दुल्ला निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार के दावे किए जा रहे हैं और पर्यटन क्षेत्र में उछाल देखा जा रहा है।

दोनों नेताओं का एक साथ समारोह में भाग लेना — उपराज्यपाल और निर्वाचित मुख्यमंत्री — राज्य की दोहरी शासन संरचना को दर्शाता है, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य की जटिलता को भी रेखांकित करती है।

आगे की राह

दोनों नेताओं के संबोधन में शांति और विकास का जो संकल्प दोहराया गया, वह आने वाले महीनों में सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देता है। पीओजेके पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में नई चर्चा को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नेशनल कॉन्फ्रेंस की ऐतिहासिक स्वायत्तता-केंद्रित राजनीति से स्पष्ट दूरी बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओजेके में जनाक्रोश और आर्थिक बदहाली की खबरें हैं, जिसे भारत सरकार अपने आख्यान में भुनाना चाहती है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि जब जम्मू-कश्मीर में ही राज्य का दर्जा, विधायी शक्तियाँ और ज़मीनी विकास के सवाल अनुत्तरित हैं, तो पीओजेके की चर्चा कहीं स्थानीय जवाबदेही से ध्यान तो नहीं हटाती।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

80वें स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर में मुख्य समारोह कहाँ हुआ?
मुख्य समारोह श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में हुआ, जहाँ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तिरंगा फहराया और परेड की सलामी ली। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में अलग से ध्वजारोहण किया।
उमर अब्दुल्ला ने पीओजेके पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पीओजेके की मौजूदा स्थिति को देखकर लगता है कि 80 साल पहले पूर्वजों ने भारत में विलय का जो फैसला लिया था, वह सही था। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा के उस पार की स्थिति चिंताजनक है और कश्मीर का वह हिस्सा भारत का है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वतंत्रता दिवस पर क्या संदेश दिया?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीद सैनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों और इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीएपीएफ के जवानों को बधाई देते हुए शांतिपूर्ण और समृद्ध जम्मू-कश्मीर बनाने का आह्वान किया।
उमर अब्दुल्ला ने अपना भाषण किससे शुरू किया?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना भाषण उर्दू कवि इकबाल की प्रसिद्ध पंक्तियों 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' से शुरू किया, जो राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके भाव को प्रतिबिंबित करता है।
जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय और कबायली हमले का उल्लेख क्यों किया गया?
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने याद दिलाया कि 1947 में कबायली हमलावरों से लड़ते हुए हज़ारों लोगों ने जान दी थी और तभी जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ। उन्होंने इसे पीओजेके की वर्तमान स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि वह ऐतिहासिक निर्णय सही साबित हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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