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बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर ₹1,264 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, 2028–29 तक पूरा होगा काम

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बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर ₹1,264 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, 2028–29 तक पूरा होगा काम

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर ₹1,264 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी दी — 46 किमी नेटवर्क विस्तार, 7 लाख लोगों को फायदा और सालाना 1.622 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता। यह गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत कर्नाटक-आंध्र कनेक्टिविटी का बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 24 जुलाई को बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को ₹1,264 करोड़ की लागत से मंजूरी दी।
परियोजना 2028–29 तक पूरी होगी और भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
लगभग 99 गाँव और करीब 7 लाख लोग बेहतर रेल संपर्क से सीधे लाभान्वित होंगे।
प्रतिवर्ष लगभग 1.622 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत और 6.67 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान।
परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 24 जुलाई को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को हरी झंडी दे दी है। ₹1,264 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को 2028–29 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले से तीन जिलों में रेल संपर्क और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नया आयाम मिलेगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ करना और लॉजिस्टिक लागत को कम करना है। नई लाइनें बिछने से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इससे लगभग 99 गाँवों की रेल संपर्क सुविधा बेहतर होगी और करीब 7 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

माल ढुलाई और आर्थिक प्रभाव

बल्लारी–गुंटकल रेलखंड लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक तथा अनाज की ढुलाई का प्रमुख गलियारा है। परियोजना पूरी होने पर प्रतिवर्ष लगभग 1.622 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी। गौरतलब है कि रेल परिवहन सड़क की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल है, जो देश के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है।

पर्यावरणीय लाभ

अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाने से लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होने का अनुमान है। साथ ही, 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 0.27 करोड़ वृक्षारोपण के समतुल्य है। यह पहल भारत की हरित परिवहन नीति को व्यावहारिक रूप देती है।

पर्यटन और सांस्कृतिक संपर्क

लाइन क्षमता बढ़ने से बल्लारी किला और श्री कुमार स्वामी मंदिर सहित क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन एवं सांस्कृतिक स्थलों तक रेल पहुँच बेहतर होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में कहा कि इस मंजूरी से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, यात्रियों की आवाजाही बढ़ेगी और नए आर्थिक अवसर उत्पन्न होंगे।

आगे की राह

यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास के साथ-साथ रोज़गार और स्वरोज़गार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मल्टी-ट्रैकिंग से रेल परिचालन अधिक सुचारु होगा, भीड़भाड़ कम होगी और सेवा विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

264 करोड़ की यह स्वीकृति तब आई है जब देश के कई रेल विस्तार प्रकल्प समयसीमा से वर्षों पीछे चल रहे हैं। असली कसौटी 2028–29 की समयसीमा का पालन होगी। इसके अलावा, 7 लाख लाभार्थियों और 99 गाँवों के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु इनका सत्यापन-योग्य मापन ढाँचा सार्वजनिक नहीं किया गया है — जो जवाबदेही की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कमी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बल्लारी–गुंटकल मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना क्या है?
यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने 24 जुलाई को ₹1,264 करोड़ की लागत से मंजूरी दी। इससे रेल नेटवर्क में 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी और माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
यह परियोजना कब तक पूरी होगी?
परियोजना को वर्ष 2028–29 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत क्रियान्वित की जाएगी।
इस परियोजना से किन्हें फायदा होगा?
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तीन जिलों के लगभग 99 गाँव और करीब 7 लाख लोग बेहतर रेल संपर्क से सीधे लाभान्वित होंगे। इसके अलावा, लौह अयस्क, कोयला, उर्वरक और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई करने वाले उद्योगों को भी माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि का लाभ मिलेगा।
परियोजना के पर्यावरणीय लाभ क्या हैं?
नई रेल लाइनों से लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 0.27 करोड़ वृक्षारोपण के समतुल्य है। रेल परिवहन सड़क की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल होने से यह भारत के जलवायु लक्ष्यों में योगदान देगा।
इस रेलखंड पर किन वस्तुओं की ढुलाई होती है?
बल्लारी–गुंटकल रेलखंड लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक तथा अनाज की ढुलाई का प्रमुख मार्ग है। परियोजना पूरी होने पर इस खंड पर प्रतिवर्ष लगभग 1.622 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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