बेंगलुरु-तुमकुरु फोर-ट्रैक रेलवे लाइन: ₹6,000 करोड़ की परियोजना, 5-6 महीने में शुरू होगा भूमि अधिग्रहण
सारांश
मुख्य बातें
रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने 20 जून 2026 को घोषणा की कि बेंगलुरु और तुमकुरु के बीच ₹6,000 करोड़ से अधिक की लागत वाली क्वाड्रुपल रेल लाइन परियोजना की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं, और अगले 5-6 महीनों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना कर्नाटक के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर भीड़भाड़ कम करने और यात्रा समय को लगभग आधा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति
मंत्री सोमन्ना ने बताया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और तकनीकी समिति की मंजूरी भी मिल गई है। उन्होंने कहा, 'अब यह प्रस्ताव कैबिनेट और नीति आयोग के पास जाएगा। इसके बाद पाँच-छह महीनों में भूमि अधिग्रहण शुरू कर दिया जाएगा।' अतिरिक्त भूमि की पहचान का काम तेज गति से जारी है।
परियोजना में क्या बदलेगा
फिलहाल बेंगलुरु से तुमकुरु के बीच डबल ट्रैक है, जिसे चार लाइनों में विकसित किया जाएगा। इससे एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें अलग-अलग ट्रैक पर चल सकेंगी, जिससे सिग्नल या क्रॉसिंग की प्रतीक्षा समाप्त होगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे बेंगलुरु-तुमकुरु के बीच यात्रा का समय लगभग आधा होने की उम्मीद है और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
मेट्रो विस्तार की भी संभावना
सोमन्ना ने यह भी बताया कि उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर बेंगलुरु से तुमकुरु तक मेट्रो विस्तार के इच्छुक हैं और केंद्र सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार है। मंत्री ने कहा कि यदि बेंगलुरु की तर्ज पर किसी शहर को विकसित करने की संभावना है, तो वह तुमकुरु है — जो राज्य की राजधानी से करीब 68 किलोमीटर दूर स्थित जिला मुख्यालय है।
आम यात्रियों पर असर
रोज़गार, शिक्षा और व्यापार के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग तुमकुरु-बेंगलुरु रेल मार्ग का उपयोग करते हैं। मौजूदा डबल ट्रैक बढ़ते रेल यातायात का दबाव झेलने में असमर्थ है, जिससे ट्रेनों में देरी और यात्रियों को असुविधा होती है। चार-लाइन परियोजना पूरी होने के बाद दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियाँ भी तेज होंगी।
आगे क्या होगा
प्रस्ताव के कैबिनेट और नीति आयोग से मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि यह कर्नाटक के रेल बुनियादी ढाँचे में किए जाने वाले सबसे बड़े निवेशों में से एक है, और इसकी सफलता राज्य के अन्य शहरी-उपनगरीय रेल गलियारों के लिए एक मॉडल बन सकती है।