चिनाब नदी पर मंडोल पुल: सिराज के 90,000 लोगों को मिलेगी हर मौसम में कनेक्टिविटी, 2.5 घंटे का सफर होगा 10 मिनट
सारांश
मुख्य बातें
डोडा जिले में चिनाब नदी पर निर्माणाधीन मंडोल पुल सिराज क्षेत्र के लगभग 90,000 लोगों के लिए हर मौसम में सुलभ और सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। सड़क और भवन विभाग ने नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) के सहयोग से यह पुल बनाने का कार्य 2025 में शुरू किया, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। पुल बनने के बाद डोडा शहर से अस्सर स्थित नेशनल हाईवे तक का 2.5 घंटे का कठिन सफर घटकर मात्र 10 मिनट रह जाएगा।
पुल की तकनीकी विशेषताएँ
मंडोल से मल्होरी के बीच बनने वाला यह मोटर-योग्य पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है। यह विशाल चिनाब नदी के ऊपर 100 फीट की ऊँचाई पर स्थित होगा। डोडा के आरएंडबी (बागवाह डिवीजन) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर दिनेश भूषण ने बताया, 'मंडोल से मल्होरी तक बनने वाला यह मोटर-योग्य पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है। पुल का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। यह कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर ब्लॉक को जोड़ेगा।'
पुल के निर्माण के लिए स्वीकृत लागत ₹24.69 करोड़ है, जबकि आवंटित लागत ₹22.83 करोड़ है। यह पुल सिराज को NH 244 पर अस्सर से सीधे जोड़ेगा, जिससे न केवल सफर का समय कम होगा, बल्कि इमरजेंसी सेवाओं की पहुँच भी बेहतर होगी।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा
यह पुल डोडा जिले के तीन प्रशासनिक खंडों — कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर — तथा रामबन जिले के राजगढ़ ब्लॉक की आबादी को लाभान्वित करेगा। कुल मिलाकर लगभग 90,000 निवासी इस बुनियादी ढाँचे परियोजना से सीधे लाभ उठाएंगे।
गौरतलब है कि चिनाब घाटी के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में चिनाब के बाएँ किनारे की पहाड़ी ढलानों पर बसे समुदाय सदियों से भौगोलिक अलगाव का सामना करते आए हैं। खतरनाक पैदल पुलों, जिप-लाइन या पहाड़ी रास्तों से घंटों का चक्कर लगाना उनकी विवशता थी।
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी मुदस्सर ने बताया, 'नदी के दूसरी ओर और अस्सर में नेशनल हाईवे तक पहुँचने के लिए हमें डोडा शहर से होकर 2.5 घंटे का सफर करना पड़ता है। जब पुल बन जाएगा, तो हमें वहाँ पहुँचने में सिर्फ 10 मिनट लगेंगे।' उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पूर्वजों ने भी ऐसे विकास का सपना देखा था।
मलहोरी गाँव के निवासी प्रेयावर्त सिंह ने कहा, 'नदी का दूसरा किनारा बहुत पास है, लेकिन किसी इमरजेंसी में या रिश्तेदारों से मिलने जाना हो तो वहाँ जाने के मुश्किल सफर को शुरू करने से पहले हम दो बार सोचते हैं। यह इस इलाके के लिए एक बहुत बड़ी बात है जो निश्चित रूप से हमारी ज़िंदगी को बेहतर बनाएगी।' सिंह ने यह भी कहा कि जो दूरी पहले 40 किलोमीटर से अधिक थी, वह पुल बनने के बाद 10 मिनट में तय होगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और महत्त्व
चिनाब नदी पर मोटर-गाड़ियों के चलने योग्य पुलों का निर्माण सिराज क्षेत्र की दूरदराज़ और अलग-थलग आबादी के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में आधारभूत ढाँचे के विकास पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पुल न केवल आवागमन सुगम करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच भी सुनिश्चित करते हैं। पुल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र बेहतर आपूर्ति श्रृंखला, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पर्यटन की दृष्टि से भी अधिक सक्षम बनेगा।