24 जुलाई 2026
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बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर ₹1,264 करोड़ की मल्टीट्रैकिंग परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, 2028-29 तक पूरा होगा काम

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बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर ₹1,264 करोड़ की मल्टीट्रैकिंग परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, 2028-29 तक पूरा होगा काम

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की ₹1,264 करोड़ की परियोजना को हरी झंडी दी है। 46 किमी के इस विस्तार से 99 गाँवों के 7 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और माल ढुलाई क्षमता में सालाना 16.22 एमटीपीए की बढ़ोतरी होगी।

मुख्य बातें

सीसीईए ने 24 जुलाई 2026 को ₹1,264 करोड़ की बल्लारी-गुंटकल मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजना को मंजूरी दी।
परियोजना के तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तीन जिलों में 46 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जाएगी।
लगभग 99 गाँवों के करीब 7 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
माल ढुलाई क्षमता में प्रतिवर्ष 16.22 एमटीपीए की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान।
परियोजना से 6.67 करोड़ किग्रा CO₂ उत्सर्जन में कमी और 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी।
काम 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य; प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 24 जुलाई 2026 को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को औपचारिक मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्वीकृत परियोजना की कुल लागत ₹1,264 करोड़ है और इसे 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

परियोजना का दायरा और विस्तार

सरकारी बयान के अनुसार, यह मल्टीट्रैकिंग परियोजना दोनों राज्यों के तीन जिलों में फैली हुई है और इसके तहत भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर नई रेल लाइन जोड़ी जाएगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को एकीकृत योजना के ज़रिए बढ़ाना है।

आम जनता और कनेक्टिविटी पर असर

परियोजना पूरी होने पर लगभग 99 गाँवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जहाँ करीब 7 लाख लोग निवास करते हैं। इसके अलावा, बल्लारी किला और श्री कुमार स्वामी मंदिर सहित क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और मज़बूत होगा। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के औद्योगिक गलियारों में बेहतर रेल बुनियादी ढाँचे की माँग लंबे समय से उठाई जा रही है।

माल ढुलाई और औद्योगिक महत्व

बयान के अनुसार, बल्लारी-गुंटकल रेलमार्ग लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से माल ढुलाई क्षमता में प्रतिवर्ष 16.22 मिलियन टन (एमटीपीए) की वृद्धि होने का अनुमान है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र भारत के प्रमुख खनन और इस्पात उत्पादन केंद्रों में से एक है, इसलिए इस रेलखंड की क्षमता वृद्धि का सीधा असर औद्योगिक लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ेगा।

पर्यावरणीय लाभ

सरकार ने इस परियोजना को जलवायु लक्ष्यों से भी जोड़ा है। आधिकारिक बयान के अनुसार, नेटवर्क विस्तार से लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी — जो लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के पर्यावरणीय प्रभाव के बराबर बताई गई है। रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल माध्यम माना जाता है।

परिचालन दक्षता और आगे की राह

अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से इस व्यस्त खंड पर भीड़भाड़ कम होगी और ट्रेन परिचालन अधिक सुचारु बनेगा। सरकार के अनुसार, इससे लाइन क्षमता, सेवा की विश्वसनीयता और समग्र परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना के पूरा होने पर क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद जताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इस परियोजना का औद्योगिक महत्व निर्विवाद है। हालाँकि, असली परीक्षा क्रियान्वयन की समयसीमा की होगी — भारतीय रेलवे की अनेक बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ घोषित समय-सीमा से काफी पीछे रही हैं। 2028-29 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और 7 लाख लोगों तथा क्षेत्रीय उद्योगों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब निर्माण गति और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बाधा-मुक्त रहे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बल्लारी-गुंटकल मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजना क्या है?
यह ₹1,264 करोड़ की केंद्रीय परियोजना है जिसके तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना में लगभग 46 किलोमीटर नई रेल लाइन शामिल है और इसे 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इस परियोजना को कब और किसने मंजूरी दी?
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 24 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी।
इस परियोजना से किन लोगों को फायदा होगा?
परियोजना पूरी होने पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लगभग 99 गाँवों के करीब 7 लाख निवासियों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा, बल्लारी किला और श्री कुमार स्वामी मंदिर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुँच भी आसान होगी।
इस रेलखंड का माल ढुलाई में क्या महत्व है?
बल्लारी-गुंटकल रेलमार्ग लौह अयस्क, कोयला, इस्पात, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। परियोजना पूरी होने के बाद माल ढुलाई क्षमता में प्रतिवर्ष 16.22 मिलियन टन की अतिरिक्त वृद्धि होने का अनुमान है।
इस परियोजना के पर्यावरणीय लाभ क्या हैं?
सरकारी बयान के अनुसार, इस नेटवर्क विस्तार से लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 6.67 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के पर्यावरणीय प्रभाव के बराबर है।
राष्ट्र प्रेस
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