पुरुलिया में ₹272 करोड़ की 11 किमी बाईपास लाइन को मंजूरी, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ माल ढुलाई होगी तेज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने 1 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच ₹272 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर लंबी बाईपास रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना साउथ ईस्टर्न रेलवे (SER) के माल ढुलाई नेटवर्क को नई क्षमता देगी और लौह अयस्क तथा कोकिंग कोल की आवाजाही को सुगम बनाएगी।
परियोजना में क्या शामिल है
यह बाईपास लाइन आद्रा-जॉयचंडी पहाड़-सांका कॉरिडोर पर बनेगी और तीसरी लाइन के लिए एक स्वतंत्र मार्ग तथा बाई-डायरेक्शनल कनेक्शन प्रदान करेगी। इससे प्रतिदिन 6.065 फ्रेट रेक की आवाजाही सुनिश्चित होगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर 8.88 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) का अतिरिक्त माल ट्रैफिक संभाला जा सकेगा।
औद्योगिक माल ढुलाई पर असर
रेलवे ने बताया कि यह बाईपास विशेष रूप से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की 23.40 MTPA लौह अयस्क की माँग और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के प्रतिदिन 45 कोल रेक के अनुमानित ट्रैफिक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। चक्रधरपुर डिवीजन से आयरन ओर, आद्रा होते हुए आसनसोल और दुर्गापुर के इस्पात उत्पादन क्षेत्रों तक पहुँचता है, जबकि उस बेल्ट की BCCL खदानों से कोकिंग कोल भी इसी सेक्शन से गुजरता है।
मौजूदा बाधाएँ और समाधान
रेलवे के अनुसार, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ सेक्शन का मौजूदा नेटवर्क 71 प्रतिशत क्षमता पर संचालित हो रहा है और सरफेस-क्रॉसिंग के कारण मालगाड़ियों की गति बाधित होती है। नई बाईपास लाइन इन परिचालन अवरोधों और सरफेस-क्रॉसिंग से होने वाली देरी को समाप्त करेगी। जॉयचंडी पहाड़-आद्रा सेक्शन की मौजूदा लाइन क्षमता 47.50 प्रतिशत है, जो 2028-29 तक बढ़कर 56.45 प्रतिशत होने का अनुमान है।
राष्ट्रीय कॉरिडोर से जुड़ाव
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बाईपास भारतीय रेलवे के लिए चिह्नित एनर्जी, मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर का अभिन्न हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त क्षमता और माल की सुगम आवाजाही से यह परियोजना औद्योगिक सामानों के परिवहन को सुदृढ़ करेगी और भविष्य में ट्रैफिक वृद्धि होने पर अधिक थ्रूपुट संभव बनाएगी।
आगे की राह
यह परियोजना निर्बाध माल आवाजाही के जरिए आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ कॉरिडोर के फ्रेट इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक रूप से मजबूत करेगी। गौरतलब है कि पूर्वी भारत के इस्पात और कोयला उद्योग की आपूर्ति शृंखला के लिए यह सेक्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस स्वीकृति से क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।