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चिनाब नदी पर मंडोल पुल: सिराज के 90,000 लोगों को मिलेगी हर मौसम में कनेक्टिविटी, 2.5 घंटे का सफर होगा 10 मिनट

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चिनाब नदी पर मंडोल पुल: सिराज के 90,000 लोगों को मिलेगी हर मौसम में कनेक्टिविटी, 2.5 घंटे का सफर होगा 10 मिनट

सारांश

चिनाब नदी पर निर्माणाधीन मंडोल पुल डोडा जिले के सिराज क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आएगा — 90,000 लोगों का 2.5 घंटे का सफर सिमटकर 10 मिनट का हो जाएगा। ₹24.69 करोड़ की इस परियोजना से भौगोलिक अलगाव की दशकों पुरानी समस्या का समाधान होगा।

मुख्य बातें

चिनाब नदी पर मंडोल से मल्होरी के बीच 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा मोटर-योग्य पुल निर्माणाधीन है।
पुल बनने के बाद डोडा से अस्सर नेशनल हाईवे तक का सफर 2.5 घंटे से घटकर 10 मिनट रह जाएगा।
परियोजना की स्वीकृत लागत ₹24.69 करोड़ , आवंटित लागत ₹22.83 करोड़ ; निर्माण 2025 में शुरू।
कस्तीगढ़ , बागवाह , अस्सर ( डोडा ) और राजगढ़ ( रामबन ) ब्लॉक सहित लगभग 90,000 लोग लाभान्वित होंगे।
पुल NH 244 से सीधा जुड़ाव देगा और मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद।
निर्माण नाबार्ड के सहयोग से सड़क और भवन विभाग द्वारा किया जा रहा है।

डोडा जिले में चिनाब नदी पर निर्माणाधीन मंडोल पुल सिराज क्षेत्र के लगभग 90,000 लोगों के लिए हर मौसम में सुलभ और सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। सड़क और भवन विभाग ने नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) के सहयोग से यह पुल बनाने का कार्य 2025 में शुरू किया, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। पुल बनने के बाद डोडा शहर से अस्सर स्थित नेशनल हाईवे तक का 2.5 घंटे का कठिन सफर घटकर मात्र 10 मिनट रह जाएगा।

पुल की तकनीकी विशेषताएँ

मंडोल से मल्होरी के बीच बनने वाला यह मोटर-योग्य पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है। यह विशाल चिनाब नदी के ऊपर 100 फीट की ऊँचाई पर स्थित होगा। डोडा के आरएंडबी (बागवाह डिवीजन) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर दिनेश भूषण ने बताया, 'मंडोल से मल्होरी तक बनने वाला यह मोटर-योग्य पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है। पुल का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। यह कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर ब्लॉक को जोड़ेगा।'

पुल के निर्माण के लिए स्वीकृत लागत ₹24.69 करोड़ है, जबकि आवंटित लागत ₹22.83 करोड़ है। यह पुल सिराज को NH 244 पर अस्सर से सीधे जोड़ेगा, जिससे न केवल सफर का समय कम होगा, बल्कि इमरजेंसी सेवाओं की पहुँच भी बेहतर होगी।

किन क्षेत्रों को होगा फायदा

यह पुल डोडा जिले के तीन प्रशासनिक खंडों — कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर — तथा रामबन जिले के राजगढ़ ब्लॉक की आबादी को लाभान्वित करेगा। कुल मिलाकर लगभग 90,000 निवासी इस बुनियादी ढाँचे परियोजना से सीधे लाभ उठाएंगे।

गौरतलब है कि चिनाब घाटी के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में चिनाब के बाएँ किनारे की पहाड़ी ढलानों पर बसे समुदाय सदियों से भौगोलिक अलगाव का सामना करते आए हैं। खतरनाक पैदल पुलों, जिप-लाइन या पहाड़ी रास्तों से घंटों का चक्कर लगाना उनकी विवशता थी।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी मुदस्सर ने बताया, 'नदी के दूसरी ओर और अस्सर में नेशनल हाईवे तक पहुँचने के लिए हमें डोडा शहर से होकर 2.5 घंटे का सफर करना पड़ता है। जब पुल बन जाएगा, तो हमें वहाँ पहुँचने में सिर्फ 10 मिनट लगेंगे।' उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पूर्वजों ने भी ऐसे विकास का सपना देखा था।

