9 अक्टूबर 2026
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जसीडीह रेल बाइपास लाइन शुरू: ₹293 करोड़ की परियोजना से देवघर की रेल कनेक्टिविटी मजबूत

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जसीडीह रेल बाइपास लाइन शुरू: ₹293 करोड़ की परियोजना से देवघर की रेल कनेक्टिविटी मजबूत

सारांश

₹293 करोड़ और लगभग 5 किलोमीटर की यह बाइपास लाइन जसीडीह में इंजन पलटने की पुरानी अड़चन को खत्म कर देगी। देवघर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल के लिए यह रेल सुधार श्रावणी मेले जैसे भीड़ के मौसम में भी बड़ी राहत दे सकता है।

मुख्य बातें

जसीडीह रेल बाइपास लाइन का उद्घाटन 9 अक्टूबर 2026 को गोड्डा सांसद डॉ.
निशिकांत दुबे ने किया।
परियोजना की लागत लगभग ₹293 करोड़ ; लंबाई करीब 5 किलोमीटर ।
नई लाइन देवघर लिंक केबिन से कुमड़ाबाद-रोहिणी होते हुए वैकल्पिक मार्ग देगी।
रेलवे के अनुसार प्रतिदिन कम-से-कम 5 यात्री ट्रेनों का समय बचेगा और 2 मालगाड़ियाँ बाधा-मुक्त होकर गुजर सकेंगी।
देवघर, जसीडीह, दुमका और गोड्डा की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी; बाबा बैद्यनाथ धाम के तीर्थयात्रियों को भी लाभ।

जसीडीह रेल बाइपास लाइन को 9 अक्टूबर 2026 को झारखंड के देवघर में परिचालन के लिए खोल दिया गया। ₹293 करोड़ की लागत से निर्मित यह लगभग 5 किलोमीटर लंबी बाइपास लाइन जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों के इंजन की दिशा बदलने की प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर देगी, जिससे यात्री एवं मालगाड़ियों के परिचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय बचेगा। गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने हरी झंडी दिखाकर इस परियोजना का उद्घाटन किया।

उद्घाटन समारोह और उपस्थित अधिकारी

उद्घाटन कार्यक्रम में पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय, आसनसोल रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) संग्रह मौर्य तथा रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि इस परियोजना से यात्री आवागमन और रेल परिचालन की दक्षता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

तकनीकी संरचना और नया मार्ग

नई बाइपास लाइन देवघर लिंक केबिन से कुमड़ाबाद-रोहिणी होते हुए ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी। इससे पहले, संबंधित ट्रेनों को जसीडीह स्टेशन में प्रवेश कर इंजन को एक छोर से हटाकर दूसरे छोर पर जोड़ने और ब्रेक की जाँच जैसी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समय व्यतीत होता था। परियोजना के अंतर्गत रॉक कटिंग, रोड ओवरब्रिज, रोड अंडरब्रिज और छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। रेलवे के अनुसार, सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए सिग्नलिंग और ट्रैक से जुड़ी व्यवस्थाएँ स्थापित कर उनका परीक्षण भी पूरा किया जा चुका है।

यात्रियों और माल परिवहन पर असर

रेलवे के अनुसार, इस बाइपास लाइन से प्रतिदिन कम-से-कम पाँच यात्री ट्रेनों के यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, कम-से-कम दो मालगाड़ियाँ मुख्य स्टेशन पर परिचालन संबंधी बाधाओं से बचते हुए बाइपास से गुजर सकेंगी। गौरतलब है कि इससे क्षेत्र में माल परिवहन और औद्योगिक आपूर्ति को भी लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही, जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव भी कम होगा।

धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय महत्त्व

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम के कारण देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। श्रावणी मेले सहित विभिन्न अवसरों पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, और उस दौरान रेल परिचालन पर भारी दबाव रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पर्यटन के चलते संथाल परगना क्षेत्र में रेल संपर्क की माँग लगातार बढ़ रही है। नई लाइन से देवघर, जसीडीह, दुमका और गोड्डा क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह

परियोजना के चालू होने के साथ ही रेलवे का ध्यान अब परिचालन दक्षता को व्यवहार में प्रमाणित करने पर होगा। यदि यात्रा-समय में अपेक्षित कमी वास्तव में देखने को मिलती है, तो यह झारखंड के अन्य रेल विस्तार प्रस्तावों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब प्लेटफ़ॉर्म और ट्रैक दोनों पर असाधारण दबाव होता है। ₹293 करोड़ के निवेश के सापेक्ष लाभ की निगरानी के लिए कोई सार्वजनिक मापन ढाँचा घोषित नहीं किया गया है। देवघर-जसीडीह खंड पर यात्री घनत्व को देखते हुए, इस परियोजना को क्षेत्र में आगामी रेल विस्तार की कसौटी के रूप में देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसीडीह रेल बाइपास लाइन क्या है और यह कहाँ बनाई गई है?
जसीडीह रेल बाइपास लाइन झारखंड के देवघर जिले में बनाई गई लगभग 5 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना है, जिसे ₹293 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। यह देवघर लिंक केबिन से कुमड़ाबाद-रोहिणी होते हुए ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग देती है, ताकि उन्हें जसीडीह स्टेशन में इंजन पलटने के लिए प्रवेश न करना पड़े।
इस बाइपास लाइन से यात्रियों को क्या फ़ायदा होगा?
रेलवे के अनुसार इस परियोजना से प्रतिदिन कम-से-कम 5 यात्री ट्रेनों के यात्रा-समय में कमी आने की उम्मीद है। जसीडीह स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने और ब्रेक जाँच जैसी प्रक्रियाओं में लगने वाला अतिरिक्त समय समाप्त होगा, जिससे ट्रेन विलंब में कमी आएगी।
जसीडीह बाइपास का उद्घाटन किसने किया?
गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने 9 अक्टूबर 2026 को हरी झंडी दिखाकर जसीडीह रेल बाइपास लाइन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय और आसनसोल रेल मंडल के DRM संग्रह मौर्य भी उपस्थित रहे।
देवघर के धार्मिक पर्यटन के लिए यह परियोजना क्यों अहम है?
देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम के कारण एक प्रमुख तीर्थस्थल है और श्रावणी मेले जैसे अवसरों पर यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं। उस दौरान जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों का भारी दबाव रहता था, जो बाइपास के चालू होने से कम होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से कौन-से क्षेत्रों को रेल कनेक्टिविटी का फ़ायदा मिलेगा?
नई बाइपास लाइन से देवघर, जसीडीह, दुमका और गोड्डा क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, कम-से-कम 2 मालगाड़ियाँ बाधा-मुक्त होकर बाइपास से गुजर सकेंगी, जिससे क्षेत्र में माल परिवहन और औद्योगिक आपूर्ति को भी लाभ मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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