₹23,437 करोड़ की तीन रेलवे परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, 901 किमी नई लाइन और 6 राज्यों में बेहतर कनेक्टिविटी

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₹23,437 करोड़ की तीन रेलवे परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, 901 किमी नई लाइन और 6 राज्यों में बेहतर कनेक्टिविटी

सारांश

₹23,437 करोड़ की तीन रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को कैबिनेट की हरी झंडी — 901 किमी नई लाइन, 6 राज्य, 19 जिले और 83 लाख की आबादी को सीधा फायदा। पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत यह कदम लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

CCEA ने 6 मई 2025 को रेलवे की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को ₹23,437 करोड़ की लागत से मंजूरी दी।
परियोजनाओं में नागदा–मथुरा , गुंटकल–वाडी और बुरहवाल–सीतापुर थर्ड व फोर्थ लाइन शामिल; कुल 901 किमी नई रेल लाइन जुड़ेगी।
6 राज्यों के 19 जिलों में 4,000 से अधिक गाँव और 83 लाख आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
प्रतिवर्ष 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता और 37 करोड़ लीटर ईंधन की बचत का अनुमान।
सभी परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत; पूर्णता की समयसीमा 2030-31 ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 6 मई 2025 को रेल मंत्रालय की तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹23,437 करोड़ है। ये परियोजनाएँ मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में फैली हैं और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूती मिलेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

तीन परियोजनाएँ: क्या है विवरण

मंजूर की गई तीन परियोजनाओं में नागदा–मथुरा थर्ड और फोर्थ लाइन, गुंटकल–वाडी थर्ड और फोर्थ लाइन और बुरहवाल–सीतापुर थर्ड और फोर्थ लाइन शामिल हैं। इन तीनों परियोजनाओं के पूरा होने पर भारतीय रेलवे नेटवर्क में कुल 901 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन जुड़ेगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, परिचालन में देरी कम होगी और रेल सेवाएँ अधिक भरोसेमंद बनेंगी।

आम जनता और गाँवों पर असर

सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएँ 4,000 से अधिक गाँवों और लगभग 83 लाख की आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन अवसंरचना की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय रोज़गार और व्यापार को भी बल मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन और माल ढुलाई को लाभ

इन परियोजनाओं से महाकालेश्वर, रणथंभौर नेशनल पार्क, केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुँच बेहतर होगी। माल ढुलाई के मोर्चे पर, रेलवे के अनुसार इन लाइनों से प्रतिवर्ष लगभग 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी। कोयला, सीमेंट, उर्वरक और लोहा-इस्पात जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई भी तेज़ होगी।

पर्यावरण और लॉजिस्टिक्स लाभ

सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से 37 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी और CO2 उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने से घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। गौरतलब है कि ये सभी योजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को सुदृढ़ करना है।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

संपादकीय दृष्टिकोण

437 करोड़ की ये परियोजनाएँ संख्या में प्रभावशाली हैं, लेकिन असली परीक्षा समयसीमा पर खरा उतरने की होगी — भारतीय रेलवे की बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ ऐतिहासिक रूप से लागत और समय दोनों में अनुमान से अधिक रही हैं। 2030-31 की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, विशेषकर जब भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरियाँ अक्सर अड़चन बनती हैं। पीएम-गति शक्ति ढाँचा सही दिशा में है, परंतु 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई के दावे को तभी परखा जा सकेगा जब परियोजनाएँ समय पर चालू हों। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र प्रगति निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹23,437 करोड़ की रेलवे परियोजनाएँ क्या हैं?
ये तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ हैं — नागदा–मथुरा, गुंटकल–वाडी और बुरहवाल–सीतापुर थर्ड व फोर्थ लाइन — जिन्हें CCEA ने 6 मई 2025 को ₹23,437 करोड़ की कुल लागत से मंजूरी दी। इनसे भारतीय रेलवे नेटवर्क में 901 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन जुड़ेगी।
ये परियोजनाएँ कब तक पूरी होंगी?
सरकार ने इन तीनों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालाँकि, बड़ी रेलवे परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और मंजूरियों के कारण विलंब सामान्य रहा है।
इन परियोजनाओं से किन राज्यों को फायदा होगा?
मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना — इन 6 राज्यों के 19 जिलों को इन परियोजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। लगभग 4,000 से अधिक गाँव और 83 लाख की आबादी बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जुड़ेगी।
माल ढुलाई और पर्यावरण पर क्या असर होगा?
रेलवे के अनुसार इन परियोजनाओं से प्रतिवर्ष लगभग 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी। साथ ही 37 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और CO2 उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है।
पीएम-गति शक्ति से इन परियोजनाओं का क्या संबंध है?
ये सभी परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाना है। इस ढाँचे के तहत विभिन्न मंत्रालयों की परियोजनाओं को एकीकृत रूप से नियोजित किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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