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वंदे भारत अब 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी कटरा-बनिहाल सेक्शन पर, चिनाब ब्रिज पर ऐतिहासिक उपलब्धि

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वंदे भारत अब 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी कटरा-बनिहाल सेक्शन पर, चिनाब ब्रिज पर ऐतिहासिक उपलब्धि

सारांश

वंदे भारत ने चिनाब ब्रिज पर 100 किमी/घंटे की रफ्तार छू ली — यह सिर्फ एक गति-रिकॉर्ड नहीं, बल्कि दशकों की USBRL परियोजना का व्यावहारिक परिणाम है। दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे पुल पर यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने के सपने को ठोस आकार दे रही है।

मुख्य बातें

वंदे भारत ट्रेन ने कटरा-बनिहाल सेक्शन पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से परिचालन शुरू किया।
पहले कटरा-संगलदान पर अधिकतम गति 85 किमी/घंटा और संगलदान-बनिहाल पर 75 किमी/घंटा थी।
चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल है — चिनाब नदी तल से 359 मीटर ऊँचा, एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक।
यह 111 किमी लंबा सेक्शन USBRL परियोजना का हिस्सा है, जिसमें 272 किमी नया ट्रैक बिछाया गया है।
उत्तर रेलवे ने सभी सुरक्षा शर्तें पूरी होने के बाद ही गति बढ़ाने की मंजूरी दी।

वंदे भारत एक्सप्रेस ने कटरा और बनिहाल के बीच दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे पुल चिनाब ब्रिज पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफलतापूर्वक परिचालन किया है। रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई, जिसकी जानकारी जम्मू के वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक उचित सिंघल ने 20 अगस्त को पत्रकारों के साथ साझा की। इस कदम से जम्मू-कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

रफ्तार में क्या बदला

इससे पहले कटरा-संगलदान सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम गति 85 किमी प्रति घंटा थी, जबकि संगलदान-बनिहाल सेक्शन पर यह सीमा 75 किमी प्रति घंटा थी। अब दोनों सेक्शनों पर एकसमान 100 किमी प्रति घंटे की गति की अनुमति दी गई है। उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया कि सभी आवश्यक सुरक्षा शर्तें पूरी होने के बाद ही यह मंजूरी दी गई है।

कटरा-बनिहाल रेल सेक्शन की खासियत

यह 111 किलोमीटर लंबा नया ब्रॉडगेज रेल सेक्शन उत्तर रेलवे के जम्मू डिवीजन के अंतर्गत श्री माता वैष्णो देवी कटरा और बनिहाल को जोड़ता है। यह सेक्शन उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का अभिन्न हिस्सा है, जिसके तहत जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ने के लिए 272 किलोमीटर नया ट्रैक बिछाया गया है।

चिनाब ब्रिज — इंजीनियरिंग का कमाल

चिनाब रेल पुल विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे पुल है। यह चिनाब नदी के तल से 359 मीटर (1,178 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है — पेरिस के एफिल टॉवर से भी 35 मीटर अधिक ऊँचा। पुल की कुल लंबाई 1,315 मीटर है और इसे स्टील व कंक्रीट के आर्च ढाँचे में निर्मित किया गया है, ताकि यह तेज हवाओं और भूकंप के झटकों को सहन कर सके।

यात्रियों और क्षेत्र पर असर

गति में वृद्धि से श्री माता वैष्णो देवी कटरा से बनिहाल तक की यात्रा में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से घटेगा। उचित सिंघल के अनुसार, इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

आगे क्या

जम्मू से बारामूला तक कुल रेल लाइन की लंबाई लगभग 324 से 345 किलोमीटर बताई जाती है। USBRL परियोजना के पूर्ण होने पर घाटी तक रेल पहुँच और सुगम होगी, जो दशकों से चली आ रही कनेक्टिविटी की चुनौती का स्थायी समाधान माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि USBRL परियोजना की पूर्णता की समयसीमा बार-बार क्यों खिसकती रही। चिनाब ब्रिज की इंजीनियरिंग भव्यता निर्विवाद है, पर जम्मू-कश्मीर के आम यात्री के लिए तब तक राहत अधूरी है जब तक श्रीनगर तक सीधी रेल सेवा नहीं मिलती। गति बढ़ाना स्वागतयोग्य कदम है, किंतु इसे USBRL के व्यापक क्रियान्वयन की जवाबदेही से अलग नहीं देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे भारत ट्रेन कटरा-बनिहाल सेक्शन पर अब कितनी रफ्तार से चलेगी?
रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद वंदे भारत अब कटरा-बनिहाल सेक्शन पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेगी। इससे पहले कटरा-संगलदान पर अधिकतम गति 85 किमी/घंटा और संगलदान-बनिहाल पर 75 किमी/घंटा थी।
चिनाब ब्रिज क्यों खास है?
चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल है, जो चिनाब नदी के तल से 359 मीटर (1,178 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह पेरिस के एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक ऊँचा है और इसकी लंबाई 1,315 मीटर है।
USBRL परियोजना क्या है और इसमें चिनाब ब्रिज की क्या भूमिका है?
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ने के लिए 272 किलोमीटर नया ट्रैक बिछाने की योजना है। चिनाब ब्रिज इसी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है और संगलदान-बनिहाल सेक्शन भी इसी के अंतर्गत आता है।
रफ्तार बढ़ने से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
गति में वृद्धि से श्री माता वैष्णो देवी कटरा से बनिहाल तक पहुँचने में लगने वाला समय घटेगा। इससे यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर मिलेगा, साथ ही जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्या रफ्तार बढ़ाने से सुरक्षा पर कोई असर पड़ेगा?
उत्तर रेलवे के अनुसार, सभी आवश्यक सुरक्षा शर्तें पूरी होने के बाद ही 100 किमी/घंटे की गति की मंजूरी दी गई है। चिनाब ब्रिज को तेज हवाओं और भूकंप झेलने में सक्षम स्टील-कंक्रीट आर्च संरचना में बनाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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