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क्या कैबिनेट ने 12,328 करोड़ रुपए के रेलवे प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी?

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क्या कैबिनेट ने 12,328 करोड़ रुपए के रेलवे प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी?

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए 12,328 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इन चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्देश्य यात्री और सामान के परिवहन में सुधार लाना है, जिससे 13 जिलों को लाभ होगा। जानें इन परियोजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी।

मुख्य बातें

कुल लागत: 12,328 करोड़ रुपए कनेक्टिविटी में वृद्धि: 565 किलोमीटर नए रेलवे स्टेशन: 13 प्रत्यक्ष रोजगार: 251 लाख मानव-दिवस परियोजनाओं का समय-सीमा: 3 से 5 वर्ष

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 12,328 करोड़ रुपए है। यह जानकारी बुधवार को सरकार द्वारा साझा की गई।

इन परियोजनाओं में शामिल हैं: देशलपार - हाजीपीर - लूना और वायोर - लखपत नई लाइन, सिकंदराबाद (सनथनगर) - वाडी तीसरी और चौथी लाइन, भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन और फुर्केटिंग - न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण।

गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम के 13 जिलों को कवर करने वाली इन चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 565 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

नई परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और सामान का त्वरित और निर्बाध परिवहन सुनिश्चित करना है। ये पहल कनेक्टिविटी और यात्रा की सुविधा में सुधार के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स लागत को भी कम करेंगी।

इसके साथ ही, ये परियोजनाएं कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेंगी, जिससे स्थायी और कुशल रेल संचालन को बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 251 लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

प्रस्तावित नई रेल लाइन कच्छ क्षेत्र के दूरदराज के क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह गुजरात के विद्यमान रेलवे नेटवर्क में 145 रूट किमी और 164 ट्रैक किमी जोड़ेगी, जिसकी अनुमानित लागत 2526 करोड़ रुपए है। परियोजना का पूरा होने का अनुमानित समय 3 वर्ष है।

गुजरात में पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, यह नई रेल लाइन नमक, सीमेंट, कोयला, क्लिंकर और बेंटोनाइट के परिवहन में भी सहायक होगी। इस परियोजना का रणनीतिक महत्व यह है कि यह कच्छ के रण को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इसमें 13 नए रेलवे स्टेशन जोड़े जाएंगे, जिससे हड़प्पा स्थल धोलावीरा, कोटेश्वर मंदिर, नारायण सरोवर और लखपत किला भी रेल नेटवर्क के अंतर्गत आ जाएंगे। इससे 866 गांवों और लगभग 16 लाख जनसंख्या को लाभ होगा।

कर्नाटक और तेलंगाना में फैली 173 किलोमीटर लंबी सिकंदराबाद (सनथनगर) - वाडी तीसरी और चौथी लाइन के पूरा होने की समय-सीमा पांच वर्ष और लागत 5012 करोड़ रुपए है, जबकि बिहार में 53 किलोमीटर लंबी भागलपुर - जमालपुर तीसरी लाइन के लिए यह तीन साल है और इसकी लागत 1156 करोड़ रुपए है। 194 किलोमीटर लंबी फुरकेटिंग - न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण परियोजना का कार्य चार वर्षों में पूरा होगा, जिसकी लागत 3634 करोड़ रुपए है।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि भारत का रेलवे नेटवर्क और अधिक सक्षम और प्रभावी बने। ये प्रयास देश के विभिन्न हिस्सों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन परियोजनाओं की कुल लागत कितनी है?
इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 12,328 करोड़ रुपए है।
इन परियोजनाओं से कितने जिलों को लाभ होगा?
इन चार परियोजनाओं से गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम के 13 जिलों को लाभ होगा।
नए रेलवे स्टेशनों की संख्या कितनी होगी?
इन परियोजनाओं में 13 नए रेलवे स्टेशन जोड़े जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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