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पुरुलिया में ₹272 करोड़ की 11 किमी बाईपास लाइन को मंजूरी, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ माल ढुलाई होगी तेज

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पुरुलिया में ₹272 करोड़ की 11 किमी बाईपास लाइन को मंजूरी, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ माल ढुलाई होगी तेज

सारांश

भारतीय रेलवे ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में ₹272 करोड़ की 11 किमी बाईपास लाइन को हरी झंडी दी है। SAIL की 23.40 MTPA लौह अयस्क माँग और BCCL के 45 दैनिक कोल रेक को ध्यान में रखकर बनी यह परियोजना SER के माल ढुलाई नेटवर्क की क्षमता और दक्षता दोनों बढ़ाएगी।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने पुरुलिया जिले में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच ₹272 करोड़ की 11 किलोमीटर बाईपास लाइन को मंजूरी दी।
परियोजना से प्रतिदिन 6.065 फ्रेट रेक की आवाजाही और 8.88 MTPA अतिरिक्त माल ट्रैफिक संभव होगा।
SAIL की 23.40 MTPA लौह अयस्क माँग और BCCL के 45 कोल रेक प्रतिदिन की जरूरत को ध्यान में रखकर परियोजना तैयार की गई है।
मौजूदा नेटवर्क 71% क्षमता पर है; सेक्शन की लाइन क्षमता 2028-29 तक 47.50% से बढ़कर 56.45% होने का अनुमान।
यह बाईपास भारतीय रेलवे के एनर्जी, मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है।

भारतीय रेलवे ने 1 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच ₹272 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर लंबी बाईपास रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना साउथ ईस्टर्न रेलवे (SER) के माल ढुलाई नेटवर्क को नई क्षमता देगी और लौह अयस्क तथा कोकिंग कोल की आवाजाही को सुगम बनाएगी।

परियोजना में क्या शामिल है

यह बाईपास लाइन आद्रा-जॉयचंडी पहाड़-सांका कॉरिडोर पर बनेगी और तीसरी लाइन के लिए एक स्वतंत्र मार्ग तथा बाई-डायरेक्शनल कनेक्शन प्रदान करेगी। इससे प्रतिदिन 6.065 फ्रेट रेक की आवाजाही सुनिश्चित होगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर 8.88 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) का अतिरिक्त माल ट्रैफिक संभाला जा सकेगा।

औद्योगिक माल ढुलाई पर असर

रेलवे ने बताया कि यह बाईपास विशेष रूप से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की 23.40 MTPA लौह अयस्क की माँग और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के प्रतिदिन 45 कोल रेक के अनुमानित ट्रैफिक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। चक्रधरपुर डिवीजन से आयरन ओर, आद्रा होते हुए आसनसोल और दुर्गापुर के इस्पात उत्पादन क्षेत्रों तक पहुँचता है, जबकि उस बेल्ट की BCCL खदानों से कोकिंग कोल भी इसी सेक्शन से गुजरता है।

मौजूदा बाधाएँ और समाधान

रेलवे के अनुसार, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ सेक्शन का मौजूदा नेटवर्क 71 प्रतिशत क्षमता पर संचालित हो रहा है और सरफेस-क्रॉसिंग के कारण मालगाड़ियों की गति बाधित होती है। नई बाईपास लाइन इन परिचालन अवरोधों और सरफेस-क्रॉसिंग से होने वाली देरी को समाप्त करेगी। जॉयचंडी पहाड़-आद्रा सेक्शन की मौजूदा लाइन क्षमता 47.50 प्रतिशत है, जो 2028-29 तक बढ़कर 56.45 प्रतिशत होने का अनुमान है।

राष्ट्रीय कॉरिडोर से जुड़ाव

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बाईपास भारतीय रेलवे के लिए चिह्नित एनर्जी, मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर का अभिन्न हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त क्षमता और माल की सुगम आवाजाही से यह परियोजना औद्योगिक सामानों के परिवहन को सुदृढ़ करेगी और भविष्य में ट्रैफिक वृद्धि होने पर अधिक थ्रूपुट संभव बनाएगी।

आगे की राह

यह परियोजना निर्बाध माल आवाजाही के जरिए आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ कॉरिडोर के फ्रेट इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक रूप से मजबूत करेगी। गौरतलब है कि पूर्वी भारत के इस्पात और कोयला उद्योग की आपूर्ति शृंखला के लिए यह सेक्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस स्वीकृति से क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब इस्पात और कोयला उद्योग की माँग अपने अनुमानित शिखर पर होगी। पूर्वी भारत में रेलवे की कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ भूमि अधिग्रहण और निविदा प्रक्रिया में देरी का शिकार होती रही हैं। ₹272 करोड़ की यह राशि अपेक्षाकृत सीमित है, जो बताती है कि क्रियान्वयन की गति ही इस परियोजना की वास्तविक कसौटी होगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ बाईपास लाइन क्या है?
यह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच प्रस्तावित 11 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन है, जिसे भारतीय रेलवे ने ₹272 करोड़ की लागत से निर्माण की मंजूरी दी है। यह साउथ ईस्टर्न रेलवे के माल ढुलाई नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए बनाई जाएगी।
इस बाईपास लाइन से माल ढुलाई को क्या फायदा होगा?
बाईपास लाइन से प्रतिदिन 6.065 फ्रेट रेक की आवाजाही सुगम होगी और 8.88 MTPA अतिरिक्त माल ट्रैफिक संभाला जा सकेगा। यह SAIL की लौह अयस्क और BCCL के कोकिंग कोल की आवाजाही में आने वाली परिचालन बाधाओं को दूर करेगी।
इस परियोजना से SAIL और BCCL को कैसे लाभ मिलेगा?
SAIL की 23.40 MTPA लौह अयस्क की माँग और BCCL के प्रतिदिन 45 कोल रेक के अनुमानित ट्रैफिक को ध्यान में रखकर यह बाईपास डिज़ाइन किया गया है। चक्रधरपुर से आसनसोल और दुर्गापुर के इस्पात संयंत्रों तक माल की आवाजाही तेज और बाधामुक्त होगी।
मौजूदा आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ सेक्शन की क्षमता कितनी है?
फिलहाल इस सेक्शन का नेटवर्क 71 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा है और लाइन क्षमता 47.50 प्रतिशत है। बाईपास पूरी होने के बाद यह क्षमता 2028-29 तक बढ़कर 56.45 प्रतिशत होने का अनुमान है।
यह बाईपास भारतीय रेलवे के किस बड़े कॉरिडोर का हिस्सा है?
यह परियोजना भारतीय रेलवे के एनर्जी, मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है, जो देश के औद्योगिक माल परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए चिह्नित किया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक के लिए अतिरिक्त थ्रूपुट क्षमता सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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