रेलवे क्षमता विस्तार: केंद्र ने ₹23,437 करोड़ की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रेलवे क्षमता विस्तार: केंद्र ने ₹23,437 करोड़ की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

सारांश

केंद्र सरकार ने ₹23,437 करोड़ की तीन रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दी है — जो 6 राज्यों के 19 जिलों में 901 किलोमीटर नेटवर्क जोड़ेंगी, 83 लाख लोगों की कनेक्टिविटी सुधारेंगी और सालाना 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता देंगी।

मुख्य बातें

CCEA ने 5 मई 2026 को ₹23,437 करोड़ की तीन रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी।
स्वीकृत परियोजनाएँ: नागदा-मथुरा , गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर तीसरी व चौथी लाइन।
भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की वृद्धि होगी; 6 राज्यों के 19 जिले लाभान्वित।
लगभग 4,161 गाँवों और 83 लाख की आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
प्रतिवर्ष 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता; तेल आयात में 37 करोड़ लीटर की कमी संभव।
परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति (CCEA) ने मंगलवार, 5 मई 2026 को रेल मंत्रालय की ₹23,437 करोड़ की कुल लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की वृद्धि होगी और 6 राज्यों के 19 जिलों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

स्वीकृत परियोजनाएँ

केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई तीन परियोजनाएँ इस प्रकार हैं — नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन, और बुरहवाल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन। ये परियोजनाएँ मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैली हुई हैं। ये सभी परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है।

ग्रामीण कनेक्टिविटी और जनसंख्या पर असर

इन तीन परियोजनाओं से लगभग 4,161 गाँवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी कुल आबादी करीब 83 लाख है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही है।

माल ढुलाई और आर्थिक लाभ

क्षमता वृद्धि के परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता प्राप्त होगी। ये मार्ग कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर तथा उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, रेलवे के पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप के कारण तेल आयात में 37 करोड़ लीटर की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम की कटौती का अनुमान है, जो 7 करोड़ पौधारोपण के बराबर बताया जा रहा है।

पर्यटन और धार्मिक स्थलों को लाभ

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश के कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। इनमें महाकालेश्वर, रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान, कुनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेटिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर और नैमिषारण्य (नीमसर) शामिल हैं। इससे इन क्षेत्रों में पर्यटन और तीर्थयात्रा को भी बल मिलेगा।

आगे की राह

इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। बहु-ट्रैकिंग से भीड़भाड़ कम होगी और लोगों, वस्तुओं तथा सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। अब सभी की निगाहें इन परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और वास्तविक लाभ के वितरण पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

437 करोड़ की ये परियोजनाएँ संख्या में प्रभावशाली हैं, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — भारतीय रेलवे की बड़ी परियोजनाओं में देरी का इतिहास रहा है। पीएम-गति शक्ति के तहत एकीकृत योजना का दावा सकारात्मक है, पर 6 राज्यों में समन्वय की जटिलता को कम नहीं आँका जाना चाहिए। 901 किलोमीटर का नेटवर्क विस्तार और 83 लाख लोगों को कनेक्टिविटी — यदि समयसीमा में पूरा हो — तो यह वास्तव में परिवर्तनकारी होगा। लेकिन बिना पारदर्शी प्रगति-निगरानी तंत्र के, ये आँकड़े केवल घोषणाओं तक सीमित रहने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने किन तीन रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है?
केंद्र सरकार ने नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन, और बुरहवाल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन को स्वीकृति दी है। इन तीनों परियोजनाओं की कुल लागत ₹23,437 करोड़ है।
इन परियोजनाओं से कितने राज्यों और जिलों को फायदा होगा?
ये परियोजनाएँ मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना — कुल 6 राज्यों के 19 जिलों में फैली हैं। इनसे लगभग 4,161 गाँवों और 83 लाख की आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
इन रेलवे परियोजनाओं से माल ढुलाई पर क्या असर पड़ेगा?
क्षमता वृद्धि से प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता प्राप्त होगी। कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल और उर्वरक जैसी वस्तुओं के परिवहन में सुधार होगा।
पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से इन परियोजनाओं का क्या संबंध है?
ये तीनों परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं, जो बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। इस योजना में एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श को प्राथमिकता दी जाती है।
इन परियोजनाओं से पर्यावरण को क्या लाभ होगा?
रेलवे के पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप के कारण तेल आयात में 37 करोड़ लीटर की कमी और CO₂ उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम की कटौती का अनुमान है। यह 7 करोड़ पौधारोपण के बराबर बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले