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भारतीय रेलवे की ₹440 करोड़ की मंजूरी: निमपुरा–मिदनापुर के बीच बिछेगी 14.52 किमी तीसरी रेल लाइन

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भारतीय रेलवे की ₹440 करोड़ की मंजूरी: निमपुरा–मिदनापुर के बीच बिछेगी 14.52 किमी तीसरी रेल लाइन

सारांश

भारतीय रेलवे ने निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किमी तीसरी रेल लाइन के लिए ₹440 करोड़ मंजूर किए। मौजूदा लाइन क्षमता 115.71% तक भरी है; नई लाइन से सालाना 3.52 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने 23 जुलाई 2026 को ₹440 करोड़ की तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी।
परियोजना निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से मिदनापुर तक 14.52 किलोमीटर की दूरी को कवर करेगी।
मौजूदा लाइन क्षमता का उपयोग 115.71 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जो अत्यधिक भीड़भाड़ को दर्शाता है।
परियोजना पूरी होने पर प्रतिवर्ष अतिरिक्त 3.52 मिलियन टन (MTPA) माल ढुलाई संभव होगी।
वर्तमान में इस मार्ग पर 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल का परिवहन होता है।
यह परियोजना हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN-2) का हिस्सा है।

भारतीय रेलवे ने 23 जुलाई 2026 को दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की ₹440 करोड़ की परियोजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह कदम इस अत्यधिक व्यस्त कॉरिडोर पर यात्री एवं मालगाड़ियों की आवाजाही को सुगम बनाने की दिशा में उठाया गया है, जहाँ मौजूदा लाइन क्षमता का उपयोग 115.71 प्रतिशत तक पहुँच चुका है।

परियोजना का विवरण

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN-2) का हिस्सा है और भारतीय रेलवे की हाई-डेंसिटी रूट्स पर नेटवर्क क्षमता विस्तार की दीर्घकालिक रणनीति के तहत स्वीकृत की गई है। फिलहाल निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का हिस्सा सिंगल लाइन है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से प्रगति पर है। तीसरी लाइन के निर्माण के बाद इस रणनीतिक मार्ग की परिचालन क्षमता और लचीलेपन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

माल ढुलाई पर असर

परियोजना के पूरा होने के बाद इस मार्ग पर प्रतिवर्ष अतिरिक्त 3.52 मिलियन टन (MTPA) माल ढुलाई संभव होगी। वर्तमान में इस कॉरिडोर पर लगभग 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल का परिवहन होता है। इस मार्ग से मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा-इस्पात, गेहूँ, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, केमिकल सॉल्ट, चारकोल, सीमेंट, बैलेस्ट और राख जैसी आवश्यक वस्तुओं का परिवहन होता है।

क्यों है यह परियोजना अहम

यह ऐसे समय में आया है जब देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर पर क्षमता से अधिक उपयोग की समस्या गहराती जा रही है। 115.71 प्रतिशत लाइन उपयोग का आँकड़ा बताता है कि मौजूदा ढाँचा माँग के अनुरूप नहीं है। गौरतलब है कि यह सेक्शन पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण आर्थिक धमनी है, जिस पर उद्योगों और कारोबारों की निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

अपेक्षित लाभ

रेलवे के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आएगी, परिचालन संबंधी बाधाएँ कम होंगी और नेटवर्क की समग्र विश्वसनीयता बढ़ेगी। इस कॉरिडोर पर निर्भर उद्योगों एवं कारोबारों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जो क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने में सहायक होगी।

आगे की राह

भारतीय रेलवे का कहना है कि यह मंजूरी हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर क्षमता विस्तार की उसकी व्यापक योजना का एक हिस्सा मात्र है। लक्ष्य है कि माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही को तेज एवं सुचारु बनाते हुए देश के आर्थिक विकास को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क के जरिये समर्थन दिया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निर्माण की समयसीमा और लागत-अनुपालन कितना सटीक रहेगा — भारतीय रेलवे की बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि का इतिहास रहा है। इसके अलावा, HUN-2 के तहत अन्य सेक्शनों की स्थिति पर पारदर्शिता की कमी चिंताजनक है। तीसरी लाइन तब तक पूरी क्षमता नहीं दे पाएगी जब तक निमपुरा से गोकुलपुर के बीच चल रही डबलिंग परियोजना भी समय पर पूरी न हो।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे की निमपुरा–मिदनापुर तीसरी लाइन परियोजना क्या है?
यह दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की ₹440 करोड़ की परियोजना है, जिसे 23 जुलाई 2026 को मंजूरी मिली। इसका उद्देश्य इस अत्यधिक व्यस्त कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना और माल व यात्री ट्रेनों की आवाजाही सुगम करना है।
इस मार्ग पर तीसरी लाइन की जरूरत क्यों पड़ी?
इस सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जो अत्यधिक भीड़भाड़ का संकेत है। वर्तमान में यहाँ 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई होती है और माँग लगातार बढ़ रही है, इसलिए अतिरिक्त लाइन अनिवार्य हो गई थी।
तीसरी लाइन बनने के बाद माल ढुलाई में कितना इजाफा होगा?
परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर प्रतिवर्ष अतिरिक्त 3.52 मिलियन टन (MTPA) माल ढुलाई संभव होगी। इससे मैंगनीज, कोयला, लौह अयस्क, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद सहित दर्जनों आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में तेजी आएगी।
यह परियोजना HUN-2 से कैसे जुड़ी है?
यह सेक्शन हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN-2) का हिस्सा है, जो भारतीय रेलवे की उन रूट्स की पहचान करता है जहाँ क्षमता संकट सबसे गंभीर है। HUN-2 के तहत ऐसे मार्गों पर प्राथमिकता से क्षमता विस्तार किया जाता है।
इस परियोजना से किन उद्योगों और क्षेत्रों को फायदा होगा?
इस कॉरिडोर पर निर्भर खनन, इस्पात, सीमेंट, कृषि और पेट्रोलियम क्षेत्र के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और परिचालन संबंधी बाधाएँ कम होने से आपूर्ति शृंखला अधिक विश्वसनीय बनेगी।
राष्ट्र प्रेस
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