मलहोरी गाँव के निवासी प्रेयावर्त सिंह ने कहा, 'नदी का दूसरा किनारा बहुत पास है, लेकिन किसी इमरजेंसी में या रिश्तेदारों से मिलने जाना हो तो वहाँ जाने के मुश्किल सफर को शुरू करने से पहले हम दो बार सोचते हैं। यह इस इलाके के लिए एक बहुत बड़ी बात है जो निश्चित रूप से हमारी ज़िंदगी को बेहतर बनाएगी।' सिंह ने यह भी कहा कि जो दूरी पहले 40 किलोमीटर से अधिक थी, वह पुल बनने के बाद 10 मिनट में तय होगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और महत्त्व

चिनाब नदी पर मोटर-गाड़ियों के चलने योग्य पुलों का निर्माण सिराज क्षेत्र की दूरदराज़ और अलग-थलग आबादी के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में आधारभूत ढाँचे के विकास पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पुल न केवल आवागमन सुगम करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच भी सुनिश्चित करते हैं। पुल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र बेहतर आपूर्ति श्रृंखला, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पर्यटन की दृष्टि से भी अधिक सक्षम बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों के भौगोलिक अन्याय को पलटने की कोशिश हैं — जहाँ पहाड़ी इलाकों की आबादी को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाज़ार से जोड़ने के लिए जानलेवा रास्तों से गुज़रना पड़ता था। हालाँकि, ₹24.69 करोड़ की यह परियोजना तभी अपना पूरा असर दिखाएगी जब इससे जुड़ने वाली सड़कें और सेवाएँ भी समय पर उन्नत हों। जम्मू-कश्मीर में ऐसे कई पुल निर्माणाधीन हैं, लेकिन रखरखाव और पूरक आधारभूत ढाँचे में निवेश के बिना 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' का वादा अधूरा रह सकता है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंडोल पुल कहाँ बनाया जा रहा है और इसकी लंबाई कितनी है?
मंडोल पुल जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में चिनाब नदी पर मंडोल से मल्होरी के बीच बनाया जा रहा है। यह पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है तथा चिनाब नदी से 100 फीट की ऊँचाई पर स्थित होगा।
मंडोल पुल बनने से सफर में कितना समय बचेगा?
पुल बनने के बाद डोडा शहर से चिनाब नदी के दूसरी ओर और अस्सर में NH 244 तक पहुँचने का समय 2.5 घंटे से घटकर मात्र 10 मिनट रह जाएगा। पहले यही दूरी 40 किलोमीटर से अधिक का चक्कर लगाकर तय करनी पड़ती थी।
मंडोल पुल की लागत कितनी है और इसे कौन बना रहा है?
इस पुल की स्वीकृत लागत ₹24.69 करोड़ और आवंटित लागत ₹22.83 करोड़ है। इसका निर्माण सड़क और भवन विभाग (आरएंडबी, बागवाह डिवीजन) नाबार्ड के सहयोग से कर रहा है।
मंडोल पुल से किन क्षेत्रों और कितनी आबादी को फायदा होगा?
इस पुल से डोडा जिले के कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर तथा रामबन जिले के राजगढ़ ब्लॉक के लगभग 90,000 लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। यह पुल इन क्षेत्रों को NH 244 से जोड़कर हर मौसम में आवागमन सुनिश्चित करेगा।
मंडोल पुल का निर्माण कब पूरा होगा?
पुल का निर्माण 2025 में शुरू हुआ था और यह मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। परियोजना पर काम तेज़ी से जारी है, जैसा कि संबंधित इंजीनियर ने पुष्टि की है।
राष्ट्र प्रेस
